Guru Bhav Anusar Phal 2026 Complete Predictions Guide (12 Bhav Wise) :
Guru Bhav Anusar Phal 2026 वैदिक ज्योतिष का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, भाग्य और विस्तार का कारक माना गया है। Guru Bhav Anusar Phal 2026 यह स्पष्ट करता है कि जन्मकुंडली के किस भाव में स्थित होकर गुरु व्यक्ति के जीवन को किस दिशा में ले जाता है।
वर्ष 2026 में गुरु के भावगत प्रभाव को समझना इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि यह शिक्षा, विवाह, संतान, करियर और आध्यात्मिक उन्नति पर दीर्घकालीन प्रभाव डालता है।
Guru Bhav Anusar Phal 2026 ke Lakshan :
गुरु ग्रह जहां भी स्थित होता है, वहां नैतिकता, ज्ञान और विस्तार के संकेत देता है।
गुरु का शुभ प्रभाव व्यक्ति को धर्मात्मा, विद्वान और मार्गदर्शक बनाता है, जबकि अशुभ स्थिति में आलस्य, लोभ और असंतोष भी दे सकता है।
Guru Bhav Anusar Phal 2026 ke Karan :
गुरु के फल मुख्यतः इन कारणों पर निर्भर करते हैं:
-
गुरु की भाव स्थिति
-
गुरु पर पाप/शुभ ग्रहों की दृष्टि
-
चल रही महादशा / अंतर्दशा
-
वर्ष 2026 का गुरु गोचर प्रभाव
उदाहरण के लिए, जब गुरु पंचम भाव में स्थित होता है, तो संतान और बुद्धि पर सीधा प्रभाव डालता है।
Guru Bhav Anusar Phal 2026 – 12 Bhav Wise Predictions
1. प्रथम भाव:
व्यक्ति धर्मात्मा, धनवान, विद्वान और दीर्घायु होता है। भोग प्रवृत्ति अधिक हो सकती है।
2. द्वितीय भाव:
धन, वाणी और पारिवारिक सुख में वृद्धि। शत्रुओं पर विजय दिलाता है।
3. तृतीय भाव:
दानशील, धार्मिक और यात्रा-प्रिय। अन्य ग्रह विपरीत हों तो भोगी प्रवृत्ति देता है।
4. चतुर्थ भाव:
वाहन सुख, माता-पिता भक्ति, सम्मान। कभी-कभी संतान कष्ट देता है।
5. पंचम भाव:
बुद्धिमान और साहित्यिक बनाता है, पर संतान पक्ष में बाधा संभव।
6. षष्ठ भाव:
ज्योतिष में रुचि, पर शारीरिक दुर्बलता और मानसिक असंतोष देता है।
7. सप्तम भाव:
पराक्रमी, स्त्री प्रेमी, भौतिक सुख-संपन्नता देता है।
8. अष्टम भाव:
गुप्त रोग, लोभ और मानसिक अशांति की संभावना।
9. नवम भाव:
प्रबल भाग्य, उच्च शिक्षा, संतान और आध्यात्मिक उन्नति।
10. दशम भाव:
यश, प्रतिष्ठा, राज्य सम्मान और अहिंसक स्वभाव।
11. एकादश भाव:
अनेक लाभ, विद्वता और धन वृद्धि।
12. द्वादश भाव:
यात्रा-प्रिय, मधुर भाषी, पर मानसिक दुख और लोभ की प्रवृत्ति।
Jyotish Drishti se Guru Bhav Anusar Phal 2026 :
यदि 2026 में गुरु की महादशा या अंतरदशा चल रही हो, तो भावगत फल कई गुना बढ़ जाते हैं।
विशेष रूप से नवम, दशम और एकादश भाव में गुरु अत्यंत शुभ परिणाम देता है।
Guru Bhav Anusar Phal 2026 ke Samay Ki Jaane Wali Galtiyan
-
बिना कुंडली देखे रत्न धारण करना
-
गुरु को सदैव शुभ मान लेना
-
दशा-गोचर की अनदेखी करना
-
अधूरी जानकारी के आधार पर उपाय करना
Conclusion :
Guru Bhav Anusar Phal 2026 यह दर्शाता है कि गुरु ग्रह जीवन का मार्गदर्शक है, पर उसका फल भाव और स्थिति पर निर्भर करता है। सही मार्गदर्शन से गुरु के प्रभाव को जीवन में सकारात्मक बनाया जा सकता है।
यदि आप अपनी जन्मकुंडली के अनुसार व्यक्तिगत उपाय जानना चाहते हैं, तो https://www.aghortantra.com पर परामर्श बुक करें।
FAQs :
1. गुरु के किस भाव में सबसे शुभ फल मिलते हैं?
नवम, दशम और एकादश भाव में गुरु अत्यंत शुभ माना जाता है।
2. क्या गुरु अशुभ फल भी देता है?
हाँ, षष्ठ, अष्टम और द्वादश भाव में गुरु मिश्रित या अशुभ फल दे सकता है।
3. गुरु के अशुभ प्रभाव से कैसे बचें?
सही मंत्र, दान, और व्यक्तिगत कुंडली अनुसार उपाय आवश्यक हैं।
Internal & External Links :
-
External Reference: Karna Maatangi Sadhna
Expert Vedic astrology & tantra-mantra remedies at Mystic Shiva Astrology solve life’s challenges.
Personalized kundli analysis के लिए संपर्क करें: Call / WhatsApp: +91-9438741641