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शत्रु उच्चाटन प्रयोग क्या है?
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शाबर शत्रुस्तम्भिनि प्रयोगों :
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शत्रु से छुटकारा :

शत्रु से छुटकारा पाने के उपाय :

शत्रु से छुटकारा एक सामान्य प्रयोग के जरिए भी बार-बार परेशान करने वाले शत्रु भी परास्त हो जाते है । खासकर सहकर्मियों या सहयोगियों के कारण आने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है, तो इसके द्वारा खुद की गई भूलों को भी सुधारा जा सकता है । यह शत्रु से छुटकारा उपाय मंगलवार या शनिवार को भौरव जी के मंदिर में उनके सामने किया जाता है । भैरव जी के सामने चैमुखा दीपक जलाएं। इससे पहले उसकी चारों बत्तियों को रोली से रंग लें । उसके बाद शत्रु का नाम लेकर दीपक के तेल में एक चुटकी पीली सरसों कुछ दाने डालकर नीचे दिए गए ध्यान के श्लोक का 21 बार पाठ करें । इस प्रक्रिया के पूर्ण होने पर दीपक के तेल में एक चुटकी लाल सिंदूर डालें । मुंह में एक लौंग रखें और एक लौंग हाथ में लेकर शत्रु का स्मरण करते हुए निम्नलिखित मंत्र का 21 बार जाप करें । इस तरह से पांच लौंग के साथ जाप करें। लौंग का ऊपरी हिस्सा तेल में डाल दें और बाकी का भाग जमीन में दबा देें ।
ध्यान करने के श्लोकः
ध्यायेन्नीलाद्रिकांतम शशिश्कलधरम्, मुण्डमालं महेशम्।
दिग्वस्त्रं पिंगकेशं डमरुमथ सृणिं, खडगपाशाभयानि।
नागं घण्टाकपालं करसरसिरु है, र्बिभ्रतं भीमद्रष्टम्।
दिव्यकल्पम त्रिनेत्रं मणिमयमिलसद, किंकिणी नुपुराढ्यम्।
शत्रु से छुटकारा केलिए जप मंत्रः {{ ऊँ ह्रीं भैरवाय वं वं वं ह्रां क्ष्रौं नमः! }}
 
इस शत्रु से छुटकारा साधना को दक्षिण दिशा की ओर मुखकर करना चाहिए तथा इसे शनि मंदिर में भी किया जा सकता है । पूरा शत्रु से छुटकारा अनुष्ठान खत्म होने के बाद दीपक को आधी रात को किसी चैराहे पर रख दें । इस दौरान किसी की नजर नहीं पड़नी चाहिए । यदि इस शत्रु से छुटकारा प्रयोग से एकबार में शत्रु शांत नहीं हो पाता है तो इसे पांच बार करने से लाभ मिलता है ।

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जय माँ कामाख्या

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