Bimari Door Karne Ke Totke: जब लाखों की दवाइयां और रिपोर्ट (MRI/ICU) फेल हो जाएं, तो जानें बीमारी का असली ज्योतिषीय कारण
नमस्कार दोस्तों! जब घर का कोई सदस्य गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, तो पूरा घर मानसिक और आर्थिक रूप से टूट जाता है। कई बार ऐसा होता है कि मरीज सालों से दवाइयां खा रहा है, लाखों के टेस्ट (MRI/Ultrasound) हो चुके हैं।
रिपोर्ट एकदम नॉर्मल आती है, लेकिन मरीज की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जाती है। डॉक्टर कहते हैं “इन्हें कोई बीमारी नहीं है”, लेकिन असलियत में वह इंसान अंदर ही अंदर मृत्यु शय्या की तरफ जा रहा होता है।
जब दवा शरीर पर लगना बंद हो जाए, तो समझ लीजिए मामला सिर्फ मेडिकल नहीं हो सकता। कई बार इसके पीछे ग्रहों के मारक दोष, नज़र दोष या प्रेत बाधा जैसी अदृश्य शक्तियाँ भी कारण बनती हैं।
ऐसी स्थिति में केवल दवाइयाँ ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उपाय और तांत्रिक टोटके भी मददगार साबित हो सकते हैं।
आज मैं आपको हमारे प्राचीन तंत्र शास्त्र और आयुर्वेद के 7 ऐसे अचूक Bimari Door Karne Ke Totke बताने जा रहा हूँ, जो मृत्यु के मुँह से भी रोगी को खींच लाने की ताक़त रखते हैं।
Bimari Door Karne Ke Totke: जब मेडिकल साइंस हार मान ले, तब काम आते हैं ये प्राचीन तांत्रिक टोटका
वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली में छठा भाव (रोग), आठवां भाव (कष्ट) और बारहवां भाव (अस्पताल खर्च) एक साथ सक्रिय हो जाते हैं, तब स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ बढ़ने लगती हैं।
यदि इन भावों पर राहु-केतु या मारक शनि की दृष्टि भी पड़ जाए, तो व्यक्ति लंबे समय तक बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ सकता है।
ऐसी स्थिति में दुनिया की कोई भी महंगी से महंगी एंटीबायोटिक (Antibiotic) या दवा अपना काम नहीं कर पाती। जब तक इन ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को तांत्रिक टोटकों से काटा नहीं जाएगा, मरीज को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल सकता आइए जानते हैं वे 7 महा-शक्तिशाली उपाय:
1. दवा बेअसर होने पर ‘गेहूं के आटे’ का महा-उपाय
अगर लगातार औषधियां (दवाइयां) खाने के बाद भी स्वास्थ्य में रत्ती भर भी सुधार नहीं हो रहा है, तो यह आसान सा उपाय करें:
किसी भी रविवार (Sunday) के दिन से इसे शुरू करें। गेहूं के आटे का एक पेड़ा (लोई) बनाएं और एक लोटा शुद्ध जल लें। बीमार व्यक्ति के सिर के ऊपर से उस आटे के पेड़े और जल के लोटे को 7 बार ‘उसार’ (वार) लें। इसके बाद उस जल को घर के बाहर किसी पौधे की जड़ में डाल दें और आटे का पेड़ा किसी गाय माता को खिला दें।
नियम: यह प्रयोग लगातार 3 दिन तक करना है। अगर पहले या दूसरे दिन ही रोगी चमत्कारिक रूप से ठीक महसूस करने लगे, तब भी प्रयोग को बीच में न रोकें, पूरे 3 दिन इसे जरूर करें।
2. अमावस्या का ‘महामृत्युंजय-भैरव’ महा-प्रयोग (नज़र और अदृश्य बाधा के लिए)
अगर घर से बीमारी जाने का नाम ही न ले रही हो और मानसिक अशांति (भूत-प्रेत का साया) महसूस हो रही हो, तो अमावस्या की सुबह यह महा-प्रयोग करें:
सामग्री: पानी मिली हुई मेहंदी, 7 साबुत उड़द के दाने, थोड़ा सा सिन्दूर, 2 बूंद दही, 1 नींबू (दो फांकों में कटा हुआ) और तेल का एक चौमुंहा (4 बत्तियों वाला) दीपक।
विधि: मेहंदी से एक दीपक का आकार बनाएं। उसमें चौमुंहा दीपक रखकर ऊपर बताई गई सारी सामग्री (उड़द, सिन्दूर, दही, नींबू) डाल दें। इसे भगवान शिव या भैरों जी के चित्र के सामने जलाएं। फिर ‘महामृत्युंजय मंत्र’ की एक माला (108 बार) या ‘बटुक भैरव स्तोत्र’ का पाठ करते हुए रोग-शोक दूर करने की प्रार्थना करें।
अंत में इस पूरे दीपक और नींबू को घर के दक्षिण दिशा (South) की ओर किसी दूर सूखे कुएं में डाल आएं। पीछे मुड़कर बिल्कुल न देखें। उसी दिन एक ब्राह्मण-ब्राह्मणी को भोजन कराकर वस्त्र दान करें।
3. ‘सवा पाव जौ’ का अति-गुप्त टोटका (गंभीर और जानलेवा बीमारी के लिए)
अगर मरीज ‘ICU’ में है या बीमारी बहुत ही ज्यादा गंभीर है, तो शनिवार या मंगलवार को यह सिद्ध Bimari Door Karne Ke Totke आज़माएं:
विधि: सवा पाव (लगभग 300 ग्राम) जौ (Barley) का आटा लें। उसमें साबुत काले तिल मिलाकर एक मोटी रोटी बनाएं। रोटी को अच्छी तरह सेंकें (वह कच्ची न रहे)। इस रोटी के एक तरफ थोड़ा सा तिल्ली (तिल) का तेल और गुड़ का पेड़ा लगा दें।
प्रयोग – इस तैयार रोटी को बीमार व्यक्ति के ऊपर से 7 बार वार (उसार) लें। उतार ने के बाद इसे ले जाकर किसी भैंसे (Male Buffalo – जो यमराज और शनि का प्रतीक है) को खिला दें। ध्यान रहे, भैंस (Female) को नहीं, केवल भैंसे को ही खिलाना है। खिलाकर चुपचाप घर आ जाएं, न पीछे मुड़ें और न ही किसी की आवाज़ का जवाब दें।
विशेष जानकारी: दोस्तों, कई बार शरीर की पुरानी बीमारी का कारण नसों में फंसी ‘दूषित हवा’ या वात दोष होता है, जिससे उठना-बैठना भी दूभर हो जाता है। अगर आप या आपके घर के बुजुर्ग जोड़ों के दर्द या गठिया (Arthritis) से परेशान हैं, तो भगवान नरसिंह का यह शक्तिशाली मंत्र और उपाय जरूर पढ़ें: [Vaat Rog Mantra: जोड़ों के दर्द और गठिया का शक्तिशाली उपाय]
4. पीपल देव का सरल और अचूक उपाय
किसी भी दिन से शुरू करके लगातार 7 दिन तक, सुबह 12 बजे से पहले पीपल के वृक्ष की जड़ में थोड़ा सा कच्चा दूध मिला हुआ जल अर्पित करें। उसी दिन शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक और अगरबत्ती जलाएं। मात्र 7 दिनों में बीमार व्यक्ति के स्वास्थ्य में अद्भुत सुधार देखने को मिलेगा।
5. ‘गोमती चक्र’ का त्वरित लाभ देने वाला प्रयोग
दोस्तों, गोमती चक्र का प्रयोग भी सबसे प्रभावशाली Bimari Door Karne Ke Totke में से एक माना जाता है..अगर किसी का रोग शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है, तो एक असली और अभिमंत्रित ‘गोमती चक्र’ लें। उसे एक छोटी सी मिट्टी की हांड़ी में पिरोकर (डालकर) रोगी के पलंग के पाये (Bed leg) पर मजबूती से बांध दें। जिस दिन से आप इसे बांधेंगे, उसी दिन से नकारात्मक ऊर्जा कट जाएगी और रोग समाप्त होना शुरू हो जाएगा।
6. बार-बार बीमार पड़ने वाले बच्चों के लिए ‘नवार्ण मंत्र’ का प्रयोग
अगर आपका बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है, बुरी नज़र लगती है और डॉक्टर बीमारी पकड़ नहीं पा रहे हैं, तो शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन यह अमोघ उपाय करें:
विधि: 8 असली ‘गोमती चक्र’ लें। पूजा स्थान में माँ दुर्गा के सामने लाल रेशमी वस्त्र पर इन्हें स्थापित करें। कुमकुम और धूपबत्ती की भभूत (राख) से गोमती चक्र पर तिलक करें। इसके बाद माँ भगवती का ध्यान करते हुए नवार्ण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” की 11 माला (रुद्राक्ष से) जाप करें।
सुरक्षा कवच: जाप के बाद 3 गोमती चक्र को लाल कपड़े में बांधकर एक ताबीज बनाएं और बच्चे के गले में पहना दें। बचे हुए 5 गोमती चक्र को पीले वस्त्र में बांधकर बच्चे के ऊपर से 11 बार वारें और किसी सुनसान (वीराने) स्थान में गढ्ढा खोदकर दबा दें। बच्चा हमेशा स्वस्थ और सुखी रहेगा।
7. भगवान धन्वन्तरि का अचूक महा-प्रयोग
पुराने से पुराने और लाइलाज रोगों को काटने के लिए आश्विन मास की त्रयोदशी (या किसी भी शुभ त्रयोदशी) को यह महा-प्रयोग शुरू करें:
सात्विक भाव से कुशासन (कुशा के आसन) पर बैठकर गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद मंत्र का कुल 1,28,000 (एक लाख अट्ठाईस हजार) बार जाप करना है: “अच्युताय नमः अनन्ताय नमः गोविन्दाय नमः” । अगर एक दिन में न हो, तो अगले दिन निराहार (सिर्फ गाय का दूध पीकर) इसे पूरा करें और फिर दशांश (10%) हवन करें।
मंत्र सिद्ध होने के बाद, रोगी व्यक्ति के शरीर का स्पर्श करते हुए इस मंत्र का जाप करें। भगवान धन्वन्तरि का स्वयं कथन है: इन तीन नामों (अच्युत, अनन्त, गोविन्द) के मन में जाप करने से सम्पूर्ण रोगों का नाश हो जाता है, इसमें कोई सन्देह नहीं है!
मेरी सलाह-
मेरे भाइयों और बहनों, तंत्र और ज्योतिष के ये Bimari Door Karne Ke Totke शरीर से नकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों के मारक प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं। इन उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करना चाहिए।
लेकिन किसी भी स्थिति में डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों को अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए। जब दवा और दुआ दोनों साथ चलते हैं, तभी बड़ी से बड़ी बीमारी पर भी विजय पाई जा सकती है।
बीमारी दूर करने के टोटके (Bimari Door Karne Ke Totke) से जुड़े सवाल-जवाब
प्रश्न 1: आचार्य जी, अगर बीमार व्यक्ति अस्पताल (ICU) में भर्ती है, तो उसके ऊपर से उपाय कैसे वारें?
उत्तर: बहुत ही उत्तम प्रश्न है। अगर मरीज अस्पताल में है, तो आप उस मरीज की कोई भी पहनी हुई पुरानी शर्ट, बनियान या उसके बाल (Hair) का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप उस कपड़े के ऊपर से इन टोटकों (जैसे आटे का पेड़ा या जौ की रोटी) को 7 बार वार कर प्रयोग पूरा कर सकते हैं। ऊर्जा सीधा मरीज तक पहुँच जाएगी।
प्रश्न 2: क्या महिलाओं को मासिक धर्म (Periods) के दौरान ये तांत्रिक उपाय करने चाहिए?
उत्तर: नहीं बहन! पूजा-पाठ और विशेषकर तांत्रिक उपायों में पवित्रता सबसे ज़रूरी है। मासिक धर्म के दौरान आप स्वयं ये उपाय न करें। आपके स्थान पर घर का कोई भी अन्य सदस्य (पति, भाई या माता) रोगी के लिए ये उपाय पूर्ण श्रद्धा के साथ कर सकता है।
प्रश्न 3: गोमती चक्र और असली सामग्री कहाँ से प्राप्त करें?
उत्तर: बाज़ार में आजकल बहुत से नकली गोमती चक्र और रुद्राक्ष मिलते हैं जो कोई फल नहीं देते। किसी भी तांत्रिक प्रयोग की सफलता सामग्री की शुद्धता पर निर्भर करती है। हमेशा किसी विश्वस्त पूजा-पाठ की दुकान या किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से ही सिद्ध की हुई सामग्री लें।
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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार (15+ साल का वैदिक ज्योतिष और तंत्र अनुभव) गंभीर से गंभीर बीमारी, भूत-प्रेत बाधा, और ग्रहों की किसी भी मारक समस्या का स्थायी और 100% समाधान के लिए आज ही बिना किसी संकोच के संपर्क करें: (Mo.) +91-9438741641 {Call / Whatsapp}