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नपुंसकता

नपुंसकता :

नपुंसकता :यह एक यौन रोग है , जो पुरुषों में पाया जाता है । इस रोग में पुरुष की जननेन्द्रिय में बिकास नही हो पाता, जिस कारण बह संतानोंत्पति में असमर्थ होता है । कभी – कभी ऐसी अबस्था भी होता है की लिंग का बिकास तो हो जाता है किन्तु बीर्य बाहर नही आता, यह भी नपुंसकता की स्थिति होता है ।ज्यादा थकान और तनाब ,चिन्ता इत्यादि के कारण भी नपुंसकता आ जाती है , किन्तु यह अबस्था अस्थायी होती है । साधारणतया यह रोग मानसिक कारणों से ज्यादा होता है । शारीरिक नपुसकता तो दस प्रतिशत पुरूषों में भी नहीं पायी जाती है । अत: इस रोग के निबारण में मनोचिकित्सक की सलाह आबश्यक है ।

नपुंसकता के ज्योतिषीय सिद्धांत :
पंचम तथा सप्तम भाब में पाप ग्रह बैठे हों , शुक्र ,मंगल या सूर्य से दूषित हो अथबा सप्तम भाब में शनि और बुध स्थित हो तो नपुसकता होने का योग बनता है । शनि की दृष्टि लग्न या सप्तम भाब पर हो तो तब भी नपुसकता रोग के होने की स्म्भाबना रहती है । क्योंकि इस रोग का सीधा सम्बन्ध शुक्र से हैं , इसीलिए शुक्र का रत्न हीरा सफ़ेद रंग का धारण करना हितकारी होता है ।

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नोट : यदि आप की कोई समस्या है,आप समाधान चाहते हैं तो आप आचार्य प्रदीप कुमार से शीघ्र ही फोन नं : 9438741641{Call / Whatsapp} पर सम्पर्क करें।

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