भूतभविष्य काल श्रवण साधना क्या है?
भूतभविष्य काल श्रवण साधना क्या है?
April 17, 2024
स्वर्णदेहा कर्ण पिशाचिनी साधना
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पिशाच सिद्धि साधना
यह भी भूत की तरह ही एक योनि होती है । पर अत्यंत बलिष्ठ, अत्यंत मजबूत और द्र्ढ निच्छय युक्त । अगर साधक इसे सिद्ध करले और इसे आज्ञा दे दे तो सामने चाहे पचास शत्रु , बंदूक या पिस्तोल लाठी या भाले लिय हुए खड़े हो तो उसे पाच मिनट मे ही भगा देता है । इसका क्षमता बहोत भयंकर होता है । यह साधक को 24 घंटे अदृश्य रूप मे मित्र के तरहा रहेता है और बुलाने पर हर आज्ञा का पालन करता ही है ।
पिशाच सिद्धि साधना विधि-
कृष्ण पक्ष के शुक्रवार को साधक दक्षिण को मुख करके गुरु जी से आज्ञा लेकर नग्न अवस्था मे साधना मे बैठे । आसन काले रंग का हो और सामने स्टील या तांबे के प्लेट मे सिंदूर मे चमेली का तेल मिलाकर पुरुष आकृति बनाये, पुरुष आकृति मे हृदय का पूजन करे । इस साधना मे रुद्राक्ष या काले हकीक का माला आवश्यक है । गुरुमंत्र के जाप होने के बाद साधक पिशाच मंत्र का 21 माला जाप करे । येसा 3 शुक्रवार तक रात्रि मे 10 बजे के बाद साधना करने से पिशाच साधक के सामने प्रत्यक्ष होता है और वचन मांगता है । पिशाच सिद्धि सिर्फ 3-4 शुक्रवार करने से पिशाच सिद्ध होकर हमारा मनचाहा कार्य सम्पन्न करता है ।
पिशाच सिद्धि साधना मंत्र : –॥ ऐं क्रीं क्रीं ख्रिं ख्रिं खिचि खिचि पिशाच ख्रिं ख्रिं फट ॥

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जय माँ कामाख्या

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