बीर बिरहना सिद्धि कैसे प्राप्त करें ?

बीर बिरहना की सिद्धि :

बीर बिरहना सिद्धि कर लिये जाने पर बह साधक की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करता है और सदेब उसके समीप रहकर उसकी रक्षा करते हुए हर प्रकार के सुख को देता रहता है ।

इस बीर बिरहना सिद्धि मंत्र को ग्रहण की रात्रि में 108 बार मंत्र का जप किया जाता है ,चमेली के फूल चढ़ाए जाएं तथा नैबेद्य रूप में सबासेर आटे का शुद्ध घी से बना हलुआ चढ़ाया जाए । इस प्रकार चालीस दिन के जप के बाद यह नैबेद्य अर्पित किया जाता है ।

४१ बें दिन में पूजा और सबासेर हलुए का भोग लेकर बैठें तो बीर साधक के सामने प्रकट हो जाता है । उस समय साधक बीर बीरहना को हाथ जोड़कर प्रणाम करे तो बीर प्रसन्न होकर मनोकामना पूरी करता है । इसकी साधना में निडर बना रहना चाहिए । श्रद्धा और बिश्वास तो हर साधना का आबश्यक अंग है ही ।

बीर बिरहना सिद्धि मंत्र :

“बीर बिरहना फूल बिरहना धुं धुं करै सबा सेर का तोसा खाय अस्सी कोस का धाबा करे सात के कुतक आगे चले सात सै कुतक आगे चले सात सै कुतक पीछे चले जिसमें गढ़ गजना का पीर चले और ध्वजा टेकता चले सोते को जगाबता चले, बैठे को उठाबता चले, हाथों में हथकड़ी गेरे, पैरों में बेडी गेरे, मांही पाठ करे मुरदार मांही पीठ करे कलाबोन नबी कूं याद करे ॐ ॐ ॐ नम: ठू: ठ: ठ: स्वाहा ।”

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चेताबनी : भारतीय संस्कृति में मंत्र तंत्र यन्त्र साधना का बिशेष महत्व है ।परन्तु यदि किसी साधक यंहा दी गयी बीर बिरहना सिद्धि साधना के प्रयोग में बिधिबत, बस्तुगत अशुद्धता अथबा त्रुटी के कारण किसी भी प्रकार की कलेश्जनक हानि होती है, अथबा कोई अनिष्ट होता है, तो इसका उत्तरदायित्व स्वयं उसी का होगा ।उसके लिए उत्तरदायी हम नहीं होंगे ।अत: कोई भी प्रयोग योग्य ब्यक्ति या जानकरी बिद्वान से ही करे। यंहा सिर्फ जानकारी के लिए दिया गया है ।

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