जन्म से मृत्यु तक कुंडली के 12 भाव या घर :
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जन्मकुंडली में उच्च शिक्षा में बाधा और ज्योतिषीय परामर्श :
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प्रायः ऐसा देखने में आता है कि जन्मकुंडली में उच्च शिक्षा का योग होने के बावजूद जातक उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाता। प्रश्न उठता है की ऐसा क्यों होता है? ज्योतिष सिद्धान्तानुसार कुंडली में उच्च शिक्षा का योग है परन्तु उस योग पर अशुभ ग्रह का प्रभाव है तथा पढाई के समय ही यदि अशुभ ग्रह ( शनि, राहु, केतु इत्यादि ) की दशा प्रारम्भ हो गई हो तो वैसी स्थिति में व्यक्ति का मन पढाई में नहीं लगने लगता है और शिक्षा में रुकावट आ जाती है।
यदि आपके बच्चें का मन पढाई में नहीं लग रहा है तो ज्योतिष के आधार पर कारण और विश्लेषण के उपरान्त, सही समय पर सहायता लेने पर विद्यार्थी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं इसमें किंचित भी संदेह नहीं है। आज मैं प्रस्तुत लेख के माध्यम से यह बताने का प्रयास करने जा रहा हूँ की में शिक्षा में रुकावट किस ग्रहों के कारण होता है तथा उसका उपचार क्या है।
1. यदि चतुर्थ भाव का स्वामी छठे, आठवें या 12 वें भाव में हो या नीच राशिस्थ, अस्त अथवा शत्रु राशिस्थ हो व कारक ग्रह चंद्र पीड़ित हो तथा ज्ञान कारक वृहस्पति की दृष्टि या युति नहीं हो तो जातक का पढ़ाई में मन नहीं लगता है।
2. यदि पंचमेश और अष्टमेश की युति हो या दृष्टि हो तो पढाई में बाधा आती है।
3. यदि जन्म कुंडली में द्वितीय, चतुर्थ, पंचम तथा नवम भाव में अशुभ ग्रह स्थित हो या अशुभ ग्रहो की दृष्टि हो, तो विद्या प्राप्ति में बाधा आती हैं।
4. चतुर्थेश वा पंचमेश, बृहस्पति अथवा बुध 3, 6, 8 या 12 वें भाव में हो तथा अशुभ ग्रह से दृष्ट हो तो पढाई बीच में ही छूट जाता है।
5. यदि विद्या कारक ग्रह गुरु या बुध 3, 6, 8 या 12 वें भाव में स्थित हो, शत्रु घर में हो या शत्रु की दृष्टि हो तो शिक्षा प्राप्ति में बाधा आती है।
किस दशा में शिक्षा में रुकावट आती है :
1. प्रायः यह देखने में आया है की राहु, की महादशा या अन्तर्दशा चल रही हो तो पढ़ाई में रुकावट या छात्रों का पढ़ाई में मन नहीं लगने लगता है।
2. यदि षष्ठेश, अष्टमेश तथा द्वाददेश की दशा अन्तर्दशा चल रही हो तथा दशानाथ का सम्बन्ध दूसरे, चतुर्थ या पंचम भाव वा भावेश से बन रहा हो तो शिक्षा में रुकावट आती है।
3. अशुभ ग्रह शनि, केतु, मंगल इत्यादि की दशा अन्तर्दशा में छात्रों में नकारात्मक प्रवृत्ति बढ़ जाती है जिसके उनका पढ़ने में मन लगने लगता है परिणाम स्वरूप परीक्षा में फेल हो जातें है और पढाई छूट जाती है।
शिक्षा में बाधा दूर करने के उपाय :-
यदि आपकी कुंडली में उच्च शिक्षा का योग है, किंतु पढाई के उम्र में ही राहु की महादशा या अन्तर्दशा चल रही है तो राहु ग्रह का उपचार करना चाहिए।
• जातक को अभिमंत्रित गोमेद रत्न धारण करें।
• “राहु यन्त्र” शनिवार के दिन धारण करें।
• राहु का बीज मंत्र “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः” का प्रत्येक क्षण मानसिक जप करना चाहिए।
सामान्य उपचार :
• छात्रों को गणेश जी की आराधना करनी चाहिए। गणेश जी के बीज मंत्र ॐ गं गणपतये नमः का नियमित पाठ करें, दूर्वा चढ़ाएं तथा प्रातः काल “गणेश जी के द्वादश नाम” का पाठ करें ऐसा करने से बच्चो को पढाई में मन लगने लगेगा।
• सरस्वती मंत्र का नियमित पाठ करें।
• गुरुवार को धर्म स्थान में धार्मिक पुस्तक दान करें।
• बुधवार एवं गुरुवार को अपनी शिक्षा का लाभ किसी जरुर मंद बच्चे को दें।
वास्तु टिप्स :
• बच्चे को पढ़ते समय हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुख करके पढ़ना चाहिए।
• स्टडी टेबल पर ग्लोब रखना चाहिए।
• टेबल के सामने के दीवार पर माँ सरस्वती की प्रतिमा चिपकाना चाहिए।

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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार

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