Anemia ke Jyotish Karan: Kundli ke Dosh se Khoon Ki Kami Kyon Hoti Hai
Anemia ke Jyotish Karan पर अनुभव में देखा गया है कि कई लोगों में शारीरिक कारणों के साथ-साथ कुंडली के संकेत भी सक्रिय रहते हैं। रक्त में लाल रक्त कणों की कमी, शीघ्र थकान, त्वचा का फीका पड़ना—ये लक्षण केवल पोषण से ही नहीं, बल्कि ग्रहों की स्थिति से भी जुड़ सकते हैं।
यह वैदिक ज्योतिष आधारित मार्गदर्शन है; अंतिम निर्णय और उपचार सदैव आपका और चिकित्सकीय सलाह पर आधारित होना चाहिए।
एनीमिया (रक्ताल्पता) क्या है?
रक्त में लाल रक्त कणों या हीमोग्लोबिन की कमी को रक्ताल्पता कहा जाता है। लौह तत्व, विटामिन-बी तथा फोलिक एसिड की कमी इसके सामान्य कारण हैं। स्त्रियों में मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, गर्भावस्था, या किसी दुर्घटना में अधिक रक्त बहना भी जोखिम बढ़ाता है। बच्चों और महिलाओं में इसकी संभावना अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है।
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Anemia ke Jyotish Karan :
ज्योतिष में शरीर के रक्त, पाचन और ऊर्जा से जुड़े संकेत सूर्य, मंगल, बृहस्पति, शनि, राहु-केतु तथा चंद्रमा से देखे जाते हैं। निम्न स्थितियों में रक्ताल्पता की प्रवृत्ति देखी जा सकती है:
1) केतु और त्रिकोण भाव
यदि केतु का प्रभाव अधिक हो और त्रिकोण भाव (1-5-9) निर्बल या ग्रहहीन हों, तो पोषण अवशोषण और रक्त गुणवत्ता पर नकारात्मक संकेत मिलते हैं।
2) सूर्य-शनि पीड़ा और पाचन
सूर्य तथा शनि की पीड़ित अवस्था पाचन शक्ति को कमजोर कर सकती है, जिससे लौह तत्व का समुचित अवशोषण नहीं हो पाता।
3) राहु-केतु का राशि प्रभाव
वृष, सिंह और कुम्भ राशियों में राहु-केतु की उपस्थिति से अत्यधिक रक्तस्राव या रक्त असंतुलन की संभावना बताई जाती है।
4) मंगल-बृहस्पति संयोजन/दृष्टि
यदि बृहस्पति सिंह राशि में हो और मंगल से छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, या मंगल कर्क राशि में हो तथा चंद्रमा छठे भाव में बैठा हो—तो भी रक्ताल्पता के संकेत मिल सकते हैं।
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लक्षण जिन पर ध्यान देना चाहिए
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शीघ्र थकान और कमजोरी
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त्वचा का कांतिहीन होना
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चक्कर आना, सांस फूलना
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कार्यक्षमता में कमी
(लक्षण दिखें तो चिकित्सकीय जांच अनिवार्य है।)
ज्योतिषीय मार्गदर्शन :
अनुभवाधारित वैदिक मार्गदर्शन के अनुसार कुछ लोग निम्न उपायों से मानसिक-आध्यात्मिक संतुलन महसूस करते हैं:
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कलाई में लोहे का कड़ा धारण करना।
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5 रत्ती मूंगा तथा 5–7 रत्ती पुखराज सोने या चांदी की अंगूठी में दाहिने हाथ में धारण करना।
नोट: रत्न धारण से पूर्व कुंडली-विश्लेषण और विशेषज्ञ परामर्श आवश्यक है। साबधान रहे , कोई भी ज्योतिष हो या कोई दूसरा आदमी के चक्कर में ना फसे , क्यूँ ना आजके समय में Orginal Gemstone aur Certificate की नाम पर बहुत बड़ा Scam चल रहा है ।
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आहार और व्यवहारिक सावधानियाँ
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लौह-समृद्ध आहार, विटामिन-सी के साथ सेवन।
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पर्याप्त जल, नियमित दिनचर्या।
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चिकित्सक द्वारा सुझाई गई जांच और सप्लीमेंट्स।
Q1. क्या Anemia ke Jyotish Karan अकेले कारण होते हैं?
A. नहीं, ज्योतिष संकेत मार्गदर्शन देते हैं; चिकित्सकीय कारण और जांच प्राथमिक हैं।
Q2. किन ग्रहों से रक्त और पाचन जुड़े माने जाते हैं?
A. सूर्य, मंगल, बृहस्पति, शनि, चंद्रमा तथा राहु-केतु से संकेत देखे जाते हैं।
Q3. क्या रत्न पहनने से एनीमिया ठीक हो जाता है?
A. रत्न आध्यात्मिक संतुलन में सहायक माने जाते हैं; चिकित्सा उपचार आवश्यक है।
Q4. महिलाओं में जोखिम अधिक क्यों बताया जाता है?
A. मासिक धर्म, गर्भावस्था और पोषण कारक प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
Q5. Anemia ke Jyotish Karan कब सक्रिय माने जाते हैं?
A. दशा-अंतरदशा और गोचर में ग्रह पीड़ा बढ़ने पर संकेत प्रबल दिख सकते हैं।
यदि आप अपनी व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार सही मार्गदर्शन और उपाय जानना चाहते हैं, तो किसी अनुभवी वैदिक ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।
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