मूठ चलाने हेतु मंत्र :

मूठ चलाने हेतु मंत्र :
 
मंत्र : ओम कारो कलुआ कारी रात जा बैठ बैरी की खाट मारो बैरी करो बैरनी रांड, आगूं लकडी पाछूं, खाट ओदी तोदी लकडी बार धुआं देखकर घर आब हाथ में जी लै आब गुरु के पास, मेरी भगत गुरु की शक्त अब देखो बाबा अजैपाल पूजा लै ना जाय तो बहन भानजी की आन ।खटोला न मुकरै ।।
 
बिधान ‌- इस प्रकार के प्रयोग करते समय प्रयोगकर्ता को बहुत साबधान रहने की आबश्क्ता होती है। उसे अपना सुरख्याकर्म प्रयोग सुरु करने से पुर्ब ही कर लेना चाहिए क्योंकि यदि शत्रु इस क्रिया को जानने बाला होगा तो बह मूठ को बापिस लौटा सक्ता है। ऐसी स्थिति मे यदि सुरख्या नहीं की गई हो तो प्रयोगकर्ता को अपूर्णीय ख्यति हो सकती है।ऐसे प्रयोग मे अपने परिबार का सुरख्या चक्र पहले से ही मजबुत रख्ना चाहिये ।
 
इस साधना को सम्पन्न करने के लिये सर्बप्रथम साधक को झाडू की सींकों से एक छोटा-सा खटोला बनाकर,किसी कुंआरी कन्या के द्वरा काते गए कचे सूत से ख्टोले को बुनना चाहिए।
 
इसके बाद एक देशी मुर्गी का अण्डा लेकर उस पर एक पुतली बनाए तथा बेसन की एक मुर्ति बनाकर दोनों को उस बनाए गए खटोले पर रख देना चाहिए। इसके बाद उस खटोले को तथा अन्य कहि गई सामग्री को लेकर अर्धरत्रि मे श्मशान मे जाकर पूजा करके उक्त मंत्र का जप करें। साथ ले जायी गयी सामग्री भी अर्पित कर दें। जप करते-करते जब उक्त खटोला हिलने लगे तो शराब की धार देकर मुर्गे की बलि दें। बलि देते ही खटोला बायुमण्डल मे घूमता हुआ शत्रु के घर पर जाकर उसका मारण करेगा ।
 
बांछित सामग्री :- एक ध्वजा, सुपारी ,5 गांठ हल्दी की,सुजी,एक चुडी, एक काला चौकोर कपडा , सिंन्दुर, लौंग का एक जोडा, कोयले के टुक्डे, 15 नींबु, शराब की एक बोतल, एक साबुत पान तथा उडद साबुत ।
 
 
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जय माँ कामाख्या

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