Kidney Stone Jyotish Karan: Kundli me kaun se grah zimmedar hote hain
Kidney Stone Jyotish Karan के विषय में अनुभव में देखा गया है कि जब शारीरिक समस्या बार-बार लौटती है या सामान्य उपचार के बाद भी राहत नहीं मिलती, तब उसके पीछे कुंडली में छिपे ग्रह दोषों की भूमिका को समझना आवश्यक हो जाता है। यह वैदिक ज्योतिष आधारित मार्गदर्शन है, अंतिम निर्णय हमेशा आपका होगा।
पथरी रोग में शरीर के भीतर अत्यंत सूक्ष्म आकार के पत्थर बन जाते हैं। यह पत्थर प्रायः शरीर में मौजूद कोलेस्ट्रॉल, खनिज तत्वों और असंतुलित पाचन प्रक्रिया के कारण विकसित होते हैं। प्रारंभिक अवस्था में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन समय के साथ समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
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पथरी रोग के शारीरिक संकेत
प्रारंभ में व्यक्ति को किसी विशेष प्रकार की पीड़ा महसूस नहीं होती। धीरे-धीरे जब पथरी का आकार बढ़ने लगता है, तब पेट या कमर में दर्द, उल्टी, सूजन और पाचन शक्ति के असंतुलन जैसे लक्षण सामने आते हैं। कई मामलों में चिकित्सकीय हस्तक्षेप या ऑपरेशन की आवश्यकता भी पड़ती है।
Kidney Stone Jyotish Karan Kya Keheta Hai ?
वैदिक ज्योतिष में किडनी और मूत्र तंत्र का संबंध मुख्य रूप से सप्तम भाव, लग्न भाव, शुक्र, शनि और जल तत्व राशियों से माना गया है। Clients के charts में यह देखा गया है कि जब इन भावों और ग्रहों पर पाप ग्रहों का प्रभाव होता है, तब पथरी जैसी समस्याएं उभर सकती हैं।
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कुंडली दोष के प्रमुख संकेत
यदि लग्न या सप्तम भाव में पाप ग्रह स्थित हों या नीच राशि का प्रभाव हो, तो व्यक्ति को इस रोग से अधिक कष्ट होता है। अनुभव के आधार पर कुछ विशेष योग निम्न प्रकार से देखे गए हैं:
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कर्क राशि में शनि की स्थिति
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मकर राशि में अनेक ग्रहों का एकत्र होना
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तुला राशि में सूर्य का पीड़ित होना
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मीन राशि में कई ग्रहों का जमाव
इन स्थितियों में शरीर में जल तत्व का असंतुलन बढ़ता है, जो पथरी बनने की प्रवृत्ति को प्रबल कर सकता है।
ग्रह दोष और पाचन असंतुलन का संबंध
ज्योतिषीय दृष्टि से जब शुक्र और चंद्रमा पीड़ित होते हैं, तब शरीर में तरल संतुलन बिगड़ने लगता है। शनि की कठोर दृष्टि पाचन और उत्सर्जन प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। अनुभब के आधार पर यह पाया गया है कि लंबे समय तक चलने वाला ग्रह दोष धीरे-धीरे शारीरिक स्तर पर रोग का रूप ले लेता है।
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वैदिक ज्योतिषीय निदान और मार्गदर्शन
ज्योतिष में रत्न केवल सहायक साधन माने जाते हैं, न कि चमत्कारी इलाज। फिर भी कुंडली के अनुसार सही मार्गदर्शन से शरीर और मन दोनों को संतुलन मिल सकता है।
अनुभव में जिन रत्नों का उल्लेख किया गया है, वे इस प्रकार हैं:
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नीला पुखराज, लाल मूंगा, मूनस्टोन होता है ।
यदि इनसे लाभ न हो, तो कुंडली परीक्षण के बाद माणिक्य या मोती पर विचार किया जा सकता है। बिना कुंडली देखे रत्न धारण करना उचित नहीं माना जाता। आजकल रत्न की चक्कर में ना फस कर आप ज्योतिषीय उपाय करके लाभ उठा सकते हो ।
FAQ – Kidney Stone Jyotish Karan
प्रश्न 1: क्या हर पथरी का कारण कुंडली में ग्रह दोष होता है?
उत्तर: नहीं, सभी मामलों में नहीं। लेकिन कुछ मामलों में ग्रह दोष शारीरिक असंतुलन को बढ़ा सकता है।
प्रश्न 2: Kidney Stone Jyotish Karan किस भाव से जुड़ा है?
उत्तर: मुख्य रूप से लग्न, सप्तम भाव और जल तत्व से जुड़े ग्रहों से।
प्रश्न 3: क्या रत्न धारण करने से पथरी तुरंत ठीक हो जाती है?
उत्तर: रत्न सहायक होते हैं, त्वरित चिकित्सा समाधान नहीं।
प्रश्न 4: किस ग्रह का दोष पथरी में अधिक देखा जाता है?
उत्तर: शनि, शुक्र और चंद्रमा की पीड़ा कई कुंडलियों में देखी गई है।
प्रश्न 5: क्या बिना कुंडली देखे उपाय करना सही है?
उत्तर: नहीं, व्यक्तिगत कुंडली के बिना उपाय करना अनुचित माना जाता है।
यदि आप अपनी व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार सही ज्योतिषीय मार्गदर्शन और उपयुक्त उपाय जानना चाहते हैं, तो किसी अनुभवी वैदिक ज्योतिष से सलाह अवश्य लें।
Acharya Pradip Kumar
Vedic Astrologer & Tantra Expert
15+ years practical experience
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