भुत प्रेत भुतिनी साधना :

भुत प्रेत भुतिनी साधना :
भुत प्रेत दुनिया मेँ एक आसान सिद्धि है।आत्मा आवाहन को ले कितना आसान है,ईसमेँ कोई मंत्र कि जोरुरत नही सिर्फ एक ए से जेड तक और विच मेँ या उपर या निचे ईयस और नै लिखा हुआ पाल्ये वोड चाहिय,फिर एक दो प्रय्स ईतने मेँ ए सिद्धि जिवन भार के लिय मिल जाति है। एक वार सिद्धि के वाद जाव भी किसि आत्मा को वुलाओँ तुरुन्त आ जाति है।
भुत साधना मेँ भी य नियम लागु होता है। एक प्रय्स मेँ आगर आसफलता मेले तो दुवारा प्रय्स कारो साधना मेँ सफलता मिलेगी ।भुत प्रेत साधना एक कोठर दिल वेक्ति हि करना चाहिय, कमजोर दिल वालो के लिय ईस तरहा या किसि भी साधना करना वार्जित है।
यह साधना मंगल या शनिवार से आरंभ कर किया जाता है।साधना एक दिन का है पर एक दिन मेँ किसि किसि को सिद्धि निहि मिलती वह प्रतिदिन साधना करे जाव तक सिद्धि ना मिले।
ईसमे एक रुद्राक्ष माला चाहिय। एक गुलाव का ईत्र , लोवान और एक दो गुलाव फुल साधना के दिन 10 वाजे से पेहेले शामशान जाय और गुलाव के ईत्र आपने कापडे और आस पास के एक दो कावर पर गुलाव फुल रखकर छिडकाप करे फिर लोवान जाला ले। आसान लागाय और आरम से वैठ जाय।मंत्र जाप करते समय जादा हिलना डोलना ना करे। मंत्र जाप तव तक करे जाव तक सिद्धि ना मिले।
मंत्र- “ॐ नमो हाथ फावडी काँधे कामरी भैरु विर मसाणी खडा हल की धनुही वज्र की बाढ भुत प्रेत भुतिनी को मेरा वश्य करे ना करे तो माता कालका की आन ईशवर गौरा पार्वती महादेव की दुहाई। ”
भुत प्रेत भुतिनी मेँ से जो प्रकट हो कर कुछ माँगने के लिय काहे तो कुछ भी वारदान माँग लोलो।
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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार : मो. 9438741641 {Call / Whatsapp}
जय माँ कामाख्या

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