कामना सिद्धि हेतु शाबर मंत्र :

कामना सिद्धि हेतु शाबर मंत्र :
 
मंत्र : ॐ काली, कंकाली, महाकाली के पुत्र कंकाल-भैरव ! हुक्मे हाजिर रहे ।मेरा भेजा काल करै, मेरा भेजा रख्या करै। आन बांधू,बान बांधू। चलते फूल मे जाए, कोठे जी पडै। थर-थर कांपै,हल-हल हलै।गिरि-गिरि परै,उठ-उठ भगै,बक-बक बकै।मेरा भेजा सबा घडी, सबा पहर,सबा दिन,सबा मास, सबा बरस को बाबला न करै, तो माता काली की शैया पै पग धरै। बाचा चूकै, तो उमा सुखै ।बाचा छोड, कुबाचा करै, धोबी की नाद चमार के कूंड मे परै। मेरा भेजा बाबला न करै, तो रुद्र के नेत्र के आग की ज्वाला कठै ।सिर की लटा टुट भूमि मे गिरै,माता पार्बती के चीर पै चोट पडे। बिना हुकुम नही मारना हो काली के पुत्र कंकाल-भैरव!फुरो मंत्र, ईश्वरो बाच।सत्य नाम, आदेश गुरु को !
 
यदि साधक उच अब्स्था को प्राप्त हो तो इस प्रयोग के माध्यम से भैरव जी प्रकट भी हो सक्ते है। यदि ऐसा हो तो भयभीत न हो और उन्हे प्रणाम करके लाल कनेर के पुष्पो की माला पह्नाए और लड्डू अर्पित करे। ऐसा करने से भैरव जी प्रसन्न होकर बर मांगने के लिए कहेंगे। ऐसी स्थिति मे साधक को उंनसे उंनकी क्रूपा प्रदान करने की प्रार्थना करनी चाहिए। उंनकी क्रूपा से साधक की सभी इछाओ की पूर्ति होती है।यह स्मरण रख्ना चाहिए कि इंनकी क्रूपा होने पर किसी भि प्रकार का अन्हकार न करे और न ही अनुचित कार्य करे। ऐसा होने पर अपनी साधना खीण होती है और देबता भी अप्रसन्न होते है।
 
यदि भैरब जी के दर्शन न भी हो तो भि कार्य सिद्धि अबश्य ही होगी ।उंनकी प्रतिमा अथबा चित्र को माला पहनाकर लड्डू बन्ही रख दे ।साधक का अभिष्ट कार्य कुछ ही दिनो मे पुर्ण हो जायेगा ।
 
 
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जय माँ कामाख्या

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