Videsh Yatra Yog Kab Banta Hai: Kundali Me Safal Settlement Ke Sanket

Videsh Yatra Yog: Kundli Me Videsh Jane Ke Pakke Sanket

Videsh Yatra Yog अक्सर उन जातकों की कुंडली में दिखाई देता है, जिनके जीवन में जन्मभूमि से दूर जाकर नए अवसर प्राप्त करने की प्रबल संभावना होती है। अनुभव में देखा गया है कि कई लोगों ने साझा किया है कि जब उनके जीवन में अचानक विदेश से अवसर मिला, तब कुंडली में बारहवें भाव और लग्नेश के विशेष संबंध सक्रिय थे।

यह वैदिक ज्योतिष आधारित मार्गदर्शन है, अंतिम निर्णय हमेशा आपका होगा। आज के आधुनिक समय में अधिकांश लोग बेहतर करियर, उच्च आय, या व्यवसाय विस्तार के लिए विदेश जाना चाहते हैं। परंतु केवल इच्छा पर्याप्त नहीं होती — कुंडली के विशिष्ट भाव, ग्रहों की स्थिति और दशा-महादशा का समन्वय आवश्यक होता है।

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Videsh Yatra Yog – 4th House Ki Bhoomika

कुंडली का चौथा भाव मातृभूमि, स्थिरता और गृह सुख का कारक माना जाता है। यदि यह भाव पीड़ित हो या व्यय भाव (बारहवाँ) उससे अधिक बलवान हो जाए, तो जातक में जन्मस्थान छोड़ने की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है।

क्लाइंट्स की कुंडली में देखा गया है कि जब चतुर्थ भाव पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो और साथ ही बारहवाँ भाव मजबूत हो, तब विदेश जाने के अवसर अधिक प्रबल होते हैं।


3rd, 9th Aur 12th House Ka Sambandh

विदेश यात्रा को समझने के लिए तीन भाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

तृतीय भाव – छोटी यात्राएँ, निकट दूरी।
नवम भाव – भाग्य और लंबी दूरी की यात्राएँ।
बारहवाँ भाव – विदेश, व्यय, दूरस्थ भूमि, विदेशी संपर्क।

बारहवाँ भाव विशेष रूप से विदेशी निवास का द्योतक है। जब तृतीयेश, नवमेश या व्ययेश का संबंध लग्न या लग्नेश से बनता है, तब विदेश यात्रा के योग सक्रिय हो सकते हैं।

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Lagna, Lagnesh Aur Vyayesh Ka Role

लग्न और लग्नेश व्यक्ति की मूल दिशा निर्धारित करते हैं। यदि:

  • व्ययेश लग्न में हो

  • लग्नेश बारहवें भाव में हो

  • व्ययेश का संबंध दशमेश से बने

  • व्ययेश का संबंध लाभेश (ग्यारहवें भाव के स्वामी) से बने तो विदेश में नौकरी, व्यापार या आय के योग बन सकते हैं।

विशेष रूप से Career Astrology के संदर्भ में देखा गया है कि जब दशम भाव भी इस संयोजन से जुड़ता है, तब व्यक्ति विदेश में कार्यक्षेत्र स्थापित कर सकता है।

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Videsh Mein Vyavsay Ke Sanket

यदि व्ययेश और दशमेश का परस्पर संबंध हो, या बारहवाँ भाव बलवान होकर कर्म भाव से जुड़ जाए, तो जातक विदेशी कंपनियों, आयात-निर्यात, या अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ सकता है। ऐसे योग foreign settlement jyotish में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

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Foreign Settlement Ke Yog

सिर्फ यात्रा योग पर्याप्त नहीं होता। स्थायी बसावट के लिए:

  • व्यय भाव चतुर्थ भाव से अधिक बलवान हो

  • चतुर्थ भाव पीड़ित हो

  • नवम भाव और भाग्येश मजबूत हों

  • अनुकूल दशा-महादशा सक्रिय हो , तब अनुभव के आधार पर कहा जा सकता है कि बिना भाग्येश के सहयोग के विदेश में स्थायित्व कठिन हो जाता है।

शास्त्रीय संदर्भ हेतु आप बृहत पाराशर होरा शास्त्र ( Brihat Parashara Hora Shastra) जैसे प्रामाणिक ग्रंथों का अध्ययन कर सकते हैं।

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Dasha-Mahadasha Ka Prabhav

कई बार योग होने के बावजूद फल देर से मिलता है। कारण — सही ग्रह दशा का अभाव।

यदि उस ग्रह की दशा चल रही हो जो बारहवें, नवम या दशम भाव से संबंधित हो, तब विदेश से जुड़ा प्रयास शीघ्र सफल हो सकता है। इसलिए केवल आप योग देखकर निर्णय न लें — सम्पूर्ण Kundali Analysis करके आगे बढे ।

क्यूँ ना इसे बहत Clients मेरे नजर में हैं , जो आज के समय में विदेश में उनका टाइम बहत मुश्किल से काट रहे हैं । यह में नही चाहता हूँ …वो आपके साथ हो । इसे कुछी ही साल की बात है, ओडिशा का एक आदमी थे जो पिछले 5 सालों से USA जाने की कोशिस कर रहे हैं , लेकिन हर बार उनका VISA Reject हो रहा है । जब मेने उनके कुंडली देखीं , तो पाया उनकी कुंडली की 12 th House Active था और साथ साथ 4th House का स्वामी भी उतना ही Powerful था। जो उन्हें अपने जन्म स्थान से दूर नही होने दे रहा था ।मैंने उनको बोला , जब तक 4th House का स्वामी कमजोर ना होगा तबतक आप USA जा नही सकते हो । और कुछ उपाय बताया था जिसको करने से 3/4 महीने में उनका visa प्राप्त हुआ और आजके समय में वो USA में service कर रहे हैं और अच्छा ख़ासा कमाई भी कर रहे हैं।


Key Precautions :

  • केवल चौथा भाव पीड़ित देखकर निष्कर्ष न निकालें।

  • ग्रहों की शक्ति (बल), दृष्टि और युति अवश्य देखें।

  • दशा और गोचर का सामंजस्य आवश्यक है।

  • विदेश जाना हमेशा स्थायी सफलता की गारंटी नहीं देता। संतुलित निर्णय ही सर्वोत्तम होता है।


FAQs – Videsh Yatra Yog

1. क्या केवल बारहवाँ भाव मजबूत होने से विदेश जाना तय हो जाता है?
नहीं। अन्य भावों और दशा का समर्थन भी आवश्यक होता है।

2. Videsh Yatra Yog होने पर कितने समय में फल मिलता है?
फल ग्रह दशा, गोचर और व्यक्तिगत प्रयास पर निर्भर करता है।

3. क्या विदेश में व्यवसाय के लिए अलग योग चाहिए?
हाँ। दशम भाव और व्यय भाव का संबंध महत्वपूर्ण होता है।

4. क्या चौथा भाव कमजोर होना अनिवार्य है?
स्थायी बसावट के लिए अक्सर ऐसा देखा गया है, पर हर कुंडली अलग होती है।

5. क्या बिना योग के भी विदेश जाया जा सकता है?
संभावना कम होती है, परन्तु कर्म और परिस्थिति भी भूमिका निभाते हैं।


निष्कर्ष : विदेश जाने का निर्णय केवल आकर्षण के आधार पर नहीं, बल्कि गहन ज्योतिषीय विश्लेषण के आधार पर होना चाहिए। जब लग्न, व्यय भाव, भाग्य भाव और दशम भाव समन्वित रूप से सक्रिय हों, तब विदेश में सफलता की संभावना प्रबल होती है।

यदि आप अपनी व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार सटीक Videsh Yatra Yog के ऊपर मार्गदर्शन चाहते हैं, तो किसी अनुभवी वैदिक ज्योतिष से परामर्श अवश्य लें।


Acharya Pradip Kumar
(Mob) +91- 9438741641 (Call/ Whatsapp)
Vedic Astrologer & Tantra Expert
15+ years practical experience

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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