चंद्रकला अप्सरा साधना के लाभ

चंन्द्रकला अप्सरा साधना :

चंन्द्रकला अप्सरा : इस अप्सरा का बिबरण बहुत ही कम ग्रथों में मिलता है । इनका नाम है चन्द्रकला । महर्षि अत्रि और अनुसूया के पुत्र चन्द्रदेब जो सोलह कलाओं से युक्त हैं, उनकी सेबिका और शक्ति चन्द्रकला हैं । किसी भी ब्यक्ति के मन को बिचलित करने हेतु इन्हें इन्द्रलोक से भेजा जाता था । जो ब्यक्ति चंन्द्रकला अप्सरा की साधना कर लेता है, उसकी मानसिक शक्ति सुदृढ हो जाती है । सदेब बह ब्यक्ति उत्साह में रहता है । चन्द्रकला की साधना सिद्ध होने पर साधक के साथ यह मित्रबत या प्रेमिका रूप में भी रह सकती है ।
 
चंन्द्रकला अप्सरा की साधना अत्यन्त शुभ है, इसमें अधिक बाधायें नहीं आती । चन्द्रकला अप्सरा को सिद्ध करने हेतु भयमुक्त होकर संकल्पपूर्बक प्रसन्नता से साधना करें । साधना के मध्य यदि साधक भयभीत हो जाये, तो यह प्रसन्न नहीं होती अर्थात् प्रत्यख्य नहीं होती । प्रकट होने पर यह साधक को प्रेमभाब से परिपूर्ण कर देती है । सुख, सम्पति और बैभब प्रदान करने बाली देबी चन्द्रकला हैं । चंन्द्रकला अप्सरा की साधना से चंन्द्र बलशाली होकर साधक का मनोबल बढा देता है ।
 
इनकी साधना के लिए गुरू आज्ञा से गुरु मंत्र का १ माला जप करें । यह कार्य पूर्णिमा की रात्रि से एकांत स्थान में करें । सर्बप्रथम एक सफेद रंग का कपडा बिछायें, उसके ऊपर एक मनमोहक नारी का चित्र रखें । घी का दीपक जलाकर साधना का आरम्भ करें । यह साधना ५१ दिन की है, यह साधना लम्बी है, प्रतिदिन ३१ माला मंत्र जप करना है । इसके अतिरिक्त ५१०० मंत्रो का सफेद पुष्पों से दशांश हबन करना है । आसन पर भी शेवत बस्त्र धारण करके बैठें । साधना के दौरान ब्रह्माचर्य का पालन करें, तभी सिद्धि प्राप्त होगी । यदि साधना में पूर्ण सफलता न भी मिले तो आंशिक सफलता अबश्य मिलेगी, यह निशिचत है, इसका आभास साधक को स्वत: हो जाता है ।
 
चंन्द्रकला अप्सरा मंत्र : क्लीं चन्द्रकला क्लीं अप्सराय सिद्धि हुं फट् स्वाहा।।
 
प्रतिदिन मंत्र जाप के पशचात ध्यान अबश्य करें, जिससे साधना दृढ हो जाती है । इस साधना से मातृपख्य प्रबल होता है, यह एक सौम्य साधना है ।

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जय माँ कामाख्या

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