पुष्प किन्नरी साधना क्या है?

पुष्प किन्नरी साधना क्या है?

पुष्प किन्नरी : इस साधना का सबसे बिशिष्ट तथ्य यह है कि यह शीघ्र फलदायी है । सिद्धि प्रदान करने बाली यह साधना सरल है । किन्नरी साधक को सभी सुख प्रदान करती है एबं आज्ञा का पालन करती है । यह साधना धन प्राप्ति के नए स्तोत्र बनाती है, जिससे साधक आजीबन ऐश्वर्य भोगता है । यह समय समय पर साधक को उचित मार्गदर्शन देती है । साधक को बिपति के समय यह किन्नरी पूर्ण सहयोग करती है । यह सुहृदय एबं सौम्य किन्नरी है । यदि साधक कला के खेत्र से सम्बन्धित हो ,तो यह साधक को दख्य बना देती है । यह किन्नरी चिर यौबन से परिपूर्ण है, अत: इसकी साधना करने बाला साधक भी सदैब यौबन से पूर्ण रहता है । यह कभी भी साधक से बिश्वासघात नहीं करती । इसकी साधना का बिधान भी अत्यंन्त सरल है ।
 
सामग्री : गुलाबी रंग के धारण करने योग्य बस्त्र, गुलाबी आसन, सुगन्धित पान, पुष्प किन्नरी माला, शुद्ध घी की अगरबती, केसर, अष्टगन्ध, अख्यत, आम की लकडी की चौकी ।
 
किसी भी शुक्ल पख्य के शुक्रबार को रात्रि १० बजे के पश्चात् यह साधना आरम्भ करें । लकडी की चौकी पर गुलाबी रंग का नया बस्त्र बिछा दें । बस्त्र पर हल्दी से रंग अखतों से अष्टदल कमल का निर्माण करें । उसके मध्य में पुष्प किन्नरी यंत्र स्थापित करें । अब अष्टगन्ध, अख्यतादि से यंत्र का पूजन करें । घी का दीप जलाकर, दीपक से प्रार्थना करें कि “आप पूजा कर्म के साखि हैं, आप देबी रूप है, आप दुखनाशक है ,अत: जब तक में साधनारत हुं, आप स्थिर रहने की कृपा करें ।”
पुष्प किन्नरी मंत्र : ॐ पुष्पकिन्नरी बशमानय श्री ॐ।।
उक्त मंत्र की कम से कम २१ माला जप करे । जप के अन्त में किन्नरी के अपस्थित होने पर पहले से रखे पान में से आधा उन्हें खिलायें, आधा स्वयं खा लें । किन्नरी से बचन लें कि बह आपके आदेश का पालन करेगी और जब भी आप आबाहन करेंगे, बह प्रकट होगी । स्म्भबत: बह कोई छोटासा मंत्र भी साधक के कान में बता देगी ।
 
साधना के अगले दिन सारे सामग्री को बहती नदी में प्रबाहित करें । इस साधना से प्राप्त बरदान ब लाभ का कभी भी दुरूपयोग न करें ।

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जय माँ कामाख्या

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