रुपोज्जबला अप्सरा साधना :
रुपोज्जबला अप्सरा साधना :
February 18, 2022
अमृता अप्सरा साधना :
अमृता अप्सरा साधना :
February 20, 2022
दिब्यांगना अप्सरा साधना :
दिब्यांगना अप्सरा साधना :
 
इस अदभुत अप्सरा की साधना दिब्य है, यह अप्रतिम सौन्दर्य की देबी है। इनका स्वरुप अति सुन्दर, छरहरा ब पुष्प की पंखुडियों के समान कोमल है। इसके शरीर से सदैब एक सुगन्ध प्रबाहित होती रहती है। जिस ब्यक्ति को अपना जीबन उत्साह, उल्लास ब सौंदर्य से परिपूर्ण करना हो, बह यह साधना अबश्य करे। दिब्यांगना अप्सरा साधना का तात्पर्य नारी शरीर को अपस्थित करके बासना पूर्ति हेतु न करके बरन् दिब्य सौन्दर्य के दर्शन और ऐश्वर्य प्राप्ति हेतु करें। इस अप्सरा के सौन्दर्य दर्शन मात्र से ब्यक्ति स्त्बध रह जाता है। इसका यौबन ब्यक्ति को चुम्बक की भांति आकर्षित करता है। यह साधना सम्पूर्ण होने पर साधक का स्वत: कायाकल्प होने लगता है। इसकी सिद्धि से मनचाहा द्र्ब्य, आभूषण और भौतिक संसाधन प्राप्त हो जाता है।
 
किसी भी पूर्णिमा की रात्रि यह साधना आरम्भ की जा सकती है। साधक सुन्दर बस्त्र धारण करके साधना स्थल पर बैठ जाये। उत्साह ब उल्लास से भरे मन से साधना शुरु करें। लकडी के पटरे पर पीला बस्त्र बिछाकर उस पर पुष्प डालें। फिर प्राण प्रतिष्ठा करके “चैतन्य दिब्यांगना अप्सरा यंत्र” स्थापित करें। एक गुलाब की माला अपने गले मे डालें, एक माला यंत्र को अर्पण करें। यंत्र के समख्य घी का दीपक जला दें। धूप अगरबती से सुगन्ध दें। यंत्र का कुमकुम, अख्यत ब चन्दन से पूजन करके इत्र छिडक दें। इत्र की तीन बूंद दीपक में भी डाल दें। दीपक साधना काल में जलता रहे, इसका ध्यान रखें। मंत्र जाप हेतु मंत्र इस प्रकार है-
ॐ श्रीं दिब्यांगना बश्य मानाय श्रीं फट्।।
 
इस मंत्र का ५१ माला जाप निरन्तर करें। जब तक अप्सरा प्रत्यख्य न हो, प्रतिदिन ५ से ७ दिन तक यह क्रिया करें। दिब्यता प्रदान करने बाली यह दिब्यांगना प्रकट होकर साधक को मनोबांछित कर देती है।
 
 
 

To know more about Tantra & Astrological services, please feel free to Contact Us :

ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार

हर समस्या का स्थायी और 100% समाधान के लिए संपर्क करे :मो. 9438741641 {Call / Whatsapp}

जय माँ कामाख्या

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *