सिद्धि के लिए बीर का मंत्र :

सिद्धि के लिए बीर का मंत्र :

कागद कोरो कोरे पे हाथ बीर बताये, तन की बात,
कौन कौन की बताये, भूत की पलीत की,
अखने की मखने की रोग की भोग की, मूढ की
दीढ की चौकी की मौकी की, मसान की मन्तर
की, एक एक की मन की बात, कोरे कागज पर
लिखकर न बताये तो बीर न कहाये
बजंरग का घोटा खाय आखिर में चमार की
नांद में जाय। माता हिंगलाज राखे मेरी लाज।।

बीर का मंत्र बिधि : इस मंत्र की सिद्धि हेतु साधक नबरात्र में किसी एकान्त स्थान में जाकर एक चौकी बनाकर उसमें आटे की चौकोर लाईन डालकर चौक पूर लें । चौक के बीच स्वास्तिक की आकृति बनाकर उस चौक पर कपूर की बत्ती जलायें, पान की बीडा चढाकर बीर की पूजा करें । मंगलबार के दिन टेडे पर सिन्दूर लगा, चार सौ चालीस बार इस बीर का मंत्र का जप कर लें । जप के बाद किसी बिप्र को भोजन पर आमंत्रित करें और सिन्दूर लगे टेडे को बीर के रूप में मान कर ले आएं तथा पांच माला नित्य क्रम से जपते रहें यह जप एक मास तक करें ऐसा करने से बीर प्रसन्न हो जाता है ।

बीर सिद्ध हो जाने की पहचान है कि मां दुर्गा के नाम से उक्त बीर का मंत्र सात बार जपें और धूप जलाकर उस पर सात बार कोरे कागज को घुमा कर अभीष्ट ब्यक्ति का नाम, काम एबं अन्य प्रश्न कहकर कहें कि इसका उत्तर तत्काल दें । जब इसका उत्तर कोरे कागज पर लिखा हुआ आ जाय तो समझो साधना (प्रयोग) सफल समझें । उत्तर ना आने पर दोबारा प्रयोग करें ।

बिशेष : बीर एबं बैताल दो सूक्ष्म अस्तित्व होते हैं, किन्तु ये बल और क्ष्मता में बहुत अधिक होते हैं साथ ही यह न्याय प्रिय होते हैं । अन्यायपूर्ब कर्म नहीं करते ।

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