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मृदुला अप्सरा साधना :
मृदुला अप्सरा साधना कैसे करें ?
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रत्नमाला अप्सरा

रत्नमाला अप्सरा साधना :

रत्नमाला अप्सरा : इनके नाम से ही स्पष्ट है यह रत्नमाला अप्सरा साधक को सिद्धि के साथ साथ रत्न, आभूषण और भौतिक सम्पदा भी प्रदान करती है । सिद्ध हो जाने के पश्चात् यह साधक को इछा अनुसार धन द्रब्य उपलब्ध कराती है । यह अत्यन्त सुन्दरी है, जो साधक को आजीबन प्रेम से परिपूर्ण कर देती है ।
 
इस रत्नमाला अप्सरा को सिद्ध करने की बिधि अत्यंत सरल है । स्त्री या पुरूष दोनों ही यह साधना कर सकते हैं । यह रत्नमाला अप्सरा धन के साथ ही यौबन ब सौन्दर्य भी प्रदान करती है अत: स्त्रियों के लिये यह बिशेष फलदायी है ।
 
इस एक दिबसीय साधना में यदि रत्नमाला प्रत्यख्य न भी हो तो भी साधना के लाभ का अनुभब साधक को अबश्य होगा । यह साधना सोमबार या शुक्रबार की रात्रि को सम्पन्न की जाती है । रात्रि १० बजे के पशचात् इसे आरम्भ करें ।
सामग्री :- रत्नमुक्ता , मणिमाला ब अन्य सामान्य सामग्री।
 
बिधि : इसमें स्वछ ब शुध आसन पर सुन्दर बस्त्र धारण करके बैठ जायें । साधना स्थल या कख्य को सुन्दरता से सजा दें । इत्र का सभी तरफ छिडकाब करें । पूर्ब दिशा की और मुख करे । गणेश पूजन ब ईष्ट पूजन करें। पात्र में रत्नमुक्ता रखें ब उसका पंचोपचार पूजन करें । संकल्प लें । फिर इस रत्नमाला अप्सरा मंत्र का जाप आरम्भ करें –
ॐ श्रीं ह्रीं रत्नमाला ह्रीं श्रीं ॐ।।
 
इस रत्नमाला अप्सरा मंत्र का ५१ माला जप निरन्तर करें । जप पूर्ण होने पर बहीं बिश्राम करें । पूजा सामग्री को नदी में बिसर्जित करें । यदि एक दिबस में अनुभब प्राप्त न हो तो ११ दिबस इसी प्रकार साधना करें, रत्नमाला प्रत्यख्य होकर दर्शन देंगी, तब उनसे बचल ले लें ।

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जय माँ कामाख्या

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