तिल का अर्थ
शरीर पर तिल का अर्थ :
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कुण्डला हारिणी अप्सरा साधना :
कुण्डला हारिणी अप्सरा साधना के मंत्र :
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अनुम्लोचा अप्सरा साधना :

अनुम्लोचा अप्सरा : शास्त्रों के अनुसार देबराज इन्द्र के दरबार में अति प्रमुख ११ अप्सराओं में अनुम्लोचा का नाम भी सम्मिलित है । यह अनुम्लोचा अप्सरा साधना ७ दिबस की है, यह साधना किसी भी शुक्रबार को आरम्भ की जा सकती है । किसी भी पूर्णिमा या दीपाबली के शुभ मुहूर्त पर भी इसे शुरु किया जा सकता है ।
 
इसके लिए साधना कख्य अति स्वछ और एकान्त में होना चाहिए । कख्य में सुगन्धित पदार्थ रखें । साधना हेतु पीले बस्त्र धारण करें । बिना सिले हुए बस्त्र ही पहनें ।
 
चौकी पर पीला बस्त्र बिछा दें । चमेली का तेल, चमेली का इत्र, चमेली का फुल, गुलाब के फूल अन्य सामान्य सामग्री के साथ रख लें । अनुम्लोचा अप्सरा की छबि का सुन्दर चित्र स्वयं बनाकर समख्य स्थापित करें । पंचोपचार करके इस मंत्र से अप्सरा का आबाहन करें-
ॐ अनुम्लोचा आगछ पूर्णयौबन स्तुतये।।
 
यह मंत्र १०८ बार जप करें । सुरख्या कबच बनाकर सिद्ध आसन पर बैठे । इसके पश्चात् ११ माला प्रतिदिन इस मंत्र का जप करें—
अनुम्लोचा अप्सरा मंत्र : ॐ ह्रीं अनुम्लोचा सिद्धि ह्रीं फट्।।
 
सम्भबत: तीसरे दिन ही साधक को घुंघरू की ध्वनि या कोई बिशिष्ट सुगन्ध आने का अनुभब होगा, यह अनुम्लोचा के प्रसन्न होने का संकेत है । साधना निरन्तर करते रहें, ग्यारहबें दिन अप्सरा प्रसन्न होने पर दर्शन देगी, आप तब मनोबांछित बचन ले लें ।

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जय माँ कामाख्या

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