Pootana Grah Shanti Puja At Home: 12 दिनों की राशिनुसार और तांत्रिक विधियां
नमस्कार मेरे भाइयों और बहनों! जय माँ कामाख्या। स्वागत है आपका अपने मंच पर। मैं आपका अपना आचार्य प्रदीप कुमार, पिछले कई सालों के अनुभव के बाद आज एक ऐसी बात आपके सामने जनकल्याण हेतु खोलने जा रहा हूँ, जो कोई साधारण बात नहीं है। यह हमारे जीवन की वो कड़वी सच्चाई है जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
हमारे जीवन में अक्सर यह समस्या आती है—0 से 12 साल के बच्चों का बार-बार बीमार हो जाना। साधारणतः चिकित्सा करवाने से बच्चा ठीक हो जाता है, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि बहुत ज्यादा इलाज और महंगी दवाइयों के बावजूद बच्चा ठीक नहीं होता या दवा उस पर असर ही नहीं करती। मेरा उद्देश्य चिकित्सा प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह उठाना नहीं है; हमारे भी बच्चे जब बीमार होते हैं, तो हम डॉक्टरों के पास जाते हैं। लेकिन उसके बावजूद जब दवा न लगे, तो समझ लीजिए कि मामला ‘बाल ग्रह’ का है। बिना देर किए Pootana Grah Shanti के उपाय करने चाहिए ताकि किसी मासूम के प्राणों की रक्षा हो सके।
ये उपाय विद्वान ब्राह्मणों द्वारा तब से करवाए जा रहे हैं जब आधुनिक चिकित्सा इतनी विस्तृत नहीं थी, और आज भी इनका प्रभाव उतना ही अचूक है।
मेरी आँखों देखी ‘सच्चा चमत्कार’
बात करीब 3 साल पुरानी है। Cuttack (Goli Sahi) के Madhav Mohanty नाम से परिचित वो आदमी मेरे पास आये थे। उनका 5 साल का बेटा (राहुल) अचानक ‘सूखने’ लगा था। बच्चा रात भर रोता, उसकी मुट्ठियां बंद रहतीं और शरीर से एक अजीब सी दुर्गंध आती थी। बड़े-बड़े डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे।
जब मैंने बच्चे की स्थिति देखी और गणना की, तो पाया कि उसे ‘शुष्क रेवती’ नामक पूतना ने ग्रसित है। मैंने उन्हें Pootana Grah Shanti Puja At Home की पूरी विधि बताई। इसके तुरंत बाद उनके घर की पास महानदी है। वंहा से मिट्टी Collection करके , उसी मिट्टी से पुतला बनाया गया। और विशेष धूनी और मंत्रों का जाप शुरू हुआ। विश्वास मानिए, 7वें दिन की बलि के बाद बच्चे के चेहरे पर रौनक लौटने लगी और 12वें दिन तक वह पूरी तरह स्वस्थ होकर खेलने लगा। यह है हमारे प्राचीन तंत्र की शक्ति!
Pootana Grah Shanti Puja: कारण, लक्षण और गहरा रहस्य
अब बात करते हैं इसके पीछे के कारण की। आखिर क्यों यह समस्या होती है? 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पूतना (Putana) नाम की राक्षसी तब ग्रसित करती है जब:
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बच्चे को बहुत मैले बिछौने पर या अकेले सुनसान जगह पर छोड़ दिया जाए।
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जब बच्चा बैठे-बैठे गिर पड़े या अचानक मूर्छा (Behosh) आ जाए, तो जानो उसे महा पूतना ने ग्रसा है।
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यदि कोई लोभ में आकर वनदेवता या नाग देवता का तिरस्कार कर दे।
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अशुद्ध अवस्था (बिना स्नान किए) में बच्चे को छूने से ‘बालक्रांता’ दोष होता है।
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शाम के समय इत्र लगाकर बाहर जाने से ‘रेवती’ दोष लगता है।
मुख्य लक्षण जिन्हें पहचानना ज़रूरी है:
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नाखून और दांतों में विकार, दांत पीसना, नींद न आना।
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शरीर से दुर्गंध उठना, आंख मीचना, शरीर को ऐंठना और बार-बार रुदन (रोना)।
विशेष तांत्रिक उबटन और महा-सुरक्षा मंत्र
यदि बालक के ग्रह शांत करने हों, तो यह उबटन रामबाण है: उबटन में: दूर्वा, कुटकी, नीम के पत्ते और तज का उबटन बनाकर शरीर पर मलें। बाद में पीपल और लिसोड़े के पत्तों के काढ़े से स्नान कराएं।
मंत्र: “ॐ हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वंनेनापूर्य या जगत । सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव।।” इसका जाप करें और मंदिर में पीतल की घंटी बांधें, बच्चों को तुरंत लाभ होगा।
Pootana Afflictions: 12 दिनों की राशिनुसार और तांत्रिक विधियां
1. योगिनी पूतना (पहला दिन/मास/वर्ष):
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लक्षण: हीनज्वर, गात्रशोथ, वमन, उदरपीड़ा।
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बलि: नदी की मिट्टी से मूर्ति बनाएं। सफेद चावल, सफेद फूल, 5 दीपक, 5 सफेद ध्वजा लेकर सुबह पूर्व दिशा में चौराहे पर 3 दिन बलि दें।
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धूनी: सरसों, बालछड़, आक, बिल्वपत्र, काले तिल, मनुष्य के केश, नीम और घी।
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मंत्र: “ॐ नमो भक्त वत्सले मोचिनी स्वाहा।”
2. सुनंदना पूतना (दूसरा दिन):
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लक्षण: मंद ज्वर, हाथ-पांव सिकोड़ना, दांत पीसना, रुदन।
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बलि: सवा सेर चावल के आटे का स्त्री पुतला। पश्चिम दिशा में शाम को 3 दिन बलि दें (भुनी मछली, बकरे का मांस, 13 दीपक)।
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मंत्र: “ॐ नमो भगवती स्वाहा।”
3. अनामना पूतना (तीसरा दिन):
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लक्षण: तेज़ ज्वर, भूख न लगना, शरीर का कांपना, बार-बार उल्टी।
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बलि: सवा सेर चावल के आटे का स्त्री पुतला। पश्चिम दिशा में लाल चावल, 10 लाल ध्वजा, 10 गेहूं के पुड़े के साथ वृक्ष के नीचे बलि दें।
4. मुखमुंडिका पूतना (चौथा दिन):
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लक्षण: सिर को आगे-पीछे गिराना, भोजन न करना, नींद में चिल्लाना।
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बलि: सवा सेर तिल के चूर्ण की पीठी से स्त्री प्रतिमा। पश्चिम दिशा में 5 सफेद फूल, 5 दीपक, सवा सेर भात के साथ बलि दें।
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धूनी: लहसुन, गाय का सींग, सांप की केंचुली, बिल्ली के बाल और घी।
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मंत्र: “ॐ नमो पूतने मातवीर्रलि भक्ष सुशोभने बलकमुंच सुयोगेन बलिदाने महर्षयेत।”
5. विडालिका पूतना (पांचवां दिन):
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लक्षण: देह पीड़ा, अरुचि, गर्दन झुकाना।
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बलि: सवा सेर चावल के आटे का पुतला। पश्चिम दिशा में 5 पूरियां, सफेद चंदन, 5 सफेद पुष्प और दीपकों के साथ 3 दिन बलि दें।
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मंत्र: “ॐ सुभगे सुभलेदेवि सर्व शत्रुनिवारिणी वुलरू शांति शिशो: स्वथ्यं जीव दानेन राक्षसि।”
6. शकुनि या षटकारिका (छठा दिन):
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लक्षण: ज्वर, कांपना, बार-बार रुदन, अचानक गिर जाना।
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बलि: नदी/नहर के दोनों किनारों की मिट्टी का पुतला। काले रंग के 5 ध्वजा, काले फूल, मछली और बकरे का मांस, खीर और पुए। पश्चिम दिशा में दोपहर में बलि दें।
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धूनी: कुठ, गूगल, राई, हाथी दांत, घी और सफेद चंदन।
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मंत्र: “ॐ राक्षसि त्व महाभागे बालमुंच शुभानने क्षेमं कुरु जगत्थयासिमन शोभावान शिशूं कुरू।”
7. शुष्क रेवती (सातवां दिन):
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लक्षण: आँखों का मीचना, सिर पीड़ा, सूखा रोग।
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बलि: सवा सेर चावल के आटे का पुतला। सफेद चंदन, 5 सफेद फूल, 5 दीपक। उबले चावल, 5 मिठाई, 7 पूरियां। पश्चिम दिशा में मौन रहकर बलि दें।
8. विडालिका पूतना (आठवां दिन):
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लक्षण: अफारा, उल्टी-दस्त, उदर पीड़ा।
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बलि: सवा सेर चावल के आटे का स्त्री पुतला। दक्षिण दिशा में 3 दिन बलि दें। रक्त चंदन, 5 रंग की मिठाई, 5 रंग की झंडी, 5 दीपक, गेहूं की रोटी, मसूर दाल और बकरे का मांस।
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मंत्र: “ॐ नमो सर्व भूतेशी शोभने त्वम पिशाचिनी।”
9. मदना पूतना (नौवां दिन):
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लक्षण: कंपन, मुट्ठी बंद करके रोना, खड़े-खड़े गिरना।
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बलि: एक सेर गेहूं के आटे का पुतला। उत्तर दिशा में भोर (सुबह) में बलि दें। 25 लाल पुष्प, 25 लाल झंडी, 25 दिए, मछली मांस और 25 गन्ने के टुकड़े।
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मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय हुँ फट्।”
10. रेवती पूतना (दसवां दिन):
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लक्षण: श्वास रोग, वमन, पेट दर्द।
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बलि: सवा सेर गेहूं के आटे का पुतला। दक्षिण दिशा में चौराहे पर शाम को बलि दें। 25 लाल पुष्प, 25 लाल झंडी, 25 दीपक, गुड़-घी में भुने चावल।
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मंत्र: “ॐ नमो भगवते वैश्वदेवाय हन हुँ फट स्वाहा।”
11. सुदर्शना पूतना (ग्यारहवां दिन):
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लक्षण: मुख शोथ (मुंह की सूजन), गात्र पीड़ा, रोधन।
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बलि: सवा सेर काले उड़द के आटे का पुतला। 25 सफेद फूल, 25 सफेद ध्वजा, 25 दीपक, 25 पुड़े और उबले चावल। दक्षिण दिशा में 3 दिन शाम को बलि दें।
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धूनी: गोमूत्र, लहसुन, नीम, सांप की केंचुली, बिल्ली-मनुष्य के बाल और घी।
12. अदभुता पूतना (बारहवां दिन):
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लक्षण: पसीना आना, आँख दुखना, बहुत ज्यादा कष्ट।
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बलि: एक सेर चावल के आटे का पुतला। दक्षिण दिशा में सायंकाल बलि दें। Pootana Grah Shanti पूजा में 13 दीपक, 13 सफेद झंडी, 13 पुड़े, मछली और बकरे का मांस जरुर रखना।
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मंत्र: “ॐ नमो नारायण प्रज्वल प्रज्वल ताल हर हर शोषय शोषय मर्दय मर्दय हन हन दुष्टआत्मान हुँ फट् स्वाहा।”
बलिदान विधि और अंतिम शांति प्रक्रिया
Pootana Grah Shanti पूजा में बलिदान विधि 3 दिन निरंतर करें। चौथे दिन पलाश, पीपल, विल्व, गूलर के पत्तों को उबालकर बालक को स्नान कराएं। इसके बाद भिखारी और कुत्तों को मीठा भोजन कराएं।
अंतिम रक्षा मंत्र: “ॐ रक्ष रक्ष महादेव नीलग्रीव जटाधर गृहासतु सहितो रक्ष मुन्च मुन्च कुमारकम ॐ सर्व मातर इमं ग्रहं संहरंतु हुँ रोदय रोदय स्फ़ोटय स्फ़ोटय स्वहा।गर्ज गर्ज सः गृहाण गृहाण आमर्दय आमर्दय ह्रीं ह्रीं हन हन एवं सिद्धि रुद्रो ज्ञापय स्वाहा।”
मेरे भाइयों, बच्चों की रक्षा के साथ-साथ आज के समय में बड़ों को भी ‘अदृश्य वायरस’ से बचाना ज़रूरी है। जैसे बच्चों के लिए पूतना दोष घातक है, वैसे ही आजकल फैल रहे घातक संक्रमणों से बचने के लिए भी ज्योतिष में अचूक उपाय है। अपनी और अपने परिवार की ‘Immunity’ बढ़ाने के लिए Nipah Virus Upay का यह लेख ज़रूर पढ़ें।
Pootana Grah Shanti – आपके मन की शंकाएं और समाधान
प्रश्न 1: आचार्य जी, क्या Pootana Grah Shanti के ये तांत्रिक उपाय डॉक्टर की दवा के साथ किए जा सकते हैं?
उत्तर: बिल्कुल भाई! देखिए, डॉक्टर शरीर का इलाज करता है और ज्योतिष ‘प्राणों’ की रक्षा करता है। दवा अपना काम करेगी, लेकिन जब ग्रहों की बाधा (Pootana Shadow) दवा को शरीर पर लगने ही नहीं देती, तब ये प्राचीन उपाय दवा के लिए रास्ता साफ़ करते हैं। आप बेझिझक दोनों उपाय एक साथ कर सकते हैं।
प्रश्न 2: अगर बच्चा रात में अचानक चौंक कर रोने लगे, तो क्या यह किसी ग्रह का दोष है?
उत्तर: हाँ, तंत्र शास्त्र के अनुसार अगर बच्चा गहरी नींद से चिल्लाते हुए उठे या उसकी मुट्ठियां खिंची रहें, तो इसे ‘बाल-ग्रह’ का प्रभाव माना जाता है। ऐसे समय में बच्चे के सिरहाने ‘भीमसेनी कपूर’ और ‘पीली सरसों’ रखकर तुरंत रक्षा मंत्र का जाप शुरू कर देना चाहिए।
प्रश्न 3: क्या यह पूजन विधि घर पर (At Home) करना सुरक्षित है या किसी विद्वान ब्राह्मण की ही ज़रूरत है?
उत्तर: देखिए, अगर आप मंत्रों का शुद्ध उच्चारण कर सकते हैं और दिशाओं का ज्ञान रखते हैं, तो आप इसे खुद भी कर सकते हैं। लेकिन अगर समस्या पुरानी है या बच्चा बहुत ज्यादा कमजोर हो गया है, तो किसी अनुभवी ज्योतिषी के मार्गदर्शन में ही यह विधि पूरी करनी चाहिए।
प्रश्न 4: बलि और धूनी की सामग्री में ‘बिल्ली के बाल’ या ‘सांप की केंचुली’ का क्या महत्व है?
उत्तर: यह बहुत गहरा तांत्रिक रहस्य है। कुछ नकारात्मक ऊर्जाएं (राक्षसी शक्तियां) विशिष्ट गंध और तत्वों से ही शांत होती हैं। ये सामग्रियां वातावरण के उस ‘Negative Vibration’ को खींच लेती हैं और बच्चे के आसपास एक सुरक्षा कवच बना देती हैं।
प्रश्न 5: क्या इन उपायों को बीच में छोड़ने से कोई नुकसान हो सकता है?
उत्तर: मेरा सुझाव है कि जो भी विधि शुरू करें, उसे पूरे 3 या 12 दिन (जैसा बताया गया है) तक श्रद्धा से पूरा करें। बीच में Pootana Grah Shanti पूजा अधूरा छोड़ने से संकल्प टूट जाता है। माँ कामाख्या पर भरोसा रखें और नियम का पालन करें, लाभ ज़रूर होगा।
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जय माँ कामाख्या