श्मशान साधना प्रयोग एबं बंधन :
श्मशान साधना प्रयोग एबं बंधन :
January 14, 2022
श्मशान बाबरा भूत बीर साधना सिद्धि :
श्मशान बाबरा भूत बीर साधना सिद्धि :
January 15, 2022
गुप्त काला कलबा बीर साधना :
गुप्त काला कलबा बीर साधना :
 
ओम नमो आदेश गुरुजी को ओम गुरुजी। काला कलबा बीर,
काली का लाडला। माता काली के संगे बिराजे। बीर कलुआ
भरी मसाण में उपजे। आधी रात को जागे। जाग-जाग कलुबा
देऊ मद-मांस को भोज प्रकट होबे तो दूं में बली बोकरो। रात
अमाबस्या की करू पूजा इत्र लोहबान, मद की धार देऊं। हे
मसाण बाला काला कलुबा काली रात अब ना जागे तो काली
के चरणों की तुझे सौगन्ध ने थे ना आये और मेरो कारज न
करबे तो माई मसाणी की दुहाई। अघोर पंथ की आणे फरे। मैं
कहु बह ना करें तो जोगी मछन्दर की दुहाई। मेरो आदेश मुकरे
तो बारा अघोरियों की आण फिरे। कलुबा का कडा-माई काली
का संडा पहने अघोरी-खडा कलबा हाजरा हुजूर। औघड नाथ
तेरी शक्ति मेरी भक्ति। साधन कलुबा में चलाऊ काली
अमाबस्या को देके पूजा लेऊ बचन बान्ध दे दे। मुझो बचन
काली का छाली बाला बीर कलुबा काला। तु मैला में चले। जा
भेजो बा चले। ना चले तो काली को दूध हराम करें। बंगाल की
गांगली घोसण की घाणी में पिछे। लुणी चमारण की कुण्ड में
जाये। मेरे बचनों में ना रहे तो मछन्दर नाथ चेला गोरखनाथ
की आज्ञा फिरे। भूतभाबन भैरब की शांकली से बन्ध करें। मेरे
गुरुनाथ पंथीका शव्द शाचा पिण्ड कांचा काली नाथजी का
बचन जुग-जुग सांचा हुं फट् फट् स्वाहा।।
 
 
नोट :- साधकों इस मंत्र की बिधि उचित नहीं है इसकी साधना बिधि गुप्त रखी गई है जो प्राचीन ब गुप्त है। यह मंत्र आदिबासी भाषा में है। इसमें हिंदी, गुजराती, बंगाली जैसी कई भाषा का समाबेश है। यह प्रयोग श्मशान शाक्त और शैब मत के साधकों के लिये उपयोगी माना जाता हैं। यह उग्र एबं कु प्रयोग है। तामसिक प्रयोगों के लिये इस बीर को सिद्ध किया जाता है। बीर सिद्ध होने पर साधक की आज्ञा के अनुसार आता है, जाता है एबं कार्य करता है। घर परिबार बालों के लिये बिनाशकारी है।
 
 
 

ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार

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जय माँ कामाख्या

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