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बशीकरण भ्रमर मंत्र

बशीकरण भ्रमर मंत्र :

बशीकरण भ्रमर मंत्र– “अरं घुघुराकृष्ट कर्मकत अमुकं करो बश्यं ।”

बशीकरण भ्रमर मंत्र बिधि – यह मंत्र दस हजार बार जपने पर सिद्ध होता है ।मंत्र का जप करते समय, जिस स्थान में “अमुक” शव्द आया है बंहाँ साध्य स्त्री अथबा पुरुष के नाम का उचारण करना चाहिए । मंत्र के सिद्ध हो जाने पर जब कभी भंबर –भंबरी को इकटठे देखें, उस समय उनकों अलग करके चिता की लकड़ी में जला दें तथा साध्य ब्यक्ति के नाम का उचारण करते हुए उस भस्म को एकत्र करके रख लें । फिर उक्त भस्म को अभिमंत्रित करके जिस साध्य ब्यक्ति के ऊपर छोड़ दिया जाये, बह बशीभूत हो जाता है ।

सर्ब –बशीकरण मंत्र :-
मंत्र :- “ॐ नमो नमो कदसंबारिनि सर्ब लोक बश्यकरी स्वाहा ।”

बिधि – यह मंत्र दस हजार की संख्या में जपने से सिद्ध होता है । आबश्यकता के समय जब किसी कार्य के समय साध्य ब्यक्ति का नाम लेकर तथा उसका स्मरण करते हुए 108 बार जप करने से साध्य ब्यक्ति बशीभूत होता है ।

त्रैलोक्य बशीकरण मंत्र और साधन :
मंत्र – “ॐ यें परक्षोभय भगबती गंभीर रेछ स्वाहा ।”

बिधि : यह मंत्र बीस हजार बार जपने पर सिद्ध होता है । मंत्र के सिद्ध हो जाने पर अपामार्ग की जड़ को गोरोचन के साथ पानी में पीस कर तिलक करने से तीनों लोक बशीभूत होते हैं ।

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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार
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