Napunsakta jyotish karan: Shukra dosh se sexual kamzori aur santan samasya ka sach

Napunsakta jyotish karan: ग्रह दोष से जुड़ी पुरुष समस्या का सच

Napunsakta jyotish karan के विषय में अनुभव में देखा गया है कि कई पुरुष इसे केवल शारीरिक रोग मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता में यह समस्या मानसिक, भावनात्मक और ज्योतिषीय कारणों से भी जुड़ी होती है। अनेक लोगों ने साझा किया है कि जब चिकित्सकीय सलाह के साथ-साथ ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी विषय को समझा गया, तो समस्या के प्रति स्पष्टता बढ़ी।
यह वैदिक ज्योतिष आधारित मार्गदर्शन है, अंतिम निर्णय सदैव आपका होगा।


Napunsakta Kya Hai ?

नपुंसकता एक ऐसी अवस्था है जो पुरुषों में पाई जाती है, जिसमें जननेन्द्रिय का समुचित विकास नहीं हो पाता या उसकी क्रियाशीलता प्रभावित होती है। इस कारण पुरुष संतानोत्पत्ति में असमर्थ हो सकता है।
कभी-कभी ऐसी स्थिति भी देखी जाती है, जिसमें बाहरी विकास सामान्य होता है, परन्तु बीर्य स्राव में बाधा रहती है। यह अवस्था भी नपुंसकता के अंतर्गत मानी जाती है।


शारीरिक एवं मानसिक कारण :

अधिक थकान, लगातार तनाव, चिंता, भय और मानसिक दबाव के कारण भी नपुंसकता उत्पन्न हो सकती है। यह स्थिति प्रायः अस्थायी होती है। अनुभव के आधार पर यह पाया गया है कि शुद्ध शारीरिक नपुंसकता का प्रतिशत बहुत कम होता है, जबकि अधिकांश मामलों में मानसिक कारण प्रमुख होते हैं। इसलिए मनोचिकित्सक या परामर्शदाता की सलाह अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।


नपुंसकता के ज्योतिषीय सिद्धांत

Napunsakta jyotish karan को समझने के लिए कुंडली के कुछ विशेष भाव और ग्रहों की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पंचम और सप्तम भाव का प्रभाव :

जन्म कुण्डली में यदि पंचम अथवा सप्तम भाव में पाप ग्रह स्थित हों, या इन भावों पर कठोर दृष्टि हो, तो संतान और वैवाहिक जीवन से संबंधित समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

शुक्र ग्रह का दोष

इस समस्या का सीधा संबंध शुक्र ग्रह से माना गया है। शुक्र यदि सूर्य, मंगल जैसे उग्र ग्रहों से पीड़ित हो, तो पुरुष के जीवन में यह समस्या उभर सकती है। शुक्र का कमजोर होना दाम्पत्य और शारीरिक संतुलन दोनों को प्रभावित करता है।

शनि और बुध की स्थिति

यदि सप्तम भाव में शनि और बुध एक साथ स्थित हों, या शनि की दृष्टि लग्न अथवा सप्तम भाव पर हो, तो नपुंसकता की संभावना बढ़ जाती है। कई कुंडलियों में देखा गया है कि शनि की कठोरता मानसिक अवरोध और आत्मविश्वास की कमी पैदा करती है।


ज्योतिषीय उपाय :

ज्योतिषीय दृष्टि से शुक्र ग्रह को सशक्त करना उपयोगी माना जाता है। सफेद रंग से जुड़ी वस्तुएँ, संतुलित जीवनशैली और मानसिक शांति इस दिशा में सहायक हो सकती हैं।
अनुभव के आधार पर यह भी देखा गया है कि जब व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और तनाव कम होता है, तो स्थिति में सुधार के संकेत मिलने लगते हैं।
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चिकित्सा और ज्योतिष का संतुलन

यह समझना आवश्यक है कि नपुंसकता का समाधान केवल एक ही माध्यम से संभव नहीं होता। चिकित्सा, मानसिक परामर्श और ज्योतिषीय मार्गदर्शन—तीनों का संतुलन ही व्यावहारिक और सुरक्षित मार्ग है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1. क्या नपुंसकता हमेशा स्थायी होती है?
उत्तर: नहीं, अधिकांश मामलों में यह अस्थायी होती है और मानसिक कारणों से जुड़ी रहती है।

प्रश्न 2. Napunsakta jyotish karan का मुख्य संकेत क्या है?
उत्तर: कुंडली में शुक्र ग्रह का कमजोर या दूषित होना और सप्तम भाव पर पाप ग्रहों की दृष्टि।

प्रश्न 3. क्या केवल ज्योतिष से समाधान संभव है?
उत्तर: ज्योतिष मार्गदर्शन देता है, पर चिकित्सा और मानसिक सलाह भी आवश्यक है।

प्रश्न 4. क्या तनाव कम करने से सुधार हो सकता है?
उत्तर: हाँ, तनाव कम होने पर मानसिक और शारीरिक स्थिति में सुधार देखा गया है।

प्रश्न 5. कब विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए?
उत्तर: जब समस्या लंबे समय तक बनी रहे और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करे।


यदि आप अपनी व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार सही मार्गदर्शन और संतुलित उपाय जानना चाहते हैं, तो किसी अनुभवी वैदिक ज्योतिष से सलाह अवश्य लें।


आचार्य प्रदीप कुमार
(मोब) +91-9438741641 (Call / WhatsApp)
वैदिक ज्योतिषी एवं तंत्र विशेषज्ञ
aghortantra.com
15+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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