स्वर्ण रेखा यक्षिणी
स्वर्ण रेखा यक्षिणी साधना :
March 4, 2023
बिद्यादात्री यक्षिणी
बिद्यादात्री यक्षिणी साधना :
March 4, 2023

भोग यक्षिणी साधना :

भोग यक्षिणी साधना :यक्षिणीयाँ मनुष्येतर जाति की प्राणी हैं । ये यक्षजाति के पुरुषों की पत्नियाँ है । इन्हें देबी –देबताओं की उपजाति के रूप में भी माना जा सकता है ।

यक्षिणीयों की संख्या असंख्य है । इनमे बिबिध प्रकार की शक्तियां सन्निहित मानी जाती हैं । बिभिन्न कार्यों की सिद्धि एबं मनोभिलाषाओं की पूर्ति के लिए बिभिन्न यक्षिणीयों की साधना की जाती है । चूँकि, यक्ष जाति चिरजीबी मानी गई है, अत: यक्षिणीयाँ भी चिरजीबिनी होती है । बे सृष्टि के आदिकाल से अभी तक बिद्यमान है तथा भबिष्य में भी रहेंगी – ऐसी मान्यता है ।

तंत्र शास्त्रों के मतानुसार यक्षिणी जिस साधक पर प्रसन्न हो जाती है, उसे अभिलषित बर अथबा इच्छित बस्तु प्रदान करती है । अत: मानोभीलाषाओं की पूर्ति के लिए देबी देबताओं की भाँति यक्षिणीयों को सिद्ध करने की बिधि भी प्रचलित हुई है ।

भोग यक्षिणी साधना का मंत्र यह है – “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं नम: ।”

भोग यक्षिणी साधना बिधि :

उक्त मंत्र का 20000 की संख्या में जप करके नैबेद्द्य गरम दूध तथा खीर का भोजन से “भोग” यक्षिणी प्रसन्न होकर साधक को बिबिध प्रकार के भोग प्रदान करती है तथा भूत – प्रेत, पिशाच आदि उस साधक की सदैब सेबा करते रहते हैं ।

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दूसरों तथा स्वयं की सुख –शान्ति चाहने बालों के लिए ही यह दिया गया है । इसमें दिए गये यंत्र, मंत्र तथा तांत्रिक साधनों को पूर्ण श्रद्धा तथा बिश्वास के साथ प्रयोग करके आप अपार धन –सम्पति, पुत्र –पौत्रादि, स्वास्थ्य –सुख तथा नाना प्रकार के लाभ प्राप्त करके अपने जीबन को सुखी और मंगलमय बना सकते हैं ।
तंत्राचार्य प्रदीप कुमार – 9438741641 (Call /Whatsapp)

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