Grahon se Rog Nivaran को लेकर प्राचीन काल से ही वैदिक ज्योतिष में गहन अध्ययन किया जाता रहा है। अनुभव में देखा गया है कि मनुष्य का मन, मस्तिष्क और शरीर केवल जीवनशैली से ही नहीं, बल्कि मौसम, ग्रहों और नक्षत्रों के सूक्ष्म प्रभाव से भी लगातार प्रभावित होते हैं। कुछ लोग इन प्रभावों को सहज रूप से सहन कर लेते हैं, जबकि कुछ लोग बार-बार स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हैं।
कई लोगों ने यह साझा किया है कि समान परिस्थितियों में रहने के बावजूद, किसी को रोग जल्दी घेर लेता है और कोई अपेक्षाकृत स्वस्थ बना रहता है। इसका एक कारण मानसिक स्थिति, प्रतिरोधक क्षमता और जन्मकुंडली में ग्रहों की भूमिका मानी जाती है।
यह वैदिक ज्योतिष आधारित मार्गदर्शन है, अंतिम निर्णय और उपचार का चुनाव सदैव आपका स्वयं का होगा।
ज्योतिष में रोग का विचार
वैदिक और लाल किताब पद्धति के अनुसार, कुंडली के छठे और आठवें भाव का विशेष महत्व होता है। इन भावों के साथ ग्रहों की स्थिति, दृष्टि और आपसी संबंधों का विश्लेषण करके यह समझने का प्रयास किया जाता है कि शरीर के किस भाग पर अधिक दबाव पड़ सकता है।
ग्राहकों की कुंडलियों के अध्ययन में अक्सर देखा गया है कि ग्रह दोष केवल शारीरिक स्तर पर नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी प्रभाव डालते हैं। यही कारण है कि Grahon se Rog Nivaran में केवल एक सामान्य उपाय नहीं, बल्कि व्यक्ति-विशेष की कुंडली के अनुसार मार्गदर्शन अधिक उपयोगी माना जाता है।
ग्रहों से उत्पन्न संभावित रोग
नीचे नवग्रहों से जुड़े कुछ सामान्य रोग संकेत दिए जा रहे हैं। यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, न कि किसी चिकित्सकीय निदान का विकल्प।
बृहस्पति :बृहस्पति के असंतुलन से स्त्रियों से संबंधित समस्याएँ, पेट के विकार, मोटापा और नेत्रों से जुड़ी दिक्कतें देखी जाती हैं।
सूर्य :सूर्य के प्रभावित होने पर मानसिक तनाव, आँखों की समस्या, हृदय से जुड़ी परेशानी, मधुमेह और पित्त विकार की संभावना मानी जाती है।
चंद्र :चंद्र दोष से मानसिक अस्थिरता, नींद से जुड़ी समस्याएँ और पाचन संबंधी गड़बड़ी सामने आ सकती है।
शुक्र : शुक्र के असंतुलन से त्वचा रोग, दाद, खुजली और सौंदर्य से जुड़े कष्ट देखे जाते हैं।
मंगल : मंगल से ताप, रक्त की कमी, मांसपेशियों में खिंचाव या चोट की प्रवृत्ति जुड़ी मानी जाती है।
बुध : बुध के कमजोर होने पर नाड़ियों की कमजोरी, जीभ, दाँत और कुछ संक्रमणजन्य समस्याएँ देखी जाती हैं।
शनि : शनि दोष से जोड़ों का दर्द, हड्डियों की समस्या, दाँत, खाँसी और लंबे समय तक रहने वाली परेशानियाँ जुड़ी मानी जाती हैं।
राहु : राहु के प्रभाव से अचानक बुखार, मानसिक भ्रम, दुर्घटना या अनपेक्षित चोट का योग बताया जाता है।
केतु : केतु से रीढ़, जोड़ों, शुगर, कान, स्वप्न दोष और गुप्त अंगों से संबंधित समस्याएँ जोड़ी जाती हैं।
Grahon se Rog Nivaran ke Paramparik Upay
नीचे दिए गए उपाय लाल किताब और पारंपरिक ज्योतिष में प्रचलित हैं। इन्हें आस्था और संयम के साथ किया जाता है।
बृहस्पति के लिए -प्रतिदिन केसर का तिलक लगाना या अल्प मात्रा में केसर का सेवन करना।
सूर्य के लिए- सूर्य की उपासना, मंत्र जप, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय ध्यान तथा बहते जल में गुड़ अर्पित करना।
चंद्र के लिए -किसी मंदिर में कुछ दिनों तक कच्चा दूध और चावल रखना या खीर-बर्फी का दान करना।
शुक्र के लिए -गाय की सेवा करना तथा घर और शरीर की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना।
मंगल के लिए- बरगद वृक्ष की जड़ में लगातार 43 दिन मीठा कच्चा दूध चढ़ाना और उसी मिट्टी का तिलक लगाना।
बुध के लिए- नाक में चाँदी का तार या सफेद धागा निश्चित समय तक धारण करना तथा ताँबे के सिक्के को बहते जल में प्रवाहित करना।
शनि के लिए -नियमित रूप से बहते पानी में नारियल अर्पित करना और संयमित जीवनशैली अपनाना।
राहु के लिए- जौ, सरसों या मूली का दान करना।
केतु के लिए- मिट्टी के तंदूर में बनी मीठी रोटी 43 दिनों तक कुत्तों को खिलाना।
अनुभव के आधार पर यह भी देखा गया है कि ज्योतिषीय उपाय तभी सार्थक होते हैं, जब व्यक्ति अपनी दिनचर्या, आहार और मानसिक दृष्टिकोण में भी संतुलन लाए। केवल उपायों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता।
[Gathiya Rog (Arthritis)]
[Vedic astrology and health]
FAQ – Grahon se Rog Nivaran
प्रश्न 1: क्या ग्रह दोष से होने वाले रोग स्थायी होते हैं?
उत्तर: नहीं, ग्रह दोष संकेत मात्र होते हैं। सही जीवनशैली, चिकित्सा और संतुलित उपायों से स्थिति सुधर सकती है।
प्रश्न 2: क्या Grahon se Rog Nivaran के उपाय सभी पर समान रूप से काम करते हैं?
उत्तर: नहीं, उपाय व्यक्ति की कुंडली और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग प्रभाव दिखाते हैं।
प्रश्न 3: क्या इन उपायों के साथ डॉक्टर की सलाह जरूरी है?
उत्तर: हाँ, स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सकीय सलाह हमेशा प्राथमिक होनी चाहिए।
प्रश्न 4: कितने समय में ज्योतिषीय उपायों का प्रभाव दिखता है?
उत्तर: यह व्यक्ति, ग्रह स्थिति और निरंतरता पर निर्भर करता है।
प्रश्न 5: क्या बिना कुंडली देखे भी उपाय किए जा सकते हैं?
उत्तर: सामान्य उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन कुंडली आधारित मार्गदर्शन अधिक सटीक माना जाता है।
यदि आप अपने स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों को Grahon se Rog Nivaran के दृष्टिकोण से समझना चाहते हैं, तो इसे आत्म-निरीक्षण और संतुलन का माध्यम मानें। यदि आप अपनी व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार सही उपाय जानना चाहते हैं, तो किसी अनुभवी वैदिक ज्योतिष से सलाह अवश्य लें।
Acharya Pradip Kumar
Vedic Astrologer & Tantra Expert
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अनुभव: 15+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव