Jinn Pari Sadhana

Jinn Pari Sadhana

इस साधना (Jinn Pari Sadhana) को आपको श्मशान में करना है। यह मात्र1 दिन की साधना है। आपको पूर्णिमा पर इस साधना (Jinn Pari Sadhana) को करना होगा, क्योंकिइस दिन यह पवित्र योनिआँ अति शक्तिशाली हो जाती हैं और अपने पूर्ण प्रभाव के साथ सिद्ध होती हैं।
स्नान करके श्मशान में रात के पूरे10 बजे प्रवेश करना है। उत्तर दिशा कीओर मुख कर इस साधना (Jinn Pari Sadhana) को करना होता है। सबसे पहले आसन जाप पढ़ना है और फिर शरीर कीलन मंत्र पढ़कर अपने चारों ओर लोहे की छुरी से एक गोल चक्र बनाना है। इसके पश्चात लोहबान की अगरबत्ती जलाकर गुरु एवं गणपति जी का मानस पूजन करना है और उनसे साधना (Jinn Pari Sadhana) हेतु आज्ञा माँगनी है। अब आपको मंत्र जप प्रारम्भ करना होगा, जिसमें आप रूद्राक्ष की माला का प्रयोग करेंगे जोकि प्राण-प्रतिष्ठित होगी। इस साधना (Jinn Pari Sadhana) में आसन एवं वस्त्र श्वेत होंगे। आपको लगातार मंत्र जप करते जाना है जब तक कि परी हाज़िर ना हो जाए।
जैसे – जैसे आप मंत्र जप करते जाएँगे वैसे – वैसे सारा श्मशान जागृत होता चला जाएगा। कभी आपके सामने अति क्रूर इतर योनिआँ आएगीं और आपके उपर झपटेगीं,तो कभी जंगली जानवर और अन्य जीव आपकी साधना खंडित करने की कोशिश करेंगे। आपको बस किसी भी हालत में उस सुरक्षा चक्र से बाहर नहीं आना है नहीं तोवो इतर योनिआँ आपको नुकसान पहुँचा सकतीं हैं और आप पागल भी हो सकते हैं। अगर आप अपनी साधना से विचलित ना हुए तो कुछ देर के बाद सारा श्मशान शांत हो जाएगा और आपको आसमान से नीचे की ओर आती हुई एक परी नज़र आएगी जो बहुत ही सुंदर होगी। जब वो आपकेपास आए तो पहले से लाकर रखे हुए गुलाब के पुष्पों की वर्षा उसके उपर कर दें और उससे वचन माँगे कि ” आप मुझेवचन दें कि मैं जब भी इस मंत्र का एक बार उच्चारण करूंगा आपको आना होगा और जो मैंकहूँगा वो करना होगा तथा आपको आजीवन मेरे साथ मेरी प्रेमिका के रूप में रहना पड़ेगा “। इस तरह वो परी आपके वश में हो जाएगी और आप उससे कुछ भीकरवा सकते हैं।

Jinn Pari Sadhana Mantra

॥मन्त्र॥—” बा हिसार हनसद हिसार जिन्न देवी परी ज़ेर वह एक खाई दूसरी अगन पसारी गर्व दीगर जां मिलाईके असवार धनात॥”
क्रोध मंत्र :
यह एक अचूक मंत्र है, जो आपको सिद्धि प्रदान करेगा ही करेगा।भूतडामर तंत्र और किँकिणी तंत्र मेँ ए मंत्र है।दोँनो किताब का मंत्र थडा सा अलाग है पर देखने पर एक ही मंत्र है।इसमेँ दया भाव से इष्ट को प्रकट नही किया जाता बलकी मार पीट कर जबरन प्रकट होने के लिए बेवस किया जाता है।इष्ट अगर ना आए तो भीषण दंड पाता है और नरक मेँ जा गीरता है।इसको क्रोध मंत्र कहा जाता है।
क्रोध भैरव को कौन नही डरता है स्वयं शनि देव का भी हिम्मत नही होता की,क्रोध भैरव के उपासक को कुछ कष्ट दे पाये।आप अगर पुजा साधना किया तब भी अप्सरा,यक्षिणी बेताल,परी और देवी, देवता आपको दर्शन नही देया हो तो क्रोध मंत्र से दूवारा साधना करेँ,इस बार उनको आना ही पडेगा।पहले ए मंत्र उनको बंध लेता है फिर धीरे धीरे बज्र अग्नि मेँ जलाना शुरु कर देता है और जीसके फल स्वरुप उनको भीषण कष्ट भोगना पडता है और आँख फट जाता है ,शरीर खंड खंड हो जाता है फिर नरक मेँ जा कर गीरते है।उनको ए सब भोगने से पूर्व ही साधना करेने बाले के पास प्रकट होकर मंत्र जाप को विराम देते है।साधना करने के लिए कई भी दिन चलता है।
सर्फ मंत्र का जाप करना है और उस देवी,देवता,अप्सरा,यक्षिणी,बेताल,परी और भूत, प्रेत का नाम लेना है मंत्र के अमुक स्थान पर।मंत्र तंत्र कई खेल नही है,साधना करने बाले को कोठर हुदय बाला होना चाहिए।इसमेँ एक बात बोल दू भूत प्रेत का कई नाम नही होता तो किया करेँ,अमुक के स्थान पर भूतेश्वरी (प्रेत)और भूतेश्वर या भूतनाथय (भूत) का नाम ले। ।आप चाहे तो सीधे भूत प्रेत भी बोल साकते है।ए साधना एक रात का है।हा अगर आप का मन किसी लडकी के पास है और शरीर मंत्र जाप कर रहा है तो ए मंत्र भी बिफल होगा।मन और तन का ध्यान सिर्फ अपनी मंत्र और इष्ट पर केँद्रित होना चाहिए।
यहाँ भूतडामर का मंत्र नही दे रहा हु पर किँकिणी तंत्र का मंत्र दे रहा हु।ए एक दिन का साधना है।मंत्र जाप संख्या आठ हजार है ।।
मंत्र- “ॐ कट्ट कट्ट अमुक ह्रीँ यः यः हुं फट॥”
ध्यान दे ए मूत्यु दंड मंत्र है, आपका इष्ट प्रकट होकर आपका शर्त मान ले फिर भी मंत्र जाप करते रहे तो वह आपके सामने जलकर राख होजाएगा।इसका अर्थ वह नरक मेँ चला जाता है और कष्ट भोगता है।
चेतावनी – {यह साधना (Jinn Pari Sadhana) जानकारी हेतु है। किसी लालच के वशीभूत होकर साधक यह साधना (Jinn Pari Sadhana) न करे । योग्य गुरु के निर्देशन में ही करे।}
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जय माँ कामाख्या

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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