Mangal Dosha Truth को लेकर समाज में कई भ्रम फैले हुए हैं। प्राचीन काल में विवाह से पूर्व वर-वधू की जन्मकुंडली मिलाना अनिवार्य माना जाता था, ताकि वैवाहिक जीवन स्थिर और संतुलित रहे। Mangal Dosha Truth यह स्पष्ट करता है कि केवल मंगल की स्थिति देखकर किसी को मांगलिक ठहराना शास्त्रीय दृष्टि से सही नहीं है।
आज यह तर्क दिया जाता है कि विदेशों में कुंडली मिलान नहीं होता, फिर भी विवाह होते हैं। परंतु बढ़ता हुआ divorce ratio यह सिद्ध करता है कि ज्योतिषीय मिलान के बाद किए गए विवाह अधिक स्थायी होते हैं।
Mangal Dosha ke Lakshan :
मंगल दोष के लक्षण केवल झगड़ा, क्रोध या वैवाहिक बाधा तक सीमित नहीं होते। ज्योतिषीय दृष्टि से इसके प्रभाव शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तीनों स्तरों पर देखे जाते हैं, जैसे:
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अत्यधिक impatience और dominance
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वैवाहिक जीवन में ego clashes
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जल्द निर्णय लेने की प्रवृत्ति
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रिश्तों में harsh communication
परंतु ये लक्षण हर कुंडली में मंगल होने पर आवश्यक नहीं होते।
Mangal Dosha ke Karan :
वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब मंगल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित होता है, तब सामान्यतः मंगल दोष माना जाता है।
लेकिन यह नियम अधूरा है। वास्तविक विश्लेषण में निम्न कारक देखे जाते हैं:
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मंगल की राशि
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स्वगृह, उच्च या नीच अवस्था
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दृष्टि और युति
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लग्न की प्रकृति
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दशा और गोचर प्रभाव
इन्हें नज़रअंदाज़ करके निकाला गया निष्कर्ष शास्त्रसम्मत नहीं होता।
Mangal Dosha ke Upay :
मंगल दोष शांति के लिए ये प्रमुख और सुरक्षित उपाय माने जाते हैं:
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मंगलवार को मंगल बीज मंत्र का नियमित जाप करें।
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ताम्र, लाल मसूर या काला तिल दान विशेष फल देता है।
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शिव पूजा द्वारा मंगल की उग्रता शांत होती है।
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गोमेद या मूंगा रत्न केवल योग्य ज्योतिषी की सलाह से धारण करें।
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मंगलवार व्रत से नकारात्मक ऊर्जा में कमी आती है।
Jyotish Drishti se Mangal Dosha Truth :
शास्त्रों में कई ऐसी विशेष परिस्थितियाँ बताई गई हैं जिनमें मंगल दोष नहीं लगता, जैसे:
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प्रथम भाव में मेष राशि का मंगल
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चतुर्थ भाव में वृश्चिक का मंगल
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सप्तम भाव में मकर का मंगल
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अष्टम भाव में कर्क का मंगल
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वक्री मंगल
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नीच का मंगल (कर्क राशि)
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मिथुन या कन्या में स्थित मंगल
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सिंह या कर्क लग्न
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मेष या धनु लग्न में योगकारक मंगल
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केंद्र में पंचमहापुरुष योग बनाने वाला मंगल
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मंगल पर गुरु की दृष्टि या युति
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लग्न में बलवान गुरु, शुक्र या बुध
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चन्द्र-मंगल लक्ष्मी योग
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स्वगृही मंगल राहु के साथ
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अष्टम भाव में धनु या मीन का मंगल
यही Mangal Dosha Truth है जिसे सामान्य गणना में अनदेखा कर दिया जाता है।
Mangal Dosha ke Samay Ki Jaane Wali Galtiyan
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केवल भाव देखकर मांगलिक घोषित कर देना
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बिना कुंडली मिलान के भय फैलाना
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इंटरनेट remedies को blindly follow करना
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रत्न धारण में जल्दबाजी करना
गलत सलाह विवाह और मानसिक शांति दोनों को प्रभावित कर सकती है।
Conclusion :
Mangal Dosha Truth यह सिखाता है कि हर मंगल दोष हानिकारक नहीं होता। सही शास्त्रीय विश्लेषण से विवाह और जीवन की बड़ी बाधाएँ स्वतः समाप्त हो सकती हैं।
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FAQs
1. Mangal Dosha Truth के अनुसार कब मंगल दोष नहीं माना जाता है?
जब मंगल स्वगृही, उच्च, योगकारक या शुभ दृष्टि में हो।
2. क्या मंगल दोष का प्रभाव विवाह पर पड़ता है?
गलत विश्लेषण होने पर हाँ, परंतु शास्त्रीय नियमों से अक्सर दोष निरस्त हो जाता है।
3. क्या 2026 में मंगल दोष के उपाय प्रभावी रहेंगे?
हाँ, यदि उपाय दशा-गोचर के अनुसार किए जाएँ।
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