Accident Yog Kundli: In Yogon se Sharir Chot ka Sanket

Accident Yog Kundli kya hai?

Accident Yog Kundli को लेकर लोगों के मन में अक्सर डर या गलतफहमी बन जाती है। अनुभव में देखा गया है कि कई जातक किसी एक योग को पढ़कर निष्कर्ष निकाल लेते हैं, जबकि वैदिक ज्योतिष में दुर्घटना या चोट को संभावना के रूप में देखा जाता है, न कि निश्चित घटना के रूप में। यह वैदिक ज्योतिष आधारित मार्गदर्शन है, अंतिम निर्णय और कर्म सदैव आपके अपने होते हैं।

दुर्घटना वह आकस्मिक घटना है जिससे शरीर या शरीर के किसी विशेष अंग को चोट पहुँचती है। जन्म कुंडली में कुछ ग्रह-स्थितियाँ ऐसी होती हैं, जो दशा, अंतरदशा या गोचर में सक्रिय होकर चोट के संकेत दे सकती हैं।

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Accident Yog Kundli का ज्योतिषीय सिद्धांत

वैदिक ज्योतिष में मंगल, शनि, राहु-केतु, षष्ठ, अष्टम और द्वादश भाव को चोट, संघर्ष और आकस्मिक घटनाओं से जोड़ा जाता है।
केवल योग का होना पर्याप्त नहीं होता — ग्रहों की शक्ति, दृष्टि, युति और समय-काल (दशा-गोचर) का संयुक्त विश्लेषण आवश्यक होता है।

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1. मंगल वृश्चिक राशि में और गुरु/शुक्र की दृष्टि

यदि मंगल वृश्चिक राशि में स्थित हो और उस पर गुरु या शुक्र की दृष्टि हो, तो शरीर पर चोट या घाव के योग बनते हैं। यह योग अक्सर रक्त, मांसपेशी या गहरे घावों से जुड़ा पाया गया है।


2. सप्तम भाव में मंगल और केतु

यदि केतु और मंगल दोनों सप्तम भाव में हों, तो शरीर पर स्थायी निशान, ऑपरेशन या गंभीर घाव के संकेत मिलते हैं, विशेषकर संबंधों या यात्रा के समय।


3. लग्नेश और मंगल त्रिक भावों में

जब लग्नेश और मंगल षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में हों, तो हाथ-पैर या भुजाओं में चोट लगने की संभावना देखी गई है।


4. षष्ठ या द्वादश भाव में मंगल-शनि

यदि मंगल और शनि दोनों षष्ठ या द्वादश भाव में स्थित हों, तो दुर्घटना का योग बनता है, विशेषकर वाहन, मशीन या कठोर परिश्रम से जुड़ा हुआ।


5. पंचम भाव में लग्नेश और मंगल

पंचम भाव में लग्नेश और मंगल हों तथा उन पर पाप ग्रहों की युति या दृष्टि हो, तो सिर में चोट या गिरने से चोट के संकेत मिलते हैं।


6. लग्न में मंगल, सप्तम में गुरु या शुक्र

यदि मंगल लग्न में हो और गुरु या शुक्र सप्तम भाव में हों, तो सिर या चेहरे पर चोट लगने की संभावना बनती है।


7. षष्ठ भाव का स्वामी लग्न या त्रिक भाव में

जब षष्ठ भाव का स्वामी लग्न या त्रिक भावों में पाप ग्रहों के साथ हो, तो शरीर को चोट या घाव मिलने के योग बनते हैं।


8. षष्ठेश और सूर्य की युति

यदि षष्ठ भाव का स्वामी सूर्य के साथ लग्न या अष्टम भाव में हो, तो सिर या मस्तिष्क क्षेत्र में चोट का संकेत मिलता है।


9. षष्ठेश और चंद्रमा की युति

षष्ठ भाव का स्वामी यदि चंद्रमा के साथ लग्न या अष्टम भाव में हो, तो मुख, दाँत या जीभ से संबंधित चोट के योग बनते हैं।


10. षष्ठेश और बुध की युति

षष्ठ भाव का स्वामी बुध के साथ लग्न या अष्टम भाव में हो, तो हृदय, छाती या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी चोट के संकेत मिलते हैं।


11. षष्ठेश और गुरु की युति

यदि षष्ठ भाव का स्वामी गुरु के साथ लग्न या अष्टम भाव में हो, तो नाभि के नीचे के हिस्से में चोट या ऑपरेशन का संकेत मिलता है।


12. षष्ठेश और शुक्र की युति

षष्ठ भाव का स्वामी शुक्र के साथ हो तो आँखों के नीचे, चेहरे या सौंदर्य से जुड़े अंगों में चोट का योग बनता है।


13. षष्ठेश और शनि की युति

यदि षष्ठ भाव का स्वामी शनि के साथ हो, तो पैरों, घुटनों या हड्डियों में चोट के योग देखे गए हैं।


14. षष्ठेश और राहु/केतु

षष्ठ भाव का स्वामी राहु या केतु के साथ लग्न या अष्टम भाव में हो, तो पूरे शरीर पर चोट, अचानक घाव या होंठों में चोट का संकेत मिलता है।


15. द्वादश भाव में चंद्र-गुरु और बुध त्रिक/उपचय में

यदि चंद्रमा और गुरु द्वादश भाव में हों तथा बुध तृतीय, षष्ठ या एकादश भाव में हो, तो गुप्त अंगों से संबंधित चोट का योग बनता है।
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FAQ – Accident Yog Kundli

Q1. क्या Accident Yog Kundli होने पर दुर्घटना निश्चित है?
नहीं, यह केवल संभावना दर्शाता है, निश्चितता नहीं।

Q2. यह योग कब सक्रिय होता है?
मुख्यतः मंगल, शनि, राहु-केतु की दशा या गोचर में।

Q3. क्या यह केवल वाहन दुर्घटना दर्शाता है?
नहीं, गिरना, कटना, मशीन या खेल से चोट भी दर्शा सकता है।

Q4. क्या उपाय से प्रभाव कम हो सकता है?
हाँ, सही मार्गदर्शन और सावधानी से जोखिम घटता है।


यदि आप अपनी कुंडली के अनुसार यह जानना चाहते हैं कि कौन-सा समय सावधानी का है और कौन-से उपाय आपके लिए उपयुक्त होंगे, तो किसी अनुभवी वैदिक ज्योतिषी से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।


Acharya Pradip Kumar
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Vedic Astrologer & Tantra Expert
15+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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