उग्र शामशानिक बैताल साधना :

उग्र शामशानिक बैताल साधना :
○इस साधना के संपन्न होने के बाद संसार का कोई ऐसा काम नहीं है मृत्यु के इलावा जो कि साधक बैताल से ना करवा सके बैताल साधक को किसी भी व्यक्ति के भूत भविष्य वर्तमान और मनोभावों को बता सकता है।होने वाली घटनाओं का साधक पहले से ज्ञान हो जाता है पूर्व में हुई पहले की घटना को भी साधक इस साधना द्वारा बेताल से जान सकता है ।
○किसी भी इच्छित पदार्थ को उठाकर साधक के पास ला सकता है। चाहे वह कितना भी भारी हो कोई भी फल बिना मौसम का कोई भी फूल यह बैताल साधक को लाकर दे सकता है। कोई भी खबर लाकर साधक को बेताल दे सकता है चाहे वह विदेश की ही क्यों ना हो।
○जो ज्योतिषी का काम करते हैं उनके लिए यह साधना बहुत उत्तम है क्योंकि इसमें किसी भी प्रश्नों के उत्तर और सटीक भविष्यवाणी साधक कर सकता है।
○यह साधना बहुत ही उग्र बहुत ही डरावनी और खतरनाक है ।इसको करने वाला साधक सबसे पहले ब्रह्माचर्य पालन करने वाला साहसी और निडर जो साधक हो वही इसे कर सकता है कमजोर दिल वाला इसे करने की कोशिश न कभी ना करें क्योंकि कमजोर दिल वाला आदमी जब बेताल उनके सामने आएगा तो वहां से उठकर भागने वाला नहीं होना चाहिए। वरना साधक के प्राण जाने का भय रहता है।या कम से कम पागल तो हो ही जाता है ।
○अक्सर कई साधकों को ही है शिकायत रहती है कि उनकी कोई साधना सफल नहीं हुई इसका एक गुप्त भेद मेंआपको बताता हूं जिस साधक के घर का देवता पितर सही नहीं होगा उसको कभी सिद्धि प्राप्त नहीं होगी यह गुप्त भेद है इसके लिए पहले अपने देवता पितृ को मना लिया जाना चाहिए।
○ इसमें देखने वाली एक विशेष बात यह होती है कि साधक जिनकी कुछ नजर खुली होती है तीसरी आंख जिसे बोला जाता सामान्य भाषा में उनको तो यह आत्मएं बहुत जल्दी दर्शन दे देती हैं लेकिन जिस की तीसरी आंख या बात नहीं आंख या रूहानी आंख ना खुली हो या किसी द्वारा बंधित कर दी गई हो उनको सिद्धि तो होती है लेकिन उनको खुद पता नहीं चलता कि उनका कुछ भला हुआ है या नहीं।
○ ग्राम देवता कोई मामूली देवता नहीं होता सारे इलाके का मालिक होता है इसलिए ग्राम देवता की पूजा पहले करनी चाहिए और उन्हें आप जो भी भोग भेंट चढ़ा सके जो भी आप चढ़ा सको भेंट चढ़ानी चाहिए। और ग्राम देवता की अनुमति प्राप्त करें।
○ कुल देवता/देवी जिस कुल और गोत्र में आप पैदा हुए हो उसके देवता को मनाये बिना सिद्धि प्राप्त कर लेना असंभव होता है इसलिए साधनाओं के विभिन्न विभिन्न आयामों के ऊपर देखना पड़ता है कि कहीं से भी आपके असफलता का अवसर ना रहे तो ही साधना सफल हो पाती है।
○ ऐसे में साधना करने से पहले किसी जानकारों विद्वान आदमी से चलाता लेनी चाहिए क्योंकि सादा कई बार एक ही गलती को अनजाने में कई बार करता रहता है और उस गलती को दोहराने के चक्कर में उसकी साधना असफल होती रहती है।
○गुरु की अनुमति जब आप गुरु का नहीं मना पाओगे तो भी आपको कोई सिद्धि प्राप्त नहीं होगी क्योंकि गुरु ऐसी चीज होती है कि आपकी साधना से अगर कोई नकारात्मक ऊर्जा निकलती है तो गुरु से संभालता है। गुरु का ऋण कोई भी नहीं दे सकता अपने जीवन में सालों के अनुभव को बिना किसी स्वार्थ के आपके जीवन की सभी कमियों को पूरा करने के लिए ज्ञान देते हैं और ऐसी युक्तियां बताते हैं जिससे आपकी सभी सांसारिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति हो तो इस बात पर विशेष ध्यान दें कि गुरु को गुरु दक्षिणा देकर के अवश्य संतुष्ट किया जाए।
○ साधना विषय के सभी नियमों को मानते हुए ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए इस प्रयोग को करना चाहिए ताकि सफलता प्राप्त हो।
○यह साधना पूर्णतया शमशानिक क्रिया प्रधान साधना है। जी ने साधकों को कभी भी किसी साधना में सफलता नहीं मिली अगर वह इसे पूरी विधि से कर लेते हैं तो उन्हें भी सफलता मिलने के शत-प्रतिशत गैरेंटी है।
○ यह साधना कभी फेल नहीं जाती और इस साधना को करने के लिए कोई बहुत लंबी चौड़ी है जटिल प्रक्रिया नहीं है।
○ रविवार या मंगलवार को पंचांग में शुभ मुहूर्त देखकर के गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद आपको श्मशान जाना है और जलती हुई चिता के पांव की तरफ खड़ा हो जाना है और नमस्कार करना है फिर 7 बार प्रदक्षिणा करनी है और बेताल को निमंत्रण के लिए पांच बूंदी वाले लड्डू ,सात लौंग ,सात छोटी इलायची, एक कलावे का जोड़ा, एक पव्वा शराब देशी का, एक जोड़ा सबूत सुपारी,कच्चे चावल जिनमें हल्दी लगी हो, यह बेताल के आवाहन के लिए चिता के पास सिरहाने की ओर रखना है।
○ फिर बेताल का आवाहन करना है और साधना के लिए आपको जलती हुई चिता में से एक अस्थि नमस्कार पूर्वक अपने साथ लेकर पहले उसे शराब से स्नान कराना है फिर एक जोड़ा भुनी हुई मछली जिनका आकार छोटी उंगली जैसा हो एक डोने में रख देना है और और शराब का छींटा उस धोने पर और शव के ऊपर मार देना बेताल के भोग के लिए वही छोड़ देना है ।
○ पहले दिन जब आप शव की अस्थि ले करके आओगे तो जो मछली और शराब का भोग है आपको जहां से आप अस्थि ग्रहण करोगे वहां देना होगा दूसरे दिन से वह भोग जाप के उपरांत आपको श्मशान में ही किसी पीपल या वट वृक्ष के नीचे देना है।
○फिर अस्थि एक साफ लाल कपड़े में लपेटकर ऊपर से कलावा बांधते हुए बंधन मंत्र से उस अस्थि को बांधना है फिर उस अस्थि को साथ लेकर आपको भगवान शिव के मंदिर में जाना है।
○आधी रात में भगवान शिव के मंदिर में जाकर सबसे पहले भगवान शिव को प्रणाम करके विधिवत उनकी पूजा करनी चाहिए फिर गणेश पूजन उसके बाद गुरु मंत्र की पांच माला आपको जाप करना चाहिए ।
○उसके उपरांत मंदिर में ही किसी एकांत कोने में आसन बिछाकर उस अस्थि को अपने आसन के नीचे रख लेना है और उस आसन पर बैठने से पहले आपको रक्षा मंत्र से एक खुला घेरा लगाना है ।
○आसन पर बैठने से पहले सिद्ध आसन मंत्र इक्कीस बार जाप करना है फिर आसन को नमस्कार करके उस पर बैठना है।
○ दाहिने हाथ में रुद्राक्ष की माला लेकर जो की माला गोमुखी में होनी चाहिए नंगी माला से जाप करना वर्जित है और इन प्रयोगों में माला केवल संस्कारित होनी चाहिए ।
○वहां बैठकर एक ही बैठक में आपको 51 माला वेताल के मंत्र का जाप करना है।
○ इस साधना में जो वस्त्र होंगे वह बिना सिले हुए वस्त्र होंगे और वह भी वस्त्र आपके काले रंग के होने चाहिए एक छोटे वस्त्र से सिर भी ढक कर रखना चाहिए।
○ बिना तिलक के यह साधना कभी नहीं करनी चाहिए इसलिए घर से निकलते हुए पहले कुमकुम का तिलक लगाएं।
○ श्मशान में प्रतिदिन आपको दो भुनी हुई छोटी मछली जिस पर नमक और हल्दी लगानी है और थोड़ी सी शराब किसी भी पात्र में रखकर शमशान में पीपल का पेड़ हो या वट का पेड़ हो उसके नीचे रख देनी है और बेताल के लिए दीपक जलाना है। यह दीपक तिल के तेल का होना चाहिए।
○ जाप करने के बाद वह अस्थि उठाकर जिस पेड़ के नीचे आप दीपक लगाते हैं नित्य प्रति श्मशान में उसके ऊपर ही कहीं सुरक्षित रख देनी है फिर बेताल को भोग देना है इस प्रकार यह क्रम चलेगा दूसरे दिन वही से अस्थि को उठाकर भगवान भोलेनाथ के मंदिर में जाना है और आपको जाप करना है जाप के उपरांत वापस लौटते हुए जब आप शमशान जाओगे तो आपको उस स्त्री को रखें बेताल के निमित्त भोग दे देना है।
○ आमतौर पर दूसरे से तीसरे दिन बेताल आपसे संपर्क करने की कोशिश करने लग जाता है भयानक रूप से से और हाहाकार मचा देता है उस अवस्था में साधक को डरना नहीं चाहिए जब तक वह मंत्रों से सुरक्षित है उसकी साधना से उत्पन्न हुई नकारात्मक ऊर्जा उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकती।
○पहले दिन साधक को सपने में बेताल आकर मिलेगा लेकिन वह अपने वास्तविक रूप में नहीं होगा वह उग्र रूप में बयानाक जानवरों भयानक आकृति या किसी ऐसे भी भयानक रूप में आपको सपने में दिखाई देगा और ऐसे ऐसे डरावने सपने दिखाएगा जिससे साधक पहले ही दिन सारी साधना छोड़ कर भाग जाए।
○ यही काम लगातार इक्कतालीस दिन तक चलेगा और इसमें भिन्न-भिन्न प्रकार के रूप बनाकर के पक्षी पक्षी पशु पक्षियों के रूप बनाकर और विचित्र रूप से बैताल साधक को डराने की कोशिश करेगा और यह पूरा प्रयास करेगा कि साधक की साधना भंग हो जाए।
○ इस क्रिया के अंत में जो अंतिम सप्ताह होगा अपनी तरफ से बेताल डराने की पूरी कोशिश करेगा अगर साधक नहीं डरेगा तो अंतिम दिन बैताल उग्र रूप को या भयानक रूप को त्याग कर साधक के सामने सौम्य रूप में प्रकट होगा।
○ और साधक से वचन मांगने को कहेगा यह एक ऐसा अवसर होता है कि आपकी सारी साधना का फल उन्हीं कुछ पलों के ऊपर निर्भर करता है अगर साधक भयभीत हो गया और वचन नहीं मांगे तो बेताल चला जाएगा और दोबारा नहीं आएगा।
○ इस साधना में सफल होने के लिए गुरु कृपा के अलावा मनुष्य को साहसी निडर कर्म शील होना चाहिए क्योंकि यह रात्रि की साधना है और इसमें दूसरे व्यक्ति को साथ में लेकर नहीं जा सकते।
○ ये एक उग्र और तामसिक साधना है इसलिए इस साधना के साथ उस समय में कोई और साधना नहीं की जा सकती।
○ जिस दिन आप बैताल साधना के लिए अस्थि लेने के लिए जाएं उससे पहले आपको एक दिन पहले आपको कच्चे चावल हल्दी लगाकर शमशान में निमंत्रण के लिए रख कर आने पड़ेंगे।
○साधना में सफलता प्राप्त करने के बाद किसी प्रकार का अहंकार मन में ना लाये और दूसरों पर हवा करने के लिए अपनी शक्तियों का प्रदर्शन न करें वरना आपकी सिद्धि नष्ट हो जाएगी।
○ सिद्धि प्राप्त होने के बाद बैताल से कोई भी नाजायज काम ना करवाएं वरना आपको लेने के देने पड़ सकते हैं और आप किसी बड़े संकट में पड़ सकते हैं।
○ सिद्धि प्राप्त होने के बाद उस अस्थि को साधक सदा के लिए अपने पास सुरक्षित करके संभाल के रख ले।
।।शमशान की शक्तियों को जगाने का मंत्र।।
“जाग जाग मां काली मरघट की तू रखवाली ।
उठ जाग काले भैरव जाग मुर्दे में लगी आग।
ढाई घड़ी में धूनी धूखाये सब कोई जागे तेरे जगाए।।
दोहाई गुरू गोरखनाथ की बंगाल खंड की कामरु
कामाक्षा देवी की आन।”
।।बेताल का मंत्र।। :- “हम हुम्म सुनसान सोख्ता मसान नाचे भूत जागे शैतान। ”
आपको इस साधना को करने के लिए अनुमति प्राप्त करनी होगी बिना आज्ञा इस प्रयोग को करने वाले व्यक्ति के लाभ हानि का उत्तरदायित्व हमारा नहीं होगा।
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जय माँ कामाख्या

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