अश्व (वाहन) नाल तंत्र :
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January 15, 2021
4 दाने चावल से जुड़ी चमत्कारी उपाय :
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क्या आप जानते है गुंजा के गुप्त उपाय :
क्या आप जानते है गुंजा के गुप्त उपाय :
गुंजा या रत्ती लता जाति की एक वनस्पति है। शिम्बी के पक जाने पर लता शुष्क हो जाती है। गुंजा के फूल सेम की तरह होते हैं। शिम्बी का आकार बहुत छोटा होता है, परन्तु प्रत्येक में 4-5 गुंजा बीज निकलते हैं अर्थात सफेद में सफेद तथा रक्त में लाल बीज निकलते हैं। अशुद्ध फल का सेवन करने से विसूचिका की भांति ही उल्टी और दस्त हो जाते हैं। इसकी जड़े भ्रमवश मुलहठी के स्थान में भी प्रयुक्त होती है।
इसको चिरमिटी, धुंघची, रत्ती आदि नामों से जाना जाता है। इसे आप सुनारों की दुकानों पर देख सकते हैं। इसका वजन एक रत्ती होता है, जो सोना तोलने के काम आती है। यह तीन रंगों में मिलती है। सफेद गुंजा का प्रयोग तंत्र तथा उपचार में होता है, न मिलने पर लाल गुंजा भी प्रयोग में ली जा सकती है। परंतु काली गुंजा दुर्लभ होती है।
गुंजा का प्रयोग अनेक तांत्रिक कार्यों में होता है. यह एक लता का बीज होता है. जो लाल रंग का होता है. सफ़ेद और काले रंग की गुंजा भी मिल सकती है. काली गुंजा बहुत दुर्लभ होती है और वशीकरण के कार्यों में रामबाण की तरह काम करती है. गुंजा के बीजों के अलावा उसकी जड़ को बहुत उपयोगी मन गया है. गुंजा की महिमा कुछ इस प्रकार है –
सफेद गुंजा माला के लाभ :
मानसिक शांति के लिए सफ़ेद गुंजा की माला को धारण किया जाता है। चंद्रमा की कृपा दृष्टि होने के कारण यह चन्द्र देव के गुणों को प्राप्त कर मन को शीतल करती है। इसके अलावा इसका प्रयोग धन की प्राप्ति के लिए भी किया जाता है। धन आगमन के मार्ग प्रशस्त होते हैं और धन से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं। कर्ज से मुक्ति मिलती है। सफ़ेद गुंजा का प्रयोग आयुर्वेद में औषधी के रूप मंग किया जाता है।
लाल गुंजा माला के लाभ :
हर तरह की बाधाओं से बचने के लिए लाल गुंजा सबसे बेहतर और सरल उपाय है। इसे अपने पास रखने से व्यक्ति को किसी भी तरह की शारीरिक हानि नहीं होती है। इसके प्रभाव से भाग्य में वृद्धि होती है।
काली गुंजा माला के लाभ :
जीवन में परेशानियां तो चलती रहती हैं लेकिन कुछ विपत्तियां ऐसी होती हैं जिनसे जान का खतरा होता है। ऐसी विपत्ति से बचाने कार्य करती है काली गुंजा। आप चाहें तो इसे माला के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं। पति–पत्नी के बीच परस्पर संबंधो में प्रगाढ़ता लाने के लिए इस गुंजा का प्रयोग किया जाता है, इसके प्रयोग से पति–पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है।
लाल और सफेद गुंजा का मेल:
इन दानों में धन को आकर्षित करने की अपार शक्ति होती है। लाल और सफेद का मेल होना इसे और भी ज्यादा शक्तिशाली बनाता है।
अगर आप कर्ज से परेशान हैं तो आपको इसकी माला से मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस माला के दानों में धन को आकर्षित करने की चुंबकीय शक्ति होती है इसलिए अगर आप इस माला से मां लक्ष्मी का ध्यान करेंगें तो आपको शीघ्र ही धन का लाभ होगा। जीवन सुखमय होगा।
नौकरी नहीं मिल रही है और इस वजह पैसों की तंगी हो रही है तो आपको लाल और सफेद गुंजा माला का प्रयोग करने से लाभ होगा। धन देने वाली से माला आपकी नौकरी के मार्ग प्रशस्त करेगी।
वर–वधू के लिए : विवाह के समय लाल गुंजा वर के कंगन में पिरोकर पहनायी जाती है। यह तंत्र का एक प्रयोग है, जो वर की सुरक्षा, समृद्धि, नजर–दोष निवारण एवं सुखद दांपत्य जीवन के लिए है। गुंजा की माला आभूषण के रूप में पहनी जाती है। भगवान श्री कृष्ण भी गुंजामाला धारण करते थे। पुत्र की चाह वाली स्वस्थ स्त्री, शुभ नक्षत्र में गुंजा की जड़ को ताबीज में भरकर कमर में धारण करें। ऐसा करने से स्त्री पुत्र लाभ करती है।
विद्वेषण में प्रयोग : किसी दुष्ट, पर–पीड़क, गुण्डे तथा किसी का घर तोड़ने वाले के घर में लाल गुंजा – रवि या मंगलवार के दिन इस कामना के साथ फेंक दिये जाये – ‘हे गुंजा ! आप मेरे कार्य की सिद्धि के लिए इस घर–परिवार में कलह (विद्वेषण) उत्पन्न कर दो‘ तो आप देखेंगे कि ऐसा ही होने लगता है।
विष–निवारण : गुंजा की जड़ धो–सुखाकर रख ली जाये। यदि कोई व्यक्ति विष–प्रभाव से अचेत हो रहा हो तो उसे पानी में जड़ को घिसकर पिलायें। इसको पानी में घिस कर पिलाने से हर प्रकार का विष उतर जाता है।
सम्मान प्रदायक : शुद्ध जल (गंगा का, अन्य तीर्थों का जल या कुएं का) में गुंजा की जड़ को चंदन की भांति घिसें। अच्छा यही है कि किसी ब्राह्मण या कुंवारी कन्या के हाथों से घिसवा लें। यह लेप माथे पर चंदन की तरह लगायें। ऐसा व्यक्ति सभा–समारोह आदि जहां भी जायेगा, उसे वहां विशिष्ट सम्मान प्राप्त होगा।
पुत्रदाता : पुत्र की चाह वाली स्वस्थ स्त्री, शुभ नक्षत्र में गुंजा की जड़ को ताबीज में भरकर कमर में धारण करें। ऐसा करने से स्त्री पुत्र लाभ प्राप्त करती है।
शत्रु में भय उत्पन्न : गुंजा–मूल (जड़) को किसी स्त्री के मासिक स्राव में घिस कर आंखों में सुरमे की भांति लगाने से शत्रु उसकी आंखों को देखते ही भाग खड़े होते हैं।
अलौकिक तामसिक शक्तियों के दर्शन : भूत–प्रेतादि शक्तियों के दर्शन करने के लिए मजबूत हृदय वाले व्यक्ति, गुंजा मूल को रवि–पुष्य योग में या मंगलवार के दिन– शुद्ध शहद में घिस कर आंखों में अंजन (सुरमा/काजल) की भांति लगायें तो भूत, चुडैल, प्रेतादि के दर्शन होते हैं।
ज्ञान–बुद्धि वर्धक : गुंजा–मूल को बकरी के दूध में घिसकर हथेलियों पर लेप करे, रगड़े कुछ दिन तक यह प्रयोग करते रहने से व्यक्ति की बुद्धि, स्मरण–शक्ति तीव्र होती है, चिंतन, धारणा आदि शक्तियों में प्रखरता व तीव्रता आती है।
गुप्त धन दर्शन : अंकोल या अंकोहर के बीजों के तेल में गुंजा–मूल को घिस कर आंखों पर अंजन की तरह लगायें। यह प्रयोग रवि–पुष्य योग में, रवि या मंगलवार को ही करें। इसको आंजने से पृथ्वी में गड़ा खजाना तथा आस पास रखा धन दिखाई देता है।
शत्रु दमन प्रयोग : काले तिल के तेल में गुंजामूल को घिस कर, उस लेप को सारे शरीर में मल लें। ऐसा व्यक्ति शत्रुओं को बहुत भयानक तथा सबल दिखाई देगा। फलस्वरूप शत्रुदल चुपचाप भाग जायेगा।
कुष्ठ निवारण प्रयोग : गुंजा मूल को अलसी के तेल में घिसकर लगाने से कुष्ठ (कोढ़) के घाव ठीक हो जाते हैं।
अंधापन समाप्त : गुंजा–मूल को गंगाजल में घिसकर आंखों मे लगाने से आंसू बहुत आते हैं। देशी घी (गाय का) में घिस कर लगाते रहने से इन दोनों प्रयोगों से अंधत्व दूर हो जाता है।
१. आप जिस व्यक्ति का वशीकरण करना चाहते हों उसका चिंतन करते हुए मिटटी का दीपक लेकर अभिमंत्रित गुंजा के ५ दाने लेकर शहद में डुबोकर रख दें. इस प्रयोग से शत्रु भी वशीभूत हो जाते हैं. यह प्रयोग ग्रहण काल, होली, दीवाली, पूर्णिमा, अमावस्या की रात में यह प्रयोग में करने से बहुत फलदायक होता है.
 
२. गुंजा के दानों को अभिमंत्रित करके जिस व्यक्ति के पहने हुए कपड़े या रुमाल में बांधकर रख दिया जायेगा वह वशीभूत हो जायेगा. जब तक कपड़ा खोलकर गुंजा के दाने नहीं निकले जायेंगे वह व्यक्ति वशीकरण के प्रभाव में रहेगा.
 
३. जिस व्यक्ति को नजर बहुत लगती हो उसको गुंजा का ब्रासलेट कलाई पर बांधना चाहिए. किसी सभा में या भीड़ भाद वाली जगह पर जाते समय गुंजा का ब्रासलेट पहनने से दूसरे लोग प्रभावित होते हैं.
 
४. गुंजा की माला गले में धारण करने से सर्वजन वशीकरण का प्रभाव होता है.
काली गुंजा की विशेषता है कि जिस व्यक्ति के पास होती है, उस पर मुसीबत पड़ने पर इसका रंग स्वतः ही बदलने लगता है ।
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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार

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