मंत्र – ओम गांब के पछिम पीपर के गाछ ,ताहि चढि काली करे हाँक ।नगन में पूजै चक्र, महा-मांस भखै ।आपन जियाबे, पराया खाय ।एनैकर दीठ, ओने कर पीठ ।बायें चारों काली ।सत्य छोड असत्य भाखै, असिया कोट नरक में परइ ।सत्य प्रत्यख्य ।।
बिधि : चार मुख का दीपक, गेहूँ के पिसान (आटे) की रोटी, सिन्दूर, काजल,चोटी,टिकुली,डिबिया, 11 लाल चूडी,मांस, मद्द,मछ्ली, कंघी, छोटा शीशा, पंचमेबा, बरा-दही, पूरी-गुड, गुलगुला, लाल फूल की माला, लाल घुंघुची, गुग्ग्ल, कपूर, धूपबती, गोल चौका, अबीर – यह सभी सामान सामने रखकर 21 दिन रत्रि में उक्त मंत्र का यथा-सम्भब जप करें। एक बार हबिष्यान्न भोजन करें। मंगलबार अमाबस्या की रात्रि से जप का प्रारम्भ करें, तो 21 बे दिन आकाशबाणी के द्वरा कार्य-सिद्धि की सुचना मिलेगी। जप रात्रि में 8 बजे से प्रात: 4 बजे तक करें।