कुंडली में दुख योग और उसके उपाय क्या है ?

कुण्डली में दुःख योग को बर्णना किया जाए तो , गीता के अनुसार व्यक्ति दुख भाव में रहे, तो यह योग की स्थिति है । मेरा मानना है कि जीवन दुख है, दुख का कारण है, दुख दूर होने की संभावना है । दुख दूर करने का उपाय सेवा और अध्यात्म का मार्ग है । यदि आप दुख महसूस कर रहे हैं तो हो सकता है कि आपके लाख अच्छे प्रयास के बावजूद आप सुख हासिल करने में सफलता प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं ।उसकी वजह ग्रहों का असंतुलन भी हो सकता है । ऐसे लोग जिन्होंने पूरा समय समाज और दीन दुखियों की मदद में लगा दिया लेकिन उसके बावजूद उनके जीवन में हमेशा दुख रहा है । ऐसे लोगों कि कुंडली में जो दु:ख योग बना है उसके कारण वह जीवन में सुख हासिल नहीं कर पाए कुछ ऐसे छोटे उपाय हैं, जिनके माध्यम से हम कुंडली में दुख योग जो कुंडली में बना है उसे खत्म कर सकते हैं वैसे तो दुख का स्मरण करने वाला दुखी रहता है और सुख का स्मरण करने वाला सुखी रहता है । यह क्रांतिकारी बात है आपको यह समझना पड़ेगा सबसे पहले सकारात्मक सोच के साथ आप की शुरुआत होना चाहिए।

आइए जानते हैं कैसे बनता है कुंडली में दुख योग-

कुंडली में दुख योग चौथे स्थान का स्वामी पापग्रह से युक्त हो । चौथे घर मे नीच का सूर्य व मंगल हो । आठवें घर का स्वामी ११वें भाव मे हो । लग्न मे पापग्रह के बीच मे हो । लग्न मे शनि, आठवें स्थान पर राहु तथा छठे स्थान पर मंगल हो । चन्द्रमा पापग्रहों के बीच मे हो । लग्न का स्वामी १२वें स्थान पर, दसवे स्थान पर पापग्रह और किसी भी घर मे चन्द्रमा तथा सूर्य साथ मे बैठे हो ।

कुंडली में दुख योग खत्म करने के उपाय-

प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती स्थित देवी कवच का पाठ करें। इस उपाय से कुंडली में दुख योग धीरे धीरे समाप्त होकर जीबन में सुख शांति प्रारंभ होना शुरू हो जाएगा
प्रतिदिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें ।
ब्लाइंड बच्चों की सेवा करें उन्हें भोजन का दान करें ।
जल का दान उपयोग को समाप्त करने में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है जल सेवा करें ।
सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय प्रार्थना करें कि मैं एक सर्वश्रेष्ठ आत्मा हूं, मेरा जीवन लोगों की सेवा के लिए बना है, मेरे जीवन में बहुत खुशियां हैं।सुख, शांति और समृद्धि है।
माता पिता एवं बुजुर्गों की सेवा करें ।
गरीब असहाय लोगों को बीमारी में सेवा कर मदद करें ।
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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार -9438741641 (call/ whatsapp)

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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