Stri Jatak Ki Kundli Mein Chandra Ka Phaladesh: Lagna Aur Rashi Anusar Purn Fal

Stri Jatak ki Kundli Mein Chandra ka Phaladesh ज्योतिष शास्त्र का एक महत्वपूर्ण विषय है ,जिसमे चन्द्रमा की राशी और त्रिन्शंश के आधार पर स्त्री के स्वाभाव , चरित्र और जीवन के गुणों का वर्णन किया जाता है ।इस लेख में हम शास्त्रीय ग्रंथों के आधार पर चन्द्रमा के विविध योगों का स्पष्ट फल समझेंगे।

Stri Jatak ki Kundli Mein Chandra ka Phaladesh Rashi ke Anusar :

ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार Stri Jatak ki Kundli Mein Chandra ka Phaladesh स्त्री के मानशिक स्तर, व्यवहार और संबंधों पर गेहरा प्रभाव डालता है ,जो राशी और त्रिन्शंश के बदलाव के साथ परिवर्तित होता रहता है।

Mesh aur Vrishchik Rashi Mein Chandra ka Phal :

स्त्री जातक की जन्म कुण्डली में चन्द्रमा की स्थिति यदि मेष अथवा वृश्चिक राशि में स्थित हो एवं मंगल के त्रिंशांश में भी स्थित हो तो, ऐसी स्त्री दुष्ट प्रवृत्ति की होती है। चन्द्रमा यदि मेष अथवा वृश्चिक राशि में स्थित हो एवं बुध के त्रिंशांश में भी स्थित हो तो, ऐसी स्त्री दासी होती है, गुरू के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री सुशील एवं धनी होती है, बुध के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री मायाविनी होती है एवं शुक्र के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री चरित्र दोष से युक्त होती है ।

Vrish aur Tula Rashi Mein Chandra ka Phal :

स्त्री जातक की जन्म कुण्डली में चन्द्रमा यदि वृष अथवा तुला राशि में स्थित हो एवं मंगल के त्रिंशांश में भी स्थित हो तो, ऐसी स्त्री छल कपट युक्त होती है, शुक्र के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री बांझ होती है, गुरू के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री साध्वी प्रवृत्ति की होती है, बुध के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री गुणवती होती है एवं शुक्र के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री सदैव भोग विलास के लिए उत्सुक रहती है ।

Kark Rashi Mein Chandra ka Phal :

स्त्री जातक की जन्म कुण्डली में चन्द्रमा यदि कर्क राशि में स्थित हो एवं मंगल के त्रिंशांश में भी स्थित हो तो, ऐसी स्त्री स्वच्छंदा होती है, शनि के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री पति को हानि पहुंचाने वाली होती है, गुरू के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री विशिष्ट गुणों से युक्त होती है, बुध के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री शिल्पकला में प्रवीण होती है एवं शुक्र के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री उत्तम आचरण वाली होती है ।

Dhanu aur Meen Rashi Mein Chandra ka Phal :

स्त्री जातक की जन्म कुण्डली में चन्द्रमा की स्थिति यदि धनु अथवा मीन राशि में स्थित हो एवं मंगल के त्रिंशांश में भी स्थित हो तो, ऐसी स्त्री अत्यंत गुणवती होती है, शनि के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री संभोग की कम इच्छा रखने वाली होती है, गुरु के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री गुणवान होती है, बुध के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री कला में कुशल होती है एवं शुक्र के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री सच्चरित्रा होती है ।

Makar aur Kumbh Rashi Mein Chandra ka Phal

स्त्री जातक की जन्म कुण्डली में चन्द्रमा की स्थिति यदि मकर अथवा कुंभ राशि में स्थित हो एवं मकर के त्रिंशांश में भी स्थित हो तो, ऐसी स्त्री दासी प्रवृत्ति की होती है, शनि के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री अन्य पुरुष में आसक्त होती है, गुरु के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री पति को अपने अधीन रखने वाली होती है, बुध के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री असती होती है एवं शुक्र के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री निःसंतान एवं दरिद्रा होती है ।

Singh Rashi Mein Chandra ka Phal :

स्त्री जातक की जन्म कुण्डली में चन्द्रमा की स्थिति यदि सिंह राशि में स्थित हो एवं मंगल के त्रिंशांश में भी स्थित हो तो, ऐसी स्त्री दुष्टा होती है, शनि के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री आचरणहीन होती है, गुरू के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री किसी रजवाड़े के स्वामी या किसी जमींदार आदि की पत्नी होती है, बुध के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री स्त्रियोचित चेष्टा के विरूद्ध पुरषों की तरह आचरण करने वाली होती है एवं शुक्र के त्रिंशांश में स्थित होने पर सम्बंधित स्त्री पति के अतिरिक्त अन्य पुरूष से भी रति सम्बन्ध रखने वाली होती है ।

Nishkarsh :

इस प्रकार Stri Jatak ki Kundli Mein Chandra ka Phaladesh का अध्ययन स्त्री के जीवन के गुण -दोष समझने में सहायक होता है ।

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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार (Mob) +91-9438741641 (call/ whatsapp)

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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