Nabhi Dharan Mantra: उखड़ी नाभि ठीक करने का सिद्ध हनुमान मंत्र

Nabhi Dharan Mantra: मेडिकल रिपोर्ट में न दिखने वाली ‘उखड़ी नाभि’ का असली ज्योतिषीय कारण क्या है?

नमस्कार दोस्तों! आज हम एक ऐसी छिपी हुई और भयंकर बीमारी के बारे में बात करेंगे, जो इंसान को अंदर ही अंदर खोखला कर देती है। पेट में भयंकर मरोड़, लगातार दस्त (Loose Motion) लगना, कब्ज, वजन गिरना, और पिंड्लियों में दर्द… मरीज सारे टेस्ट और ‘अल्ट्रासाउंड’ (Ultrasound) करवा लेता है, रिपोर्ट एकदम नॉर्मल आती है और डॉक्टर इसे IBS या डिप्रेशन बताकर गोलियां दे देते हैं।

लेकिन हमारी देसी और प्राचीन भाषा में इसे कहते हैं— “नाभि उखड़ना” या “धरण डिगना” (Navel Displacement)। जब तक नाभि अपनी जगह पर (Center में) नहीं आएगी, आप दुनिया की कोई भी दवा खा लें, शरीर उसे उल्टी या दस्त के रूप में बाहर फेंक देगा।

आज मैं आपको वीर हनुमान जी का एक ऐसा अति-प्राचीन Nabhi Dharan Mantra और दो ऐसी जड़ी-बूटियों का सिद्ध तांत्रिक प्रयोग देने जा रहा हूँ, जो आपकी बरसों पुरानी खिसकी हुई धरण को तुरंत सेंटर (Center) में ला देगा।


नाभि खिसकने (धरण) का असली ज्योतिषीय कारण

मेडिकल साइंस में नाभि खिसकने जैसी कोई बीमारी मानी ही नहीं जाती, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर का पूरा बैलेंस (Center of Gravity) हमारी नाभि में होता है?

तंत्र शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, नाभि हमारे शरीर का ‘मणिपूर चक्र’ (Manipur Chakra) है। इस चक्र का सीधा संबंध सूर्य (Surya) और बृहस्पति (Guru) ग्रह से होता है।

  • जब कुंडली में गोचर के दौरान सूर्य या गुरु राहु-केतु से बुरी तरह पीड़ित होते हैं, तो इंसान के पेट का ‘अग्नि तत्व’ और ‘वायु तत्व’ बिगड़ जाता है।

  • ऐसे में थोड़ा सा भी भारी वजन उठाने, खाली पेट सीढ़ियां चढ़ने या गलत तरीके से जंप करने पर, नाभि अपनी जगह से खिसक कर ऊपर (गैस/उल्टी) या नीचे (दस्त) की तरफ चली जाती है।

मेरे अनुभव की बात –

करीब 8 महीने पहले Tangi (Khurda) से एक 28 साल का लड़का (Bheem) मेरे पास आया। उसे जिम (Gym) जाने का बहुत शौक था। एक दिन भारी वजन (Deadlift) उठाते समय उसकी नाभि खिसक गई। 3 महीने में उस नौजवान का 12 किलो वजन गिर गया। जो भी खाता, तुरंत टॉयलेट भागना पड़ता। बड़े-बड़े गैस्ट्रो डॉक्टर को दिखा लिया, एंडोस्कोपी हो गई, लेकिन सब नॉर्मल। लड़का डिप्रेशन में चला गया था।

जब मैंने उसकी नाभि चेक की (नाभि के ऊपर धागा नाप कर), तो वह अपनी जगह से 2 इंच नीचे खिसकी हुई थी। मैंने उसे कोई महंगी पूजा नहीं बताई, बल्कि बजरंगबली का यह सिद्ध शाबर मंत्र और ‘पोले बांस’ (Hollow Bamboo) वाली विधि का प्रयोग किया।

हनुमान जी की ऐसी कृपा हुई मेरे भाई, कि मात्र 3 दिन के अंदर उसकी नाभि अपनी सही जगह (कौड़ी) पर आ गई और उसका पेट एकदम सेट हो गया! आज वो वापस अपनी नॉर्मल डाइट ले रहा है। यह होती है हमारे प्राचीन शाबर मंत्रों की असली ताक़त!

दोस्तों, जिम में भारी वजन (Deadlift) उठाने या गलत तरीके से झुकने पर सिर्फ नाभि ही नहीं खिसकती, बल्कि कई बार रीढ़ की हड्डी पर भी भयानक जोर पड़ता है जिससे ‘स्लिप डिस्क’ (Slip Disc) और कमर का दर्द शुरू हो जाता है। अगर आप या आपके घर में कोई पुराने से पुराने कमर दर्द से तड़प रहा है, तो बिना ऑपरेशन के ठीक होने का भगवान शिव का यह तांत्रिक उपाय यहाँ पढ़ें: [Kamar Dard Mantra: पुराने से पुराने दर्द का 100% सिद्ध शाबर मंत्र]


Nabhi Dharan Mantra: उखड़ी धरण को सेंटर में लाने का 100% सिद्ध मंत्र

अगर आप या आपके घर में कोई भी इस ‘अदृश्य बीमारी’ से तड़प रहा है, तो वीर हनुमान जी के इस सिद्ध मंत्र का प्रयोग जरूर करें:

मंत्र: “ॐ नमो नाडी नाडी। नौ सै नाडी। बहन्तर कोठा। चलै अगाडी। डिगै न कोठा। चले नाडी रख्या करे। यती हनुमन्त की आन। शव्द सांचा। पिण्ड कांचा। फुरे मंत्र ईश्वरोबाचा।।”


Dharan Theek Karne Ka Mantra Vidhi: 9 गांठ वाले बांस का रहस्य

सिर्फ मंत्र पढ़ने से धरण अपनी जगह पर नहीं आती। शाबर मंत्रों को सिद्ध करके एक विशेष तांत्रिक विधि से इसको प्रयोग किया जाता है:

एक पोला (अंदर से खोखला) बांस (Bamboo) लें, जिसमें कुल नौ (9) गांठें हों। उसके बाद आप रोगी व्यक्ति को जमीन पर सीधा (पीठ के बल) लिटा दें। अब रोगी की नाभि (Navel) के बिल्कुल ऊपर इस 9 गांठ वाले बांस को सीधा खड़ा करके रखें।

अब ऊपर दिए गए मंत्र का लगातार जाप करते हुए, बांस के ऊपरी छेद में जोर-जोर से फूंक मारें। मंत्र की ऊर्जा और फूंक के दबाव (Pressure) से उखड़ी हुई नाभि (धरण) धीरे-धीरे खिसक कर अपनी सही जगह पर आ जाती है।


Nabhi Sthapak Siddh Tantra Prayog (जड़ी-बूटियों का चमत्कारी तांत्रिक प्रयोग)

अगर किसी की धरण बार-बार डिगती है (Chronic Navel Displacement), तो उसे अपनी जगह पर पक्का (स्थिर) करने के लिए हमारे तंत्र शास्त्र में यह 2 अचूक उपाय भी हैं:

प्रयोग 1: लाजबन्ती (छुई-मुई) की जड़ का कमाल शनिवार के दिन लाजबन्ती (Lajwanti/Touch-me-not plant) के पौधे की मूल (जड़) उखाड़ कर लाएं। उस जड़ को एक छल्ले के रूप में मोड़कर रोगी की कमर पर बांध दें। धरण हमेशा के लिए अपने ठिकाने पर आ जाएगी।

प्रयोग 2: शंखाहुली की जड़ का तांत्रिक टोटका यह थोड़ा विशेष प्रयोग है। शनिवार की सुबह ही शंखाहुली (Shankhapushpi/Shankhahuli) के पौधे के पास जाएं। हल्दी और चावल से उसे न्योता दें (निमंत्रण दें)। फिर पौधे की सात (7) परिक्रमा (चक्कर) लगाएं। उसके बाद सूर्य देव की ओर मुंह करके पौधे पर थोड़ा दूध चढ़ाएं और फिर उसकी मूल (जड़) खोद कर ले आएं। इस अभिमंत्रित जड़ को रोगी की कमर पर बांध देने से, डिगी हुई धरण तुरंत अपने स्थान पर वापस आ जाती है।


मेरी सलाह

दोस्तों, अक्सर लोग धरण डिगने पर पेट को जोर-जोर से मलवाते हैं या किसी अनाड़ी व्यक्ति से पैरों के झटके लगवाते हैं। मेरे भाई, ऐसा बिल्कुल मत करना! इससे नाभि के आस-पास की नसें (Intestines) सूज जाती हैं और अल्सर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।

मेरी सख्त हिदायत है: नाभि अपनी जगह पर आने के बाद कम से कम 10 से 15 दिन तक कोई भी भारी वजन (Heavy weight) बिल्कुल न उठाएं। सुबह उठकर खाली पेट कभी भी झटके से न उठें, हमेशा करवट लेकर उठें। और हाँ, बिना नहाए और खाली पेट भारी काम करने से ही धरण डिगती है, इसलिए अपनी दिनचर्या सुधारें। ‘सही डाइट और हनुमान जी की दुआ’ जब दोनों मिलेंगी, तभी पेट लोहे जैसा मजबूत होगा!

“दोस्तों, अगर आप पेट की किसी पुरानी बीमारी से तड़प रहे हैं तो, आप श्रद्धा-भक्ति के साथ हनुमान जी के इस शाबर मंत्र का प्रयोग करके लाभ उठा सकते हैं –[Pet Dard Hanuman Mantra: Purani Se Purani Pet Ki Bimari Ko Jad Se Khatam Karne Ka Gupt Rahasya]


Nabhi Dharan Mantra ke upar Sawal Jawab 

1: आचार्य जी, मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरी धरण (नाभि) डिग गई है?

Ans: सुबह खाली पेट सीधे लेट जाएं। अपने हाथ के अंगूठे को अपनी नाभि (Navel) के बिल्कुल बीच में रखें। अगर आपको वहां दिल की धड़कन (Pulse) जैसी ‘धुक-धुक’ महसूस हो रही है, तो नाभि अपनी जगह पर है। अगर यह धड़कन नाभि के ऊपर, नीचे या साइड में महसूस हो, तो समझ जाएं कि आपकी धरण खिसक गई है।

2: धरण डिगने से लगातार दस्त (Loose motion) क्यों लगते हैं?

Ans: जब नाभि (Navel) नीचे की तरफ (पैरों की ओर) खिसकती है, तो वह आंतों पर भयंकर दबाव डालती है, जिससे पाचन तंत्र कुछ भी पचा नहीं पाता और खाते ही इंसान को टॉयलेट भागना पड़ता है। वहीं अगर नाभि ऊपर (छाती की ओर) खिसके, तो भयंकर कब्ज़, गैस और उल्टी का मन होता है।

3: क्या मैं यह ‘शंखाहुली’ या ‘लाजबन्ती’ की जड़ वाला उपाय खुद कर सकता हूँ?

Ans: बिल्कुल! अगर आप पूरी श्रद्धा, साफ-सफाई और विधि-विधान (हल्दी, चावल, परिक्रमा) के साथ खुद यह जड़ लाकर अपनी कमर पर बांधते हैं, तो यह 100% अपना तांत्रिक प्रभाव दिखाएगा।

4: आचार्य जी, क्या इस शाबर मंत्र से धरण अपनी जगह पर हमेशा के लिए पक्की (Lock) हो जाती है या फिर से खिसक सकती है?

Ans: मेरे भाई, जब आप किसी मालिश वाले से पेट सेट करवाते हैं, तो वह सिर्फ नसों को खींचता है, जिससे धरण दो दिन बाद फिर डिग जाती है। लेकिन वीर हनुमान जी का यह ‘शाबर मंत्र’ आपके मणिपूर चक्र की ऊर्जा को बांध (Lock) देता है। ध्यान से देखिए, Nabhi Dharan Mantra में एक लाइन है— “चले नाडी रख्या करे”—इसका मतलब ही है कि नाड़ी अपनी जगह पर फिक्स होकर सुरक्षित हो जाए। अगर आप मंत्र प्रयोग के बाद 15 दिन तक भारी वजन न उठाने का नियम मान लेते हैं, तो धरण हमेशा के लिए लोहे जैसी पक्की हो जाएगी और बार-बार खिसकने की बीमारी जड़ से खत्म हो जाएगी!

5: आचार्य जी, इस हनुमान शाबर मंत्र और तांत्रिक जड़ी का प्रयोग करते समय क्या कोई विशेष परहेज (Rules) मानना पड़ता है?

Ans: बिल्कुल! यह कोई साधारण श्लोक नहीं, बल्कि बजरंगबली का अति-शक्तिशाली शाबर तंत्र है। जब तक आप यह ‘पोले बांस’ वाला उपाय कर रहे हैं या रोगी ने कमर में ‘लाजबन्ती’ की जड़ बांधी हुई है, तब तक उसे मांस-मदिरा (Non-veg/Alcohol) और ब्रह्मचर्य का पूरी तरह पालन करना होगा। अगर शरीर और मन पवित्र नहीं होगा, तो मंत्र की ऊर्जा निष्फल (Zero) हो जाएगी और कोई चमत्कार नहीं दिखेगा। सात्विक रहें और ईश्वर पर 100% विश्वास रखकर उपाय करें, यह Nabhi Dharan Mantra कभी खाली नहीं जाता।

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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार (15+ साल का वैदिक ज्योतिष और तंत्र अनुभव) हर प्रकार के पुराने दर्द, धरण, पेट के रोग, और ग्रहों की समस्या का स्थायी और 100% समाधान के लिए आज ही बिना किसी संकोच के संपर्क करें: (Mo.) +91-9438741641 {Call / Whatsapp}

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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