गरुड़ :
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November 18, 2022
Accident, Hurt and Wound :
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November 20, 2022
अलौकिक हरसिंगार :

अलौकिक हरसिंगार :

हरसिंगार एक दिव्य धनदायक बनस्पति की श्रेणी में आती है ।इसे हडजोड भी कहते हैं ।ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रयोग मैंने देखा है कि अगर किसी ब्यक्ति या पशु का किसी भी अंग का हिस्सा अचानक टूट जाता है तो हरसिंगार की टहनी को कुचलकर उस टूटी हुई जगह पर लगाकर ऊपर से कपड़ा लपेट कर बाँधने से कुछ ही दिनों में टूटी हुई हड्डी आपस में जुड़कर ठीक हो जाती है। यह मेरा प्रामाणिक अनुभब है ।पर आज तो हमारे पास असाध्य बिमारी से लेकर साधारण बीमारी से बचने के लिए कई उपचार पद्धतियाँ हो गई हैं। यदि इसे सही ढंग से शोधकर काम में लिया जाए तो यह बनस्पति बास्तबिकता में मानब कल्याण के लिए कारगर सिद्ध हो सकती है। यह बनस्पति प्राय: सभी स्थानों में तो मिल नही सकती क्योंकी आज हमारे बनों के बिनाश के साथ जड़ी बूटियों का भी लुप्त होना भी सम्भब हो गया है ।इस बनस्पति पर मैंने कुछ बिभिन्न समस्याओं के निराकरण पर शोध किया । कई ओझा , मुनि या योगियों से सम्पर्क किया और उनसे ज्ञान प्राप्त किया मैंने इस बनस्पति का अच्छा प्रमाण प्राप्त किया ।अत: इसे प्राप्त करे और अपनी समस्या हल कर लें ।

१. आकस्मिक धनप्राप्ति के लिए : हरसिंगार की जड़, श्वेत गूंजा के ग्यारह दाने, इन्हें पीले रंग के कपडे में या फिर चांदी के ताबीज में डालकर जो ब्यक्ति धारण कर लेगा उस ब्यक्ति को आकस्मिक धनप्राप्ति के साधन उपलब्ध होते रहेंगे ।यह प्रयोग समाज हित के लिए अच्छा साबित हुआ है (जुआ, लाटरी आदि के लिए भी यह सही साबित हुआ है पर ध्यान दें कि जुआ, लाटरी का खेल सामाजिक बुराई है, इससे बचें ) ।

२. पति – पत्नी में मनमुटाब न होने के लिए : इसके लिए कामदेब मंत्र से किसी शुक्ल पक्ष शुक्रबार की दिन हरसिंगार की टहनी को अभिमंत्रित करके पति – पत्नी चाँदी के ताबीज में धारण कर ले तो नि:सन्देह उपरोक्त समस्या से निबारण पा सकते हैं ।पति – पत्नी में आपसी प्रेम तो बढेगा साथ ही निरंतर चलने बाली गृह कलह भी समाप्त होगी ।ध्यान रहे ताबीज चाँदी में ही धारण करें ।

३. समृद्धि के लिए : हरसिंगार का बांदा यदि किसी भाग्यबान ब्यक्ति को मिल जाए तो इसे रोहिणी नक्षत्र को अबश्य धूप दीप से पूजित करके लायें फिर इसे श्वेत गुंजा के १११ दानों के साथ चाँदी के डीब्बे में डालकर ऊपर से शुद्ध शहद भी डालें और फिर इसे अपने ब्यापारिक स्थल या फिर घर पर सुरक्षित रखकर रोजाना धूप दीप से पूजित करते रहें ।सच मानो यह बांदा ब्यक्ति को समृद्ध बना सकता है ।बांदा आश्चर्यजनक धनदायक है ।

४. पुत्र –पुत्री के बिबाह में हो रहे बिलम्ब के लिए : यदि किसी के पुत्र या पुत्री के बिबाह में बिलम्ब हो रहा हो तो यह प्रयोग करें ।बैसे तो आज यह समस्या अत्यधिक जटिल हो गई है ।इस समस्या के समाधान के लिए कई तरह के प्रयोग ज्योतिष और तंत्र में हैं जो की सामान्य ब्यक्ति की पहुँच से बाहर हैं ।कई पीड़ित ब्यक्ति ज्योतिषी और तांत्रिकों के चक्कर में अपना धन बर्बाद करते देखे जा रहे हैं ।अत: ठग और ढोंगी, धनलोलुप तांत्रिकों और ज्योतिषियों बे बचकर रहें ।यह तो आपके लिए कुच्छ नहीं कर पाएँगे उल्टा आपका सब कुछ ले जाएँगे ।

हम जानते हैं की आज तंत्र और ज्योतिष बहुत बदनाम हो रहा है ।अत: यह प्रयोग समाज के हित के लिए शुद्ध ब सरल है ,करके देखें, आपकी समस्या हल होगी ।केबल हरसिंगार की जड़ या फिर फूल पूर्णिमा की रात्री में इक्कीस बार उतार कर तुलसी की पौधे के निचे दबाएँ ।यह प्रयोग अन्धबिश्वास नहीं है हमने इस प्रयोग को सिद्ध पाया है अत: आप भी करें और लाभ उठाएँ।

५. भुत –प्रेतों के उपद्रब होने पर : यदि किसी परिबार में भुत प्रेतों का आतंक मचा हो तो ऐसा करें । पहले ज़रा भुत –प्रेतों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं क्योंकी यह समस्या आज एक गंभीर समस्या बन गई है की भूत – प्रेत होता भी है या नहीं ।भुत कैसा होता है ? क्या पहचान है ? क्या यह सब अन्धबिश्वास है ? केबल संक्षेप में यदि इस संबद्ध में लिखना चाहूँ तो एक बिशाल ग्रन्थ तैयार होगा ।कहा जाता है जब मनुष्य अपने नश्वर शरीर को त्याग देता है तो बह भूत का रूप धारण कर लेता है ।कहते हैं कि भूतो का डेरा सुने मकान, सुनी जगह, नदी के किनारे में होता है ।कहते तो सब हैं पर देखा किसी ने नहीं ।केबल कहने से कुछ नहीं होता है ।इसके संबद्ध में कई शोध भी हो रहे हैं जिसे नकारा तो जा नहीं सकता है ।कई उदाहरण भी सामने आते है ।

यह सब प्रमाणिकता सामने आते रहने पर भी आज समाज इसे केबल अन्धबिशास ही मान रहा है ।भूतों का अपना अलग लोक है , भूतों का साधना के बल पर प्रत्यक्षीकरण कर सकते है ।भूत एक छाया है, यदि यही माना जाए तो आप किसी शमशान में अर्द्ध रात्रि को जाएँ यदि आपके पास हिम्मत है तो श्मशान में जाने पर एक बिचित्र अहसास होता है, कोई चल रहा है, कोई आ रहा है ।अचानक कुछ भी आबाज आ रही है, ऐसा प्रतीत होता है ।अत: भूतों के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है ।मेरा उदेश्य है कि भूतों के उपद्रब से कैसे बचा जाए ।अत: इस समस्या के निराकरण के लिए भूत – प्रेत ग्रसित ब्यक्ति हो या मकान पर हरसिंगार को घोड़े की नाल के साथ ब्यक्ति को धारण कराएँ तो समस्या निबारण होगा ।यह सही, सत्य और सफल प्रयोग है ।

६. बशीकरण तिलक :हरसिंगार को छाया में सुखाकर शुद्ध गोरोचन में मिलाकर माथे पर तिलक करने से बशीकरण होता है ।इस तिलक को यक्षिणी साधना में प्रयोग लाया जाता है ।यक्षिणी साधना में रत प्रयोगकर्ता यदि इस भस्म को तिलक करके यह साधना करें तो आश्चर्यजनक परिणाम आता है ।

७. शत्रुओं पर बिजय प्राप्ति के लिए : शत्रु तो कई प्रकार के होते हैं इनसे कैसे बिजय प्राप्त की जाए तो इसका साधन तंत्र में है । कई तो जटिल हैं पर मेरा यह प्रयोग सरल के साथ दिव्यता लिए हुए भी है । यदि किसी को शत्रु से परेशानी हो तो हरसिंगार की टहनी के साथ नागदौन की जड़ शनिबार की रात्रि में शत्रु के घर में डाल दें ।सच माने यह प्रयोग सबल और सिद्ध है ।

८. मारण प्रयोग : हरसिंगार, कालीगुंजा को एक साथ पीसकर काले धतूरे की टहनी से कटहल के पते पर यंत्र का निर्माण करें इस यंत्र के बीच में शत्रु का नाम लिखें फिर इसे काले कपडे में लपेट कर नदी में बहा दें शत्रु का नाश सुनिशिचत तो है पर ऐसा प्रयोग जनहित में कदापि न करें न ही करबाएँ हम केबल जानकारी ही दे रहे है शत्रुमारक यंत्र प्रस्तुत नही किया जा रहा है ।

९. मनोकामना पूर्ण प्रयोग : हरसिंगार को कुचलकर रस निकाल लें फिर इस रस में अष्टगंध मिलाएँ और उल्लू के पंख या मोर के पंख की कलम से मनोकामना पूर्ण यंत्र को पलाश के पत्ते पर बनाएँ फिर इस यंत्र को धूप दीप से पूजकर काँच के फ्रेम में मढ्बा कर स्थापित करे।

नोट : यदि आप की कोई समस्या है,आप समाधान चाहते हैं तो आप आचार्य प्रदीप कुमार से शीघ्र ही फोन नं : 9438741641{Call / Whatsapp} पर सम्पर्क करें।

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