Rog Mukti Upay: जब दवा हार मान ले, तब ऋषियों का ‘अचूक बाण’ ही बचाएगा प्राण!
नमस्कार मेरे भाइयों और बहनों! जय माँ कामाख्या। स्वागत है आपका अपने मंच पर। मैं आपका अपना आचार्य प्रदीप कुमार, पिछले 15 सालों के अनुभव के साथ आज एक ऐसी बात बताने जा रहा हूँ जिसे सुनकर आपके भीतर की घबराहट शांत हो जाएगी।
देखिए, जिस घर में कोई बीमारी (Illness) कदम रख देती है, वहां सिर्फ रोगी ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार मानसिक चिंता और अशांति की आग में जलने लगता है। डॉक्टर चक्कर काटते हैं, पैसे पानी की तरह बहते हैं, पर कभी-कभी ऐसा मोड़ आता है जब ‘मेडिकल साइंस’ भी घुटने टेक देता है। तब काम आता है हमारे पूर्वजों का दिया हुआ Rog Mukti Upay। मेरा उद्देश्य डॉक्टरों की मेहनत को कम आंकना नहीं है, पर जब शरीर पर दवा लगना बंद हो जाए, तो समझ लीजिये कि अदृश्य नकारात्मक ऊर्जा ने घेरा डाल लिया है।
मेरी आँखों देखी चमत्कार
बात करीब 6 साल पुरानी है, जिस समय सारा देश में करोना का भय छाया गया था । Puri , Bada Daand Sahi (Odisha) के रहने वाले बिश्वनाथ जेना जी का फोन मेरे पास आया था । उनके घर में मातम जैसा माहौल था। उनके छोटे भाई को ऐसा ‘अज्ञात ज्वर’ (Fever) चढ़ा था जो उतरने का नाम ही नहीं ले रहा था। कटक और भुवनेश्वर के बड़े अस्पतालों में इलाज चला, पर रिपोर्ट सब नॉर्मल और बुखार 104 डिग्री!
मैंने उन्हें धैर्य रखने को कहा और Rog Mukti Upay द्वारा सिद्ध किए हुए जल से झाड़ा लगाने की विधि बताई। साथ ही हनुमान जी के विशेष मंत्र का प्रयोग करवाया। विश्वास मानिए, जिस भाई को डॉक्टर जवाब दे चुके थे, तीसरे दिन उसकी आँखें खुलीं और उसने पानी माँग कर अपने हाथ में पिए । आज वह पूरी तरह स्वस्थ है। यह जादू नहीं, मंत्र विज्ञान का जादू है!
1. भीषण ज्वर (Fever) नाशक शाबर मंत्र
यदि बुखार चढ़ा हो और दवा काम न कर रही हो, तो इस Rog Mukti Upay को ग्रहण या होली पर सिद्ध कर लें। इसके बाद यह मंत्र (Mantra) से रोगी को झाड़ा लगावें:
मंत्र: “ओम ह्रीं ह्रीं रीं रीं विष्णु शक्ति भगवती विष्णुशक्तिमेन हर हर नय नय पच पच मथ मथ उत्सादय दुरे कुरू स्वाहा।”
2. फोड़े-फुंसी और असाध्य रोगों के लिए शिव मंत्र
अगर शरीर पर कोई फोड़ा (Abscess) या घाव हो गया हो जो ठीक न हो रहा हो, तो महादेव का स्मरण करते हुए 31 बार इस मंत्र का उच्चारण करें और फोड़े पर हाथ फेरकर फूंक मारें। आरोग्य प्राप्ति के लिए यह अचूक मंत्र है।
दांत निकलने वाले बच्चों के लिए उपाय: पत्थरचूर की जड़ को तांबे के पात्र में भरवाकर चमकीले लाल डोरे से बांधकर बच्चे के गले में लटका दें। इससे दांत निकलने का कष्ट और दस्त बंद हो जाते हैं। गले में बांधने से पहले 51 बार “जय गुरु गोरखनाथ तुम्हारी आन” का जाप अवश्य करें।
मेरे भाइयों, अगर आपके घर में 0 से 12 साल का कोई बच्चा है जो बार-बार बीमार पड़ रहा है या जिसका शरीर सूखता जा रहा है, तो यह ‘पूतना दोष’ भी हो सकता है। बच्चों की ऐसी गुप्त बाधाओं और 12 दिनों की विशेष तांत्रिक शांति विधि के बारे में यहाँ विस्तार से पढ़ें: [Pootana Grah Shanti Puja: बच्चों के हर रोग का अचूक तांत्रिक उपाय]
3. शरीर की हर पीड़ा और ‘चौरासी बाय’ का नाश (हनुमंत मंत्र)
मोरपंख से इस मंत्र का 31 बार उच्चारण करते हुए झाड़ा लगाएं। यह हर प्रकार के शारीरिक कष्ट में दैवीय सुरक्षा प्रदान करता है।
मंत्र: “बन में बैठी वानरी अजनी जायो हनुमंत बाला डमरू बाधिनी बिलारी आख कि पीडा मस्तक की पीडा चौरासी बाय बली बली भस्म हो जाए पंके न फूटे पीडा करे तो अंजनी माता कि आन गुरू की शक्ती मेरी भक्ती फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।”
4. मोच और असहनीय दर्द से मुक्ति (मचक मंत्र)
अगर अचानक मोच आ जाए या शरीर के किसी हिस्से में भयंकर दर्द (Pain Relief) हो, तो सरसों का तेल 21 बार इस मंत्र से अभिमंत्रित करें और मालिश करें। रोगी तुरंत स्वस्थ महसूस करेगा।
मंत्र: “ओम नमो आदेश गुरू को श्रिराम को मचक उडाई इसके तन तुरंत पिडा भाग जाये ना रहे रोग ना रहे पिडा अमुक कि व्यथा छोड ना छोडे तो ईश्वर महादेव कि दुहाई विधी छु ।”
आचार्य जी की विशेष सलाह
मेरे दोस्त , मंत्र और तंत्र कोई जादू-टोना नहीं, बल्कि प्रकृति की शक्तियों को सक्रिय करने का तरीका है। Get Your Personalized Kundli Analysis Today ताकि हम जान सकें कि कहीं आपकी कुंडली का ‘रोग भाव’ (6th House) या ‘मारक स्थान’ तो जाग्रत नहीं हो गया है? सही समय पर किया गया ग्रह दोष निवारण और Rog Mukti Upay का मेल काल के गाल से भी खींच लाता है।
Rog Mukti Upay – आपके मन की शंकाएं
प्रश्न 1: आचार्य जी, क्या Rog Mukti Upay का प्रभाव तुरंत शुरू हो जाता है?
उत्तर: देखिए भाई, यह आपकी श्रद्धा और मंत्र की ‘सिद्धि’ पर निर्भर करता है। अगर पूर्ण विश्वास के साथ जाप किया जाए, तो मंत्र की ऊर्जा तत्काल शरीर के चक्रों को ठीक करना शुरू कर देती है।
प्रश्न 2: क्या इन मंत्रों उपाय को बिना सिद्ध किए पढ़ सकते हैं?
उत्तर: पढ़ तो सकते हैं, लेकिन ‘शाबर मंत्र’ और ‘तांत्रिक मंत्र’ सिद्ध होने पर ही अपनी पूरी ताकत दिखाते हैं। शुभ मुहूर्त में सिद्ध करना अचूक फल देता है।
प्रश्न 3: अगर रोगी खुद मंत्र न पढ़ पाए तो?
उत्तर: कोई बात नहीं! परिवार का कोई भी सदस्य रोगी के सिरहाने बैठकर या जल अभिमंत्रित करके उसे पिला सकता है। गुरु गोरखनाथ की कृपा से लाभ ज़रूर होगा।
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जय माँ कामाख्या