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चंद्रज्योत्सना अप्सरा साधना कैसे करें ?

चंद्रज्योत्सना अप्सरा उच्चकोटि कि अप्सराओं कि श्रेणी में प्रथम स्थान है जो शिष्ट और मर्यादित मणि जाती है चंद्रज्योत्सना अप्सरा को सौंदर्य कि दृष्टि से अनुपमेय कही जा सकती है । शारीरिक सौंदर्य वाणी कि मधुरता नृत्य, संगीत, काव्य तथा हास्य और विनोद यौवन कि मस्ती, ताजगी, उल्लास और उमंग ही तो चंद्रज्योत्सना है । चंद्रज्योत्सना अप्सरा की साधना से वृद्ध व्यक्ति भी यौवनवान होकर सौभाग्यशाली बन जाता है ।
जिसकी साधना से योगी भी अपनी साधनाओं में पूर्णता प्राप्त करता है । अभीप्सित पौरुष एवं सौंदर्य प्राप्ति के लिए प्रतेक पुरुष एवं नारी को इस चंद्रज्योत्सना अप्सरा साधना में अवश्य रूचि लेनी चाहिए । सम्पूर्ण प्रकृति सौंदर्य को समेत कर यदि साकार रूप दिया तो उसका नाम चंद्रज्योत्सना अप्सरा होगा ।
सुन्दर मांसल शारीर, उन्नत एवं सुडौल वक्ष: स्थल, काले घने और लंबे बाल, सजीव एवं माधुर्य पूर्ण आँखों का जादू मन को मुग्ध कर देने वाली मुस्कान दिल को गुदगुदा देने वाला अंदाज यौवन भर से लदी हुई चंद्रज्योत्सना अप्सरा बड़े से बड़े योगियों के मन को भी विचिलित कर देती है । जिसकी देह यष्टि से प्रवाहित दिव्य गंध से आकर्षित देवता भी जिसके सानिध्य के लिए लालायित देखे जाते हैं ।
सुन्दरतम वर्स्त्रलान्कारों से सुसज्जित, चिरयौवन, जो प्रेमिका या प्रिय को रूप में साधक के समक्ष उपस्थित रहती है । साधक को सम्पूर्ण भौतिक सुख के साथ मानसिक उर्जा, शारीरिक बल एवं वासन्ती सौंदर्य से परिपूर्ण कर देती है ।
इस चंद्रज्योत्सना अप्सरा साधना के सिद्ध होने पर वह साधक के साथ छाया के तरह जीवन भर सुन्दर और सौम्य रूप में रहती है तथा उसके सभी मनोरथों को पूर्ण करने में सहायक होती है ।
चंद्रज्योत्सना अप्सरा साधना सिद्ध होने पर सामने वाला व्यक्ति स्वंय खिंचा चला आये यही तो चुम्बकीय व्यक्तिव है । चंद्रज्योत्सना अप्सरा साधना से साधक के शरीर के रोग, जर्जरता एवं वृद्धता समाप्त हो जाती है ।
यह जीवन कि सर्वश्रेष्ठ साधना है । जिसे देवताओं ने सिद्ध किया इसके साथ ही ऋषि मुनि, योगी संन्यासी आदि ने भी सिद्ध किया इस सौम्य चंद्रज्योत्सना अप्सरा साधना को ।
इस साधना से प्रेम और समर्पण के कला व्यक्ति में स्वतः प्रस्फुरित होती है । क्योंकि जीवन में यदि प्रेम नहीं होगा तो व्यक्ति तनावों में बिमारियों से ग्रस्त होकर समाप्त हो जायेगा । प्रेम को अभिव्यक्त करने का सौभाग्य और सशक्त माध्यम है चंद्रज्योत्सना साधना । जिन्होंने चंद्रज्योत्सना साधना नहीं कि है, उनके जीवन में प्रेम नहीं है, तन्मयता नहीं है, प्रस्फुल्लता भी नहीं है ।

चंद्रज्योत्सना अप्सरा साधना विधि :

सामग्री – प्राण प्रतिष्ठित चंद्रज्योत्सनात्कीलन यंत्र, चंद्रज्योत्सना माला, सौंदर्य गुटिका ।
यह रात्रिकालीन २७ दिन कि साधना है । इस साधना को किसी भी पूर्णिमा को, शुक्रवार को अथवा किसी भी विशेष दिन प्रारम्भ करें ।
साधना प्रारम्भ करने से पूर्व साधक को चाहिए कि स्नान आदि से निवृत होकर अपने सामने चौकी पर गुलाबी वस्त्र बिछा लें, पीला या सफ़ेद किसी भी आसान पर बैठे, आकर्षक और सुन्दर वस्त्र पहनें । पूर्व दिशा कि ओर मुख करके बैठें । घी का दीपक जला लें । सामने चौकी पर एक थाली रख लें, दोनों हाथों में गुलाब कि पंखुडियां लेकर आवाहन करें ।

चंद्रज्योत्सना अप्सरा आवाहन मन्त्र :- । । ओम ! चंद्रज्योत्सने अगच्छ पूर्ण यौवन संस्तुते । ।

यह आवश्यक है कि यह आवाहन कम से कम १०१ बार अवश्य हो प्रत्येक आवाहन मन्त्र के साथ एक गुलाब के पंखुड़ी थाली में रखें । इस प्रकार आवाहन से पूरी थाली पंखुड़ियों से भर दें ।
अब अप्सरा माला को पंखुड़ियों के ऊपर रख दें इसके बाद अपने बैठने के आसान पर ओर अपने ऊपर इत्र छिडके । चंद्रज्योत्सनात्कीलन यन्त्र को माला के ऊपर आसान पर स्थापित करें । गुटिका को यन्त्र के दाँयी ओर तथा यन्त्र के बांयी ओर स्थापित करें । सुगन्धित अगरबती एवं घी का दीपक साधनाकाल तक जलते रहना चाहिए ।
सबसे पहले गुरु पूजन ओर गुरु मन्त्र जप कर लें । फिर यंत्र तथा अन्य साधना सामग्री का पंचोपचार से पूजन सम्पन्न करें । स्नान, तिलक, धुप, दीपक एवं पुष्प चढावें ।
इसके बाद बाएं हाथ में गुलाबी रंग से रंग हुआ चावल रखें, ओर निम्न मन्त्रों को बोलकर यन्त्र पर चढावें ।
। । ॐ दिव्यायै नमः । ।
। । ॐ प्राणप्रियायै नमः । ।
। । ॐ वागीश्वये नमः । ।
। । ॐ ऊर्जस्वलायै नमः । ।
। । ॐ सौंदर्य प्रियायै नमः । ।
। । ॐ यौवनप्रियायै नमः । ।
। । ॐ ऐश्वर्यप्रदायै नमः । ।
। । ॐ सौभाग्यदायै नमः । ।
। । ॐ धनदायै चंद्रज्योत्सने नमः । ।
। । ॐआरोग्य प्रदायै नमः । ।
इसके बाद उपरोक्त चंद्रज्योत्सना माला से निम्न मंत्र का ११ माला प्रतिदिन जप करें ।

चंद्रज्योत्सना अप्सरा मंत्र : । । ॐ हृीं चंद्रज्योत्सने ! आगच्छ आज्ञां पालय मनोवांछितं देहि ऐं ॐ नमः । । {{ यह सुपरिक्षित साधना है । }}

प्रत्येक दिन अप्सरा आवाहन करें, ओर हर शुक्रवार को दो गुलाब कि माला रखें, एक माला स्वंय पहन लें, दूसरी माला को रखें, जब भी ऐसा आभास हो कि किसी का आगमन हो रहा है अथवा सुगन्ध एक दम बढने लगे अप्सरा का बिम्ब नेत्र बंद होने पर भी स्पष्ट होने लगे तो दूसरी माला सामने यन्त्र पर पहना दें ।
२७ दिन कि साधना प्रत्येक दिन नये-नये अनुभव होते हैं, चित्त में सौंदर्य भव भाव बढने लगता है, कई बार तो रूप में अभिवृद्धि स्पष्ट दिखाई देती है । स्त्रियों द्वारा इस साधना को सम्पन्न करने पर चेहरे पर झाइयाँ इत्यादि दूर होने लगती हैं ।
साधना पूर्णता के पश्चात मुद्रिका को अनामिका उंगली में पहन लें, शेष सभी सामग्री को जल में प्रवाहित कर दें । पूर्ण मनोयोग से साधना करने पर अवश्य मनोकामना पूर्ण होती ही है । निश्चय ही अगर साधना पूर्ण मनोभाव और समर्पण के साथ कि जाये तो साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते है । और जीवन को एक नविन दिशा मिलती ही है । तो अब देर कैसी आज ही संकल्प ले और साधना के लिए आगे बड़े ।
चेतावनी –
सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

सम्पर्क करे (मो.) 9438741641/ 9937207157 {Call / Whatsapp}

जय माँ कामाख्या

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