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अघोर बीर साधना

अघोर बीर साधना के मंत्र :

अघोर बीर मंत्र : ओम नमो आदेश या गुरो । मशाणिया बीर बसे मशाण अड भड मशाण जलें बीर मशोणिया माथे खडो खाये मांस-माटी मुर्दा को अग्निनीयों बीर भस्म करे । हरी काटे काष्ठ जले जैसे सुखी कुशा । यह शक्ति अग्नि या बीर की मशाणियां मानस खाबै, दोनो मिले काम तमाम करे । हर बक्त हाजिर खडे । दोनों रहे मशाणे । जब मुर्दामशाणे आबे झाट-झपट सभी दौडा । मारे हाँक बीर मशाण भगदड भागे सबन प्रेत,डाकन, शाकण, जीभ चाहे भैरु कुता लप लप करें । आदेश मांरे बाबरों बीर । सब बांटन भख करें । हाड मांस चटा-चट चाटे । भारी खाये भुकका करें । तब आयो जोगी योगी साधन मशाण लांगो कार काढी बश किन्ही बांधी लिया सबन को । मैला मंतर फूंका बीर-बीर बश किन्हा । मेरो मंत्र कामरु देश । कबनु देबी । मारी हलकारि । फूक बंधी हो बीर मसाण को अग्नि या कों न बान्धे तो लाला लबारी की ताप खायी । गागली घोसण की घाणी के तेल में पका ही । चमारिया ढेड की चाट में तेरो छोयो पडे । ये ताको देश्यु बल-बाकला, माथे चौडुं तेल में तेरो छोयो पडे । माथे चौडुं तेल घी की कुलेर । तेथे ना माने तो बाकरा की बीट उपरमद की धार चौडुं । अब तो बचनों मा आसी । नहीं तो माई काली की लात खाये । शिब को त्रिशुल खाये । नहीं तो धोबी की नाद चमार के कुण्ड में पड सी । शनि अमाबस्याकी सिमरु में झ्ट-पट आ बीर मशाण ले पुजा करहु मेरो काज शव्द ये काबरु बाली बिद्या को पाछो पडे तो शमशाण की बासिणी माई भैरबी की आणे फिरे । चलो मंतर ओम हुं फट स्वाहा ।
 
ये प्राचीन कामरु बिद्या का अघोर बीर मंत्र है तथा इस मंत्र से बीरों की सिद्धि प्राप्त की जाती है । यह चमत्कारी अघोर बीर मंत्र है और अत्यंत गोपनीय एबं दुर्लभ है जो आदि नाथ के समय की बिद्या है । इसको इसलिये दिया है कयोंकी असली बिद्या लोप हो रही है । अन्त मे सभि साधकों को पुन: कह रहा हुं, गुरु अबश्य धारण करे । बिना गुरु से कोई भी साधना ना करे ।

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जय माँ कामाख्या

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