Kundli Me Videsh Yatra Ke Yog: Grahon aur Bhavon se Videsh Jaane Ka Yog

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Kundli Me Videsh Yatra Ke Yog :

भारत में अधिकतर लोग यह जानना चाहते हैं कि कुंडली में विदेश यात्रा के योग हैं या नहीं। कोई नौकरी के लिए विदेश जाना चाहता है, कोई शिक्षा, व्यापार या स्थायी निवास (PR) के लिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म कुंडली में ग्रहों और भावों की स्थिति से यह स्पष्ट संकेत मिल सकते हैं कि जातक को विदेश जाने का अवसर मिलेगा या नहीं।

Kundli Me Videsh Yatra Ke Yog तब बनते हैं जब कुछ विशेष ग्रह, भाव और राशियाँ आपस में संबंध बनाती हैं। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि कौन-कौन से ग्रह विदेश यात्रा के योग बनाते हैं, किस उद्देश्य से व्यक्ति विदेश जाता है, और किन स्थितियों में विदेश जाकर परेशानी या लाभ होता है।

कुंडली में विदेश यात्रा का ज्योतिषीय आधार :

ज्योतिष के अनुसार, विदेश यात्रा केवल एक संयोग नहीं होती। यह जन्म कुंडली में बने विशेष योगों का परिणाम होती है। जब कुंडली में द्वादश भाव, नवम भाव और तृतीय भाव सक्रिय होते हैं तथा उन पर शुभ या अशुभ ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, तब Kundli Me Videsh Yatra Ke Yog बनते हैं।

  • द्वादश भाव – विदेश, परदेश, खर्च और प्रवास

  • नवम भाव – लंबी दूरी की यात्रा, भाग्य और धर्म

  • तृतीय भाव – यात्राएँ, प्रयास और साहस

इन भावों का आपस में संबंध विदेश जाने की प्रबल संभावना दर्शाता है।


विदेश यात्रा के लिए प्रमुख भाव कौन से हैं :

तृतीय भाव :

तृतीय भाव छोटी और मध्यम यात्राओं का संकेत देता है। यदि यह भाव मजबूत हो और राहु या चंद्र से जुड़ा हो, तो व्यक्ति बार-बार विदेश यात्रा करता है।

नवम भाव :

नवम भाव लंबी दूरी और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं का कारक है। नवमेश का द्वादश भाव से संबंध विदेश यात्रा के प्रबल योग बनाता है।

द्वादश भाव :

द्वादश भाव विदेश में रहना, बसना और विदेशी संस्कृति से जुड़ाव दर्शाता है। इस भाव पर शुभ ग्रह हों तो विदेश में सफलता मिलती है।


Kundli Me Videsh Yatra Ke Yog banane wale grah :

सूर्य और विदेश यात्रा :

सूर्य मान-सम्मान और सरकारी संपर्क का ग्रह है।

  • उच्च सूर्य विदेश में प्रतिष्ठा, पद और पहचान दिलाता है।

  • नीच या पीड़ित सूर्य विदेश में दंड, अपमान या कानूनी परेशानी दे सकता है।

चंद्रमा का प्रभाव :

चंद्रमा मन, भावनाएँ और अनुकूलता दर्शाता है।

  • बलवान चंद्र व्यक्ति को आसानी से विदेश ले जाता है।

  • नीच चंद्र होने पर विदेश में मन नहीं लगता।

  • उच्च चंद्र वाले जातक लंबी और बार-बार विदेश यात्राएँ करते हैं।

मंगल और साहसिक यात्रा :

मंगल साहस और ऊर्जा का प्रतीक है।

  • शुभ मंगल विदेश में नौकरी, तकनीकी कार्य या उद्यमिता से जोड़ता है।

  • यदि मंगल पीड़ित हो, तो दुर्घटना या विवाद के योग बन सकते हैं।

बुध और व्यापारिक विदेश यात्रा :

बुध व्यापार, संचार और बुद्धि का ग्रह है।

  • मजबूत बुध व्यापार या आईटी क्षेत्र में विदेश ले जाता है।

  • बुध का द्वादश या तृतीय भाव से संबंध हानि का संकेत भी दे सकता है।

बृहस्पति और शिक्षा हेतु विदेश :

बृहस्पति ज्ञान और विस्तार का ग्रह है।

  • उच्च शिक्षा, रिसर्च और अध्यापन के लिए विदेश यात्रा।

  • शुभ गुरु विदेश में सम्मान और स्थिरता देता है।

शुक्र और सुखद विदेश अनुभव :

शुक्र सुख, विलास और कला का ग्रह है।

  • विदेश यात्रा को आरामदायक और आनंदमय बनाता है।

  • चंद्र-शुक्र युति होने पर पर्यटन और घूमने के प्रबल योग बनते हैं।

शनि का विदेश में संघर्ष :

शनि कर्म और संघर्ष का ग्रह है।

  • तकनीकी, श्रम या लंबे अनुबंधों के कारण विदेश।

  • सफलता देर से लेकिन स्थायी होती है।

राहु और केतु: सबसे शक्तिशाली योग :

  • राहु विदेशी संस्कृति, तकनीक और अप्रत्याशित अवसर देता है।

  • केतु आध्यात्मिक या शोध कार्य के लिए विदेश ले जाता है।

राहु-केतु का द्वादश भाव से संबंध Kundli Me Videsh Yatra Ke Yog को अत्यंत प्रबल बनाता है।


लग्न और राशि का प्रभाव :

कुछ लग्न और राशियाँ विदेश यात्रा के प्रति अधिक सक्रिय होती हैं:

  • मेष

  • सिंह

  • वृश्चिक

इन लग्नों के जातक जीवन में कई बार विदेश आते-जाते रहते हैं।


विदेश जाकर बसने और बार-बार यात्रा के योग :

  • द्वादश भाव में राहु

  • नवमेश का द्वादश भाव में होना

  • चंद्र का राहु से संबंध

ये योग विदेश में स्थायी निवास की संभावना बढ़ाते हैं।


विदेश यात्रा में सफलता या परेशानी के संकेत

सफलता के योग

  • शुभ ग्रहों की दृष्टि

  • मजबूत लग्न और चंद्र

  • दशा-अंतरदशा का अनुकूल होना

परेशानी के योग

  • पीड़ित सूर्य या चंद्र

  • द्वादश भाव पर पाप ग्रह

  • गलत समय पर यात्रा


निष्कर्ष :

Kundli Me Videsh Yatra Ke Yog केवल एक ग्रह से नहीं बल्कि पूरे कुंडली विश्लेषण से तय होते हैं। सही ग्रह, सही भाव और सही दशा मिलकर विदेश यात्रा को सफल बनाते हैं। इसलिए अंतिम निर्णय से पहले कुंडली का गहन अध्ययन आवश्यक है।


सामान्य प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्या हर कुंडली में विदेश यात्रा का योग होता है?

उत्तर: नहीं, यह विशेष ग्रह-भाव संबंधों पर निर्भर करता है।

प्रश्न 2: राहु विदेश यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?

उत्तर: राहु विदेशी संस्कृति और परदेश का प्राकृतिक कारक है।

प्रश्न 3: क्या दशा-अंतरदशा जरूरी होती है?

उत्तर: हाँ, सही योग के साथ सही समय भी आवश्यक है।

प्रश्न 4: क्या विदेश जाकर बसने के योग अलग होते हैं?

उत्तर: हाँ, स्थायी निवास के लिए द्वादश भाव और राहु का मजबूत होना जरूरी है।

प्रश्न 5: क्या नीच ग्रह विदेश में नुकसान दे सकते हैं?

उत्तर: हाँ, विशेषकर सूर्य और चंद्र के नीच होने पर मानसिक व कानूनी परेशानी हो सकती है।

ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार (Mob) +91- 9438741641 (call/ whatsapp)

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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