Kanth Shool Upay: Gale Ki Gilliyon Ki Samasya Aur Jyotish Nidan

Kanth Shool Upay: Gale Ki Gilliyon Ki Samasya Aur Jyotish Nidan

Kanth Shool Upay ko lekar anubhav me dekha gaya hai ki kai log ise sirf seasonal infection samajh kar ignore kar dete hain, jabki iska sambandh sharirik aur jyotish dono karanon se ho sakta hai।
Yah Vedic astrology adharit margdarshan hai, final nirnay hamesha aapka hoga.


कंठ शूल (Tonsillitis) क्या है?

हमारी श्वास नलिका में मांसल ऊतकों के छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं, जिन्हें आम भाषा में गिल्टियाँ कहा जाता है।
ये हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण अंग होते हैं,जो नाक के माध्यम से आने वाले कीटाणुओं को गले तक पहुँचने से रोकते हैं।

प्रायः यह समस्या छोटे बच्चों में अधिक देखी जाती है। ठंड लगने, सर्दी-जुकाम होने पर ये गिल्टियाँ सूज जाती हैं और कंठ शूल की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

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कंठ शूल के सामान्य लक्षण

अनुभव के आधार पर देखे गए प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:

  • कान बंद-सा महसूस होना

  • सुनने में कठिनाई

  • सूंघने की शक्ति कम हो जाना

  • भोजन का स्वाद कम लगना

  • खाने में अरुचि

  • गले में दर्द या भारीपन

यदि रोग अधिक बढ़ जाए, तो चिकित्सक की सलाह के अनुसार चिकित्सा उपचार अवश्य कराना चाहिए।

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ज्योतिषीय दृष्टि से कंठ शूल के कारण

Clients के कुंडली विश्लेषण में देखा गया है की कंठ शूल का संबंध कुछ विशेष ग्रह स्थितियों से भी हो सकता है। विशेष रूप से:

  • वृष, तुला और वृश्चिक राशि के जातकों में यदि मंगल की स्थिति अशुभ हो

  • शुक्र और बुध का नीच राशि में होना

  • सप्तम भाव में पाप ग्रहों की उपस्थिति

  • पूर्ण मंगल दोष योग

ये सभी स्थितियाँ कंठ शूल जैसे रोगों के कारक माने गए हैं।

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Kanth Shool Upay (ज्योतिषीय निदान)

अनुभव के आधार पर बताए गए कुछ पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय निम्न हैं:

  • सोने या चांदी की अंगूठी में पुखराज या सुनैला धारण करना

  • शुद्ध मूंगा 5 रत्ती का, चांदी में मढ़वाकर अनामिका अंगुली में पहनना

  • मूंगा या पुखराज को पेंडेंट के रूप में जंजीर में डालकर गले में धारण करना

इन उपायों को करने से पहले अपनी व्यक्तिगत कुंडली का अवलोकन कराना अधिक उचित माना जाता है। आजके समय में रत्न पत्थर एक ब्यापार बन गया है , आजकल बहुत ज्योतिष रत्न पत्थर को लेकर , उसके ऊपर Duplicate Certificate बनाकर heavy price में बेच रहे हैं। मेरी हिसाब से आप Stone के चक्कर में ना फस कर ज्योतिषीय उपाय करना लाभदायक साबित होगा ।

[कंठ शूल (Tonsillitis)]


ध्यान रखने योग्य बातें

  • यह उपाय सहायक मार्गदर्शन हैं, चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं

  • बच्चों में लक्षण बढ़ने पर डॉक्टर से परामर्श अनिवार्य है

  • रत्न धारण करने से पहले शुद्धता और विधि का ध्यान रखें


FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. क्या Kanth Shool Upay बच्चों के लिए भी लागू होते हैं?
हाँ, लेकिन बच्चों के लिए रत्न या उपाय करने से पहले अनुभवी ज्योतिषी और चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।

Q2. क्या कंठ शूल केवल ठंड से होता है?
नहीं, ठंड एक कारण हो सकता है, लेकिन ग्रहों की स्थिति भी इसमें भूमिका निभा सकती है।

Q3. रत्न धारण करने में कितना समय लगता है असर दिखाने में?
आमतौर पर कुछ सप्ताह में सकारात्मक प्रभाव महसूस किया जा सकता है, यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है।

Q4. क्या बिना कुंडली देखे रत्न पहन सकते हैं?
अनुभव के आधार पर ऐसा करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि गलत रत्न विपरीत प्रभाव भी दे सकता है।

Q5. क्या यह समस्या पूरी तरह ठीक हो सकती है?
सही चिकित्सा, सावधानी और मार्गदर्शन से स्थिति में काफी सुधार देखा गया है।


यदि आप अपनी व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार कंठ शूल से संबंधित सही उपाय जानना चाहते हैं, तो किसी अनुभवी वैदिक ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।

Acharya Pradip Kumar (Mob) +91-9438741641 (Call / WhatsApp)
Vedic Astrologer & Tantra Expert
15+ years practical experience

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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