सर्ब कार्य-सिद्धि हेतु शाबर मंत्र :

सर्ब कार्य-सिद्धि हेतु शाबर मंत्र :
 
मंत्र : काला भैरब ,काला बान !हाथ खपर लिए,फिरे मसान !मद्द मछ्ली का भोजन करे !सांचा भैरब हाँकता चले !काली का लाड्ला !भूतो का बेपारी !डाक्नी-साकनी सौदागरी !झाड-झाटक-पटक-पछाड !सर खुला मुख बला, नहि तो माता कालका का दुध हराम ! शब्द सांचा,पिण्ड कांचा !चलो भैरब , ईश्वरो बाचा !”
 
बिधान : साधक की मनोबांछित कार्य-सिद्धि के लिए यह बहुत ही उतम एवं बिशिष्ट प्रयोग है !
 
सर्बप्रथम एक अंगियारी (कण्डे या उपले से ) बनाए और उसमे अग्नि प्रज्वलित करे! उसके पास एक और दीपक रखे तथा दुसरी और गुगुल की धूप बनाए !अंगियारे के सामने मछ्ली के कवाब क भोग लगाए तथा मदिरा रखे !फिर उक्त मंत्र को 108 बार जपे !जप पुर्ण होने पर मछ्ली और मद्द को अंगियारि की अग्नि मे डाल दे ! मंत्र क जप 40 दिन करना है ! प्रतेक आठबे दिन मछ्ली के कबाब और मद्द का भोग लगाना है, नित्य नहि !इस प्रकार 40 दिन मे यह भोग 5 बार ही लगेगा ! चालीस दिन पुर्ण होने पर भि मंत्र जप निरन्तर करते रहे ! अनुष्ठान पुर्ण होने के बाद भी अपनी खुशी से कभी-कभी उक्त भोग (मछ्ली + मद्द) सामग्री अग्नि मे देते रहे !इस प्रक्रिया से साधक को अनेक प्रकार से सहायता प्राप्त होती रह्ती है !
 
 
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जय माँ कामाख्या

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