Neech Guru Ke Upay: Kundli Ke 12 Bhav Anusar Samadhan

Neech Guru Ke Upay वैदिक ज्योतिष में अत्यंत गंभीर विषय माना जाता है, क्योंकि गुरु ग्रह जीवन में ज्ञान, धर्म, भाग्य, संतान, मार्गदर्शन और नैतिकता का प्रतिनिधित्व करता है। जब गुरु ग्रह अपनी नीच राशि मकर में स्थित हो जाता है, तब व्यक्ति के जीवन में प्रयास के बावजूद विलंब, मानसिक असंतोष और अस्थिरता देखी जाती है।

कई बार व्यक्ति परिश्रमी, ईमानदार और योग्य होने के बावजूद अपेक्षित फल प्राप्त नहीं कर पाता। इसका प्रमुख कारण कुंडली में नीच का गुरु हो सकता है। ऐसे में Neech Guru Ke Upay भाव-अनुसार किए जाएँ तो गुरु के नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक शांत किए जा सकते हैं।

Disclaimer: यह लेख वैदिक ज्योतिष सिद्धांतों पर आधारित है। सटीक फलादेश एवं उपायों हेतु व्यक्तिगत कुंडली परीक्षण आवश्यक है।


Neech Guru Ke Upay ke Lakshan

नीच गुरु होने पर सामान्यतः निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:

  • शिक्षा एवं बुद्धि में अस्थिरता

  • भाग्य का साथ न मिलना

  • संतान, विवाह या करियर में विलंब

  • गुरु, पिता या मार्गदर्शक से मतभेद

  • धार्मिक आस्था में भ्रम

  • मानसिक तनाव के साथ बाहरी सफलता

इन लक्षणों की तीव्रता गुरु के भाव, दृष्टि और दशा पर निर्भर करती है।


Neech Guru Ke Upay ke Karan

नीच गुरु के प्रमुख ज्योतिषीय कारण इस प्रकार हैं:

  • गुरु का मकर राशि में स्थित होना

  • गुरु पर शनि, राहु या केतु की अशुभ दृष्टि

  • गुरु का षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में होना

  • गुरु की अशुभ महादशा या अंतर्दशा

  • पूर्व जन्म के धर्म-विरोधी कर्म

इन कारणों से गुरु अपने शुभ फल देने में असमर्थ हो जाता है।


Neech Guru Ke Upay (Bhav Anusar Remedies)

प्रथम भाव

लग्न में नीच का गुरु शरीर में दुर्बलता, आत्मविश्वास की कमी तथा बाहरी व्यक्तियों से असंतोष उत्पन्न करता है। विद्या-बुद्धि में त्रुटिपूर्ण सफलता मिलती है।
उपाय: गाय एवं जरूरतमंदों की सेवा करें।


द्वितीय भाव

धन हानि, वाणी में असंयम के कारण पारिवारिक मतभेद तथा स्वास्थ्य में कमी होती है।
उपाय: दान दें, घर के बाहर सड़क का गड्ढा भरवाएं, सांपों को दूध पिलाएं।


तृतीय भाव

भाई-बहनों से परेशानी, पराक्रम में कमजोरी परंतु धर्म में रुचि एवं आय में वृद्धि होती है।
उपाय: मां दुर्गा की पूजा करें, कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा दें।


चतुर्थ भाव

भूमि, मकान व मातृ सुख में कमी, शत्रु पक्ष से परेशानी बढ़ती है।
उपाय: घर में मंदिर न बनवाएं, बड़ों का सम्मान करें, सांप को दूध पिलाएं।


पंचम भाव

संतान कष्ट, बुद्धि में भ्रम तथा मानसिक तनाव बढ़ता है।
उपाय: किसी से उपहार न लें, साधु व पुजारी की सेवा करें।


छठा भाव

शत्रु बाधा, शिक्षा व संतान पक्ष में कमजोरी, परंतु राज्य व व्यवसाय में सफलता।
उपाय: गुरु संबंधी वस्तुओं का दान करें, मुर्गियों को दाना डालें।


सातवां भाव

विवाह एवं व्यवसाय में बाधा, परिश्रम से सफलता।
उपाय: शिवजी की पूजा करें, पीले कपड़े में सोने का टुकड़ा साथ रखें।


आठवां भाव

आयु, स्वास्थ्य तथा गुप्त रोगों की संभावना, खर्च बढ़ता है।
उपाय: बहते जल में नारियल डालें, घी का दान करें, पीपल लगाएं।


नवम भाव

भाग्य में कमजोरी, धर्म पालन में त्रुटि एवं आय में कमी।
उपाय: प्रतिदिन मंदिर जाएं, शराब त्यागें, बहते जल में चावल बहाएं।


दशम भाव

करियर में रुकावट, पिता व राज्य पक्ष से तनाव।
उपाय: बहते जल में तांबे का सिक्का डालें, बादाम दान करें।


ग्यारहवां भाव

आमदनी में कमी परंतु संतान व विद्या में लाभ।
उपाय: सोने की चेन व तांबे का कड़ा पहनें, पीपल को जल दें।


बारहवां भाव

खर्च बढ़ना, पारिवारिक असंतोष, मानसिक अशांति।
उपाय: पीपल को जल दें, संत सेवा करें, सौंफ-पानी सिरहाने रखें।


Jyotish Drishti se Neech Guru Ke Upay

यदि नीच गुरु पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो या केंद्र-त्रिकोण में स्थित हो, तो नीचभंग राजयोग बन सकता है। ऐसे योग में सही समय पर किए गए उपाय जीवन में अचानक सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। दशा-अंतर्दशा के अनुसार उपाय बदलना अत्यंत आवश्यक है।


Neech Guru Ke Upay ke Samay Diyan Jaane Wali Galtiyan

  • बिना कुंडली जांच के रत्न धारण करना

  • गुरु उपाय के साथ तामसिक आचरण

  • अधूरे मंत्र या गलत विधि

  • गुरु, पिता या आचार्य का अपमान

इन गलतियों से उपाय निष्फल हो सकते हैं।


Conclusion

Neech Guru Ke Upay श्रद्धा, संयम और सही मार्गदर्शन के साथ किए जाएँ तो गुरु के अशुभ प्रभाव को काफी हद तक शांत किया जा सकता है। भाव-अनुसार उपाय, धर्मपालन और सेवा-भाव—यही नीच गुरु से मुक्ति का वास्तविक मार्ग है।


FAQs

Q1. क्या नीच गुरु हमेशा अशुभ फल देता है?
नहीं, नीचभंग योग होने पर शुभ फल भी देता है।

Q2. नीच गुरु के उपाय कब असर दिखाते हैं?
दशा-अंतर्दशा के अनुसार 3–6 महीनों में।

Q3. क्या गुरु रत्न पहनना जरूरी है?
बिना कुंडली परीक्षण के नहीं।

Q4. क्या दान सबसे प्रभावी उपाय है?
हाँ, विशेषकर पीली वस्तुओं का दान।

Q5. क्या नीच गुरु विवाह में देरी करता है?
सप्तम और नवम भाव में होने पर हाँ।


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Acharya Pradip Kumar
Vedic Astrologer & Tantra Expert
aghortantra.com | 15+ वर्षों का अनुभव

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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