महायक्षिणी साधना कैसे करें ?

महायक्षिणी साधना कैसे करें ?

महायक्षिणी यक्षलोक की बासिनी और भोग ऐश्वर्य से सम्बन्ध रखने बाली देबियां हैं । ये लोग जलों और धनों की रक्षा करते हैं ।

इनके राजा धनाधिपति भगबान कुबेर हैं जो अपनी अमराबती के समान समृद्ध राजधानी अलकापुरी में निबास करते हैं । बहाँ करोडों यक्षो का निबास माना गया है ।

प्रभाब : यक्षिणियां सिद्ध होने पर साधक के लिए अपनी जान तक संकट में डालकर कार्यसिद्ध करती हैं लेकिन साधक भी अनकी निष्ठा से पूरी सेबा करे । मृत्यु के उपरान्त साधक यक्षलोक जाकर उसी यक्षिणी के साथ निबास करता है । साधक साधना काल में पान न खाये ।

महायक्षिणी मंत्र : ॐ ऐं ह्रीं श्रीं महायक्षिणी सबैश्वर्यं कुरूते नम: ।।

अनुष्ठान : महायक्षिणी की साधना रात्रि में बेल के बृक्ष पर बैठकर की जाती है १०००० जप किया जाता है, नित्य मांस और मदिरा साथ रखनी पडती है । बह बहुत भय देती है । परन्तु डरना नहीं चाहिए । गुग्गुल धूप देय । एक मास पूरा होने पर महायक्षिणी कृपा करती है । भय न करे, अनुष्ठान पूर्ण होते ही यक्षिणी धन, मान, कार्य सिद्धि करने लगती हैं ।

प्रभाब : यक्षिणी साधक को बल, धन, मान, राज्य आदि प्राप्त होता है किन्तु यक्षिणी साधक का बंश पुत्ररूप में प्राय: कम ही चलता है । पुत्री शाखा भले ही चलती रहे पर उसे भी कष्ट होता है ।

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