बल-प्राप्ति मंत्र :
बल-प्राप्ति मंत्र :
May 1, 2021
भाग्योदय हेतु अनुभूत मंत्र :
भाग्योदय हेतु अनुभूत मंत्र :
May 2, 2021
बिना मंत्र का “बशीकरण” :
बिना मंत्र का “बशीकरण” :
 
शनिबार के दिन यदि किसी की म्रुत्यु हो और उसी दिन उसका शमशान मे दाह-कर्म किया जाए, तो एक मिटटी की हाँडी में खिचडी बनाकर शमशान-भुमि में ले जायें । जिस स्थान में मुर्दा जलाया जाए, बहाँ पर उस खिचडी को जमीन मे बिखेर दें ।दूर बैठ जायें और जब शब-यात्रा के लोग लौटकर चले जायें तथा बिखरी खिचडि को कौबे खाने लगें,तब हंडिया मे जो कुछ खिचडि बच जाय, उस हंडिया को उठाकर चल दें। पीछे न देखें, पुरी क्रिया सम्पन्न होने तक मौन रहें। मार्ग में जो भी नीम का ब्रुख्य मिले, उसी के तने पर हाँडी को दे मारें। इससे हाँडी के कुछ चाबल जमीन पर गिर जायेंगे, कुछ चाबल नीम के तने पर चिपक जायेंगे। साबधानी पुर्बक दोनों चाबलों को एकत्रित कर लें। चिपके चाबलों को अलग बांधें और जमीन पर गिरे चाबलों को अलग बांधें। दोनो पोटलियों को गुगुल की धुनी देकर , जहाँ सुबिधा हो, एकान्त में गाड दें ।गाडे हुए स्थान पर निशान लगा दें तथा शनिबार को उस स्थान पर भोग चढायें। भोग मे एक बताशा, गुग्ग्ल, मद्द चढायें। ऐसा 7 शनिबार करें। जब सात शनिबार पुरे हो जाये, तब भुमि खोदकर उन चाबलों को निकाल लें और घर आ जाएं तथा उन्हें सुरखित स्थान पर रख दें। जब कभि “बशिकरण” का कार्य हो, तब नीम से चिपके हुए चाबलों मे से दो-चार चाबल साध्य के शरीर पर फेंकें। कार्य पुरा होने के बाद यदि आपको उस ब्यक्ति की आबश्यकता न हो, तो जमीन पर गिरे हुए चाबलों में से दो-चार चाबल उसको किसी भी बस्तु के माध्यम से खिलायें। इससे बह आपसे कौबे की तरह मुंह फेर लेगा अर्थात् आपसे दुर हो जायेगा ।
 
उक्त टोटका बिना मंत्र का “बशीकरण” है, परन्तु इसकी क्रिया उग्र ब कठिन है। इससे “बशिकरण” अचूक होता है। साधकगण अपनी शरीर-रख्या का बिधान करने के बाद ही साबधानीपूर्बक साह्स के साथ इसका प्रयोग करें।
 
 
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जय माँ कामाख्या

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