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बास्तु पति साधना :

नाना प्रकार की बिद्एं इस लोक में प्रकट हुई। ये बिद्याधरों से ही प्रकट हुई। इनकी उपासना से भी नाना प्रकार के सद्गुण, बिद्याएं, धर्म में रूचि, प्रभुभक्ति और बल तथा सुमति की प्राप्ति होती है।

परिचय : बिद्याधरों का लोक गंधर्बलोक से कुछ ऊपर है ,इसीलिए ये जरा देर से आ पाते हैं। यद्द्पि कि इनकी आराधना का सामान्यक्रम भी यक्षो ,गंधर्बो जैसा ही है। शेष अनुष्ठान में बिद्याधर पूजा और जप ही भिन्न है परंतु इनकी उपासना प्राय: शिब मन्दिर में होती है और इनके स्वामी बिद्यापति भगबान शिब स्वयं हैं। ४४ हजार करोड बिद्याधर बिद्यालोक में बसते हैं, ऐसा कहा गया है।

कतिपय बिद्याधर में बास्तु पति बिद्याधर भी हैं। इनके अलाबा भी अन्य अनेकों बिद्यापति या बिद्याधर हैं जिनकी साधनाएं इस देश में प्रचलित रही हैं परंतु अब लुप्तप्राय: हैं। शायद यही कारण है की देश इतना भटकाब और त्राहिमाम् के दौर में है। काश एक बार पुन: हमारा देश उसी गति में आ जाए तो क्या न हो जाए।

बास्तु पति मंत्र : ॐ बास्तुपति बिद्यापति हुं हुं ।।

अनुष्ठान : पूर्णमासी से आरम्भ करें पूर्बोक्त बिधान के बाद नित्य रात्रि में ११ माला जप करें। ४५ दिन तक पूजादि पूर्बबत् करें। ४५ बें दिन स्वयं सिद्धि का पता साधक को चल जाएगा। इसके बाद भी नित्य पूजन जप एक्माला करते रहने से बास्तु रहस्य का ज्ञान होता है।

प्रभाब : पूजन जप एकमाला करते रहने से बास्तु रहस्य का ज्ञान होता है। धन कमाने पर ज्ञान जाता रहता है।

 

नोट : यदि आप की कोई समस्या है,आप समाधान चाहते हैं तो आप आचार्य प्रदीप कुमार से शीघ्र ही फोन नं : 9438741641{Call / Whatsapp} पर सम्पर्क करें।

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