पति-पत्नी संबंध में प्रेम कैसे बढ़ाएं ?

Pati Patni Sambandh Mein Prem Kaise Badhaayein ?

ज्योतिषशास्त्र में कुण्डली के सातवें घर को विवाह एवं पति-पत्नी संबंध में प्रेम (Pati Patni Sambandh Mein Prem) सुख का स्थान माना गया है । जिनकी कुण्डली में इस घर में राहु होता है उनके वैवाहिक जीवन में कठिनाई आने की संभावना रहती है । ऐसे व्यक्तियों को 40 दिनों तक बादाम या नारियल बहते पानी में प्रवाहित करना चाहिए । इससे पति-पत्नी संबंध में प्रेम (Pati Patni Sambandh Mein Prem) और तालमेल बना रहता है ।
जिन स्त्रियों के पति किसी अन्य स्त्री के मोहजाल में फंस गये हों या पति-पत्नी संबंध में प्रेम (Pati Patni Sambandh Mein Prem) नहीं रखते हों, लड़ाई-झगड़ा करते हों तो इस टोटके द्वारा पति को अनुकूल बनाया जा सकता है ।
गुरुवार अथवा शुक्रवार की रात्रि में या पीरियड के समय में रात्रि 12 बजे पति की चोटी (शिखा) के कुछ बाल काट लें और उसे किसी ऐसे स्थान पर रख दें जहां आपके पति की नजर न पड़े । ऐसा करने से आपके पति की बुद्धि का सुधार होगा और वह आपकी बात मानने लगेंगे । कुछ दिन बाद इन बालों को जलाकर अपने पैरों से कुचलकर बाहर फेंक दें । मासिक धर्म के समय करने से अधिक कारगर सिद्ध होगा । इससे पति-पत्नी संबंध में प्रेम (Pati Patni Sambandh Mein Prem) बढ़ने लगता है
होली जलते समय तीन अभिमंत्रित गोमती चक्र लेकर उस महिला का नाम लेकर थोडा सिन्दूर लगाकर होली की अग्नि में फैंक दें । पति का उस महिला से पीछा छूट जायेगा और पति-पत्नी संबंध में प्रेम (Pati Patni Sambandh Mein Prem) फिरसे जैसे था वैसे दुबारा आपस से प्रेम देखने को मिलेगा ।
जब आपको लगे की आपके पति किसी महिला के पास से आरहें हैं तो आप किसी भी बहाने से अपने पति का आंतरिक वस्त्र लेकर उसमे आग लगा दें और राख को किसी चौराहे पर फैंक कर पैरों से रगड़ कर वापिस आजाएं ।
शुक्ल पक्ष के रविवार को 5 लौंग शरीर में ऐसे स्थान पर रखें जहां पसीना आता हो व इसे सुखाकर चूर्ण बनाकर दूध, चाय में डालकर जिस किसी को पिला दी जाए तो वह वश में हो जाता है ।
सवा पाव मेहंदी के तीन पैकेट (लगभग सौ ग्राम प्रति पैकेट) बनाएं और तीनों पैकेट लेकर काली मंदिर या शस्त्र धारण किए हुए किसी देवी की मूर्ति वाले मंदिर में जाएं । वहां दक्षिणा, पत्र, पुष्प, फल, मिठाई, सिंदूर तथा वस्त्र के साथ मेहंदी के उक्त तीनों पैकेट चढ़ा दें । फिर भगवती से कष्ट निवारण की प्रार्थना करें और एक फल तथा मेहंदी के दो पैकेट वापस लेकर कुछ धन के साथ किसी भिखारिन या अपने घर के आसपास सफाई करने वाली को दें । फिर उससे मेहंदी का एक पैकेट वापस ले लें और उसे घोलकर पीड़ित महिला के हाथों एवं पैरों में लगा दें । पीड़िता की पीड़ा मेहंदी के रंग उतरने के साथ-साथ धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी ।
यदि चाहते हुए वैवाहिक सुख नहीं मिल पा रहा है, हमेशा पति-पत्नि में किसी बात को लेकर अनबन रहती हो तो किसी भी शुक्रवार के दिन यह उपाय करें । मिट्टी का पात्र ले जिसमें सवा किलो मशरूम आ जाएं । मशरूम डालकर अपने सामने रख दें । पति-पत्नि दोनों ही महामृत्युंजय मंत्र की तीन माला जाप करें । तत्पश्चात इस पात्र को मां भगवती के श्री चरणों में चुपचाप रखकर आ जाए । ऐसा करने से मां भगवती की कृपा से आपका दांपत्य जीवन सदा सुखी रहेगा ।
यह प्रयोग शुक्ल में पक्ष करना चाहिए । एक पान का पत्ता लें । उस पर चंदन और केसर का पाऊडर मिला कर रखें । फिर दुर्गा माता जी की फोटो के सामने बैठ कर दुर्गा स्तुति में से चँडी स्त्रोत का पाठ 43 दिन तक करें ! पाठ करने के बाद चंदन और केसर जो पान के पत्ते पर रखा था, का तिलक अपने माथे पर लगायें । और फिर तिलक लगा कर पति के सामने जांय । यदि पति वहां पर न हों तो उनकी फोटो के सामने जांय । पान का पता रोज़ नया लें जो कि साबुत हो कहीं से कटा फटा न हो । रोज़ प्रयोग किए गए पान के पत्ते को अलग किसी स्थान पर रखें । 43 दिन के बाद उन पान के पत्तों को जल प्रवाह कर दें ।
झाड़ू की दो सींको को उल्टा – सीधा रखकर नीले धागे से बांधकर घर के दक्षिण – पश्चिम में रखने से दाम्पत्य प्रेम बढ़ेगा ।
अगर आपके पति किसी अन्य स्त्री पर आसक्त हैं और आप से लड़ाई-झगड़ा इत्यादि करते हैं । तो यह प्रयोग आपके लिए बहुत कारगर है, प्रत्येक रविवार को अपने घर तथा शयनकक्ष में गूगल की धूनी दें । धूनी करने से पहले उस स्त्री का नाम लें और यह कामना करें कि आपके पति उसके चक्कर से शीघ्र ही छूट जाएं । श्रद्धा-विश्वास के साथ करने से निश्चिय ही आपको लाभ मिलेगा ।

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जय माँ कामाख्या

Acharya Pradip Kumar is the founder of Mystic Shiva Astrology and a practitioner of Vedic astrology with a solution-oriented approach. His work focuses on understanding birth charts as tools for clarity, awareness, and practical decision-making rather than fear-based predictions. Rooted in classical astrological principles and real-life experience, he emphasizes responsible guidance, timing, and conscious remedies aligned with an individual’s life path.

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