Pitru Paksh Upay: Galat Shraddh Vidhi Se Pitru Shanti Kyon Nahi Milti

पितृ पक्ष में पितरों को श्रद्धा अर्पित करने का कर्म श्राद्ध कहलाता है। Pitru Paksh Upay का मूल उद्देश्य केवल कर्मकांड नहीं , बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कर्तव्य और उनकी सदगति के लिए सही भावना से किया गया प्रयास होता है । अनुभब में देखा गया है की जब श्राद्ध विधि सही नियम और शुद्ध भाव से की जाती है , तब पारिवारिक जीवन में अनावश्यक रुकावटें कम होती है।

यह वैदिक ज्योतिष व शास्त्रीय परंपराओं पर आधारित मार्गदर्शन है। अंतिम निर्णय और आस्था व्यक्तिगत विवेक पर निर्भर करती है।


श्राद्ध संस्कार का आध्यात्मिक अर्थ

श्राद्ध संस्कार जीवन का एक अबाध प्रवाह माना गया है। काया की समाप्ति के बाद भी जीव यात्रा समाप्त नहीं होती। मरणोत्तर संस्कार का उद्देश्य यह है कि आगे की यात्रा सही दिशा में चलती रहे।
जैसे वैज्ञानिक सूक्ष्म तरंगों के माध्यम से दूरस्थ उपकरणों का संचालन कर लेते हैं, वैसे ही श्रद्धा उससे भी अधिक सशक्त तरंगें प्रेषित कर सकती है। इन तरंगों के माध्यम से पितरों तक स्नेह, स्मरण और तुष्टि पहुँचती है। यही कारण है कि Pitru Paksh Upay को केवल परंपरा नहीं, बल्कि चेतना से जुड़ा कर्म माना गया है।


पितृ पक्ष के अचूक उपाय (विस्तृत विधि)

पितरों को प्रसन्न करने हेतु पितृ पक्ष में निम्नलिखित उपाय शास्त्रीय परंपरा के अनुसार किए जाते हैं:

1. दैनिक अन्न आहुति विधि

पितृ पक्ष के 15 दिनों तक नहा-धोकर शुद्ध भोजन तैयार करें।

  • बलिवैश्व पात्र हो तो उत्तम, अन्यथा स्टील या तांबे की कटोरी को गैस पर गर्म कर लें।

  • पके हुए थोड़े से चावल, रोटी, पराठा या पूरी में शुद्ध घी और गुड़ मिलाएँ।

  • चने के आकार के पाँच भाग कर लें।

गैस जलाकर पात्र को गर्म होने दें और निम्न मंत्रों से क्रमशः आहुति दें:

  1. “ॐ भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। स्वाहा — इदं ब्रह्मणे इदं न मम।”
  1.  “ॐ भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। स्वाहा — इदं देवेभ्यः इदं न मम।”
  1.  “ॐ भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। स्वाहा — इदं ऋषिभ्यः इदं न मम।”
  1.  “ॐ भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। स्वाहा — इदं नरेभ्यः इदं न मम।”
  1.  “ॐ भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। स्वाहा — इदं भूतेभ्यः इदं न मम।”

आहुतियाँ भस्म बनने पर गैस बंद कर दें।


मातृ नवमी और अमावस्या का महत्व

  • मातृ नवमी: घर की वयोवृद्ध स्त्री को प्रथम भोजन कराकर वस्त्र दान करें।

  • पितृ अमावस्या: घर के वयोवृद्ध पुरुष को प्रथम भोजन कराकर वस्त्र दान करें।

इन दोनों दिनों भोजन में उड़द दाल के बड़े, पूरी और खीर या हलवा अवश्य रखें। अनुभव के आधार पर यह देखा गया है कि यह परंपरा पितृ शांति में सहायक मानी जाती है।


दान, पिंडदान और सामूहिक श्राद्ध

  • पूर्वजों के नाम पर एक बोरी अनाज किसी सिद्ध मंदिर, शक्तिपीठ या आध्यात्मिक केंद्र में भंडारे हेतु दान करें।

  • यदि संभव हो तो सामूहिक श्राद्ध कर्म और पिंडदान अवश्य करें।

  • [Santan Sukh Kami Mein Shaktishaali Vedic Solution]

शास्त्रों में दान को श्राद्ध का अनिवार्य अंग माना गया है, क्योंकि इससे पितरों की तृप्ति का भाव जुड़ा होता है।
(Mystic Shiva Astrology Quora Official Website )


दैनिक दीपक और साधना

यदि घर में पूर्वजों का पूजन स्थान है, तो प्रतिदिन संध्या समय घी या सरसों तेल का दीपक जलाएँ। पितृ पक्ष में गायत्री उपासना, अनुष्ठान या यज्ञ करना भी लाभदायक माना गया है। शनिवार को पीपल वृक्ष पर जल, पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल अर्पित कर स्वर्गीय परिजनों का स्मरण करें।


स्त्री–पुरुष के लिए श्राद्ध नियम

  • स्त्री यदि ससुराल में बहू रूप में रहती है तो पति पक्ष के पितर ही पूज्य माने जाते हैं।

  • यदि स्त्री मायके में रहती है और पति घर-जंवाई है, तो मायके पक्ष के पितरों का पूजन होता है।

  • मायके और ससुराल के पितरों को एक साथ एक आसन पर पूजन नहीं किया जाता; बारी-बारी से किया जा सकता है।


कौवा, पक्षी और सावधानियाँ

पितृ पक्ष में कौवों और पक्षियों को दाना-पानी दें। पका हुआ, मसालेदार या तेलयुक्त भोजन न दें, क्योंकि इससे पक्षियों को हानि हो सकती है और पुण्य के स्थान पर दोष लग सकता है।


Pitru Paksh Upay से जुड़े सामान्य भ्रम

कई लोग केवल विधि पर ध्यान देते हैं, भाव पर नहीं। क्लाइंट्स की कुंडलियों के अध्ययन में यह देखा गया है कि श्रद्धा, नियमितता और मर्यादा का पालन अधिक प्रभावी होता है, न कि दिखावा या भय आधारित कर्म।


Q1. Pitru Paksh Upay कितने दिनों तक करना चाहिए?
पूरे 15 दिनों तक करना उत्तम माना जाता है, विशेषकर अमावस्या को।

Q2. क्या बिना ब्राह्मण भोज के श्राद्ध अधूरा रहता है?
दान और श्रद्धा मुख्य हैं; योग्य पात्र को भोजन कराना अधिक महत्वपूर्ण है।

Q3. क्या पितृ दोष के लिए अलग उपाय करने चाहिए?
यदि कुंडली में पितृ दोष हो, तो सामान्य श्राद्ध के साथ विशेष शांति कर्म लाभदायक हो सकता है।

Q4. Pitru Paksh Upay का प्रभाव कब दिखता है?
यह व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है; कई लोग मानसिक शांति और पारिवारिक संतुलन अनुभव करते हैं।

Q5. क्या महिलाएँ पितृ पक्ष के सभी कर्म कर सकती हैं?
हाँ, शास्त्रों में श्रद्धा को प्रधान माना गया है, लिंग भेद नहीं।


यदि आप अपनी व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार पितृ शांति या उपयुक्त Pitru Paksh Upay जानना चाहते हैं, तो किसी अनुभवी वैदिक ज्योतिष से परामर्श अवश्य लें।


Acharya Pradip Kumar (Con) +91- 9438741641 (Call/ Whatsapp) 
Vedic Astrologer & Tantra Expert
15+ years practical experience

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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