Shabar Viir Vaitaal Sadhana: कृष्ण और विक्रमादित्य की वो अजेय शक्ति, जो बदल देगी आपका भाग्य!
भाई, आज मैं (आचार्य प्रदीप कुमार) उस महान साधना का रहस्य खोलने जा रहा हूँ जिसका इतिहास खुद गवाह है। इतिहास साक्षी है कि सांदीपन आश्रम में भगवान श्री कृष्ण ने भी वैताल सिद्धि प्रयोग सम्पन्न किया था, जिसके फलस्वरूप वे महाभारत में अजेय बन सके और हजारों बाणों के बीच भी सुरक्षित रह सके।
सम्राट विक्रमादित्य ने भी इसी साधना से अपने जीवन के कई प्रश्नों को सुलझा लिया था।आगे चलकर गुरु गोरखनाथ और मछिन्दरनाथ तो वैताल साधना के सिद्धतम आचार्य बने।
वैताल शिव के प्रमुख गण हैं, जिन्होंने दक्ष राज के यज्ञ का विंध्वस कर शिव सत्ता स्थापित की। हर व्यक्ति यह साधना सम्पन्न कर अपने चारों ओर एक सुरक्षा चक्र स्थापित कर सकता है।
Shabar Viir Vaitaal Sadhana: जब डूबता हुआ व्यापार रातों-रात चमक उठा
यह बात करीब ५ साल पुरानी है, Soran (Odisha) के ही एक बड़े Perfume (Attar) व्यापारी मेरे पास आए थे। उनका करोड़ों का टर्नओवर था पर अचानक सब ठप हो गया। कर्ज बढ़ता जा रहा था और दुश्मन सिर उठा रहे थे।
मैंने उन्हें गुरु सानिध्य में Shabar Viir Vaitaal Sadhana करने का मार्ग दिखाया। श्रावण मास का समय था, उन्होंने पूरी निष्ठा से २१ दिनों का विधान शुरू किया।
साधना के दौरान उनके घर के दरवाजे अपने आप खटखटाने लगे, पर वो डरे नहीं। जैसे ही साधना पूर्ण हुई, उन्हें ऐसी ‘भविष्य सिद्धि’ प्राप्त हुई कि उन्हें अपने अगले व्यापारिक कदम का पहले ही आभास होने लगा। आज वो न केवल कर्जमुक्त हैं, बल्कि ओडिशा के सफल व्यापारियों में गिने जाते हैं।
“भाई, यह तो हुई सुरक्षा चक्र की बात। लेकिन अगर आप २१ दिनों के उस गुप्त शाबर मंत्र के बारे में जानना चाहते हैं जिससे साक्षात् प्रत्यक्षीकरण संभव है, तो यहाँ पढ़ें: [Bir Vetal Pratyakshikaran Sadhana: 21 दिन में बेताल सिद्धि का गुप्त शाबर मंत्र]“
गोरक्ष संहिता के अनुसार Shabar Viir Vaitaal Sadhana के ६ जाग्रत लाभ:
१. सौम्य और सरल साधना: इससे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। सिद्ध होने पर मनुष्य रूप में सरल प्रकृति और शांत रूप में वैताल प्रकट होता है और जीवन भर दास की तरह आपके कार्य सम्पन्न करता है।
२. अदृश्य सुरक्षा कवच: वैताल छाया की तरह साथ रहता है। प्रकृति, अस्त्र-शस्त्र या मनुष्य आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। न तो दुर्घटना हो सकती है और न अकाल मृत्यु।
३. शत्रु नाश: शत्रुओं का नामोनिशान नहीं रहता। आप उन्हें परास्त करने का साहस रखते हैं और आपका जीवन निष्कंटक और निर्भय होता है।
४. भविष्य दृष्टा: व्यक्ति सही अर्थों में भविष्य दृष्टा बन जाता है। जीवन के भविष्य से सम्बन्धित जो भी प्रश्न पूछा जाता है, उसका तत्काल उत्तर प्रामाणिक रूप से मिल जाता है।
५. अदृश्य गमन और सिद्धि: साधक वैताल के कन्धों पर बैठकर अदृश्य हो सकता है। पहाड़, नदियां या समुद्र बाधक नहीं बनते। आप किसी भी व्यक्ति को पलंग सहित उठवा सकते हैं और गोपनीय सामग्री प्राप्त कर सकते हैं।
६. अजेय व्यक्तित्व: साधक अजेय, साहसी, कर्मठ और अकेला ही हजार पुरुषों के समान कार्य करने वाला व्यक्ति बन जाता है।
Shabar Viir Vaitaal Sadhana: समय और गुप्त विधान
यह साधना अत्यंत सौम्य है। गायत्री उपासक या देव उपासक, किसी भी वर्ण का कोई भी व्यक्ति (स्त्री या पुरुष) इसे सम्पन्न कर सकता है।
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समय: किसी भी रविवार को शुरू करें, श्रावण मास में यह शीघ्र सम्पन्न होती है।
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सामग्री: नाथ संप्रदाय के अनुसार केवल तीन उपकरण—वैताल यंत्र, वेताल माला, और भगवान शिव जी का चित्र।
साधना विधि: रात्रि १० बजे के बाद स्नान कर लें और किसी अन्य पात्र को छुएं नहीं। काले आसन पर दक्षिण की ओर मुंह कर एकांत में बैठ जाएं। बाजोट पर शिव परिवार चित्र/विग्रह और गुरु गोरखनाथ का चित्र स्थापित करें। गुरु और शिव जी से आशीर्वाद प्राप्त करें।
गुरु ध्यान: गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः… और शिव ध्यान: ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं… का पाठ करें। ध्यान के बाद आप ताँबे या स्टील की थाली में काजल से एक गोला बनाएं और उसमें वीर बेताल यंत्र स्थापित करें। अब वैताल को ध्यान करें: धूम्र-वर्ण महा-कालं जटा-भारान्वितं यजेत्…
।। Shabar Viir Vaitaal Sadhana Mantra ।। “॥ॐ नमो आदेश गुरुजी को, वैताल तेरी माया से जो चाहे वह होये, तालाब के वीर-वैताल यक्ष बनकर यक्षिणियों संग चले, शिव का भक्त माता का सेवक मेरा कह्यो कारज करे, इतना काम मेरा ना करो तो राजा युधिष्ठिर का गला सूखे…” (मंत्र गोपनीय होने के कारण यहाँ अधूरा है, गुरु मुख से पूर्ण करें)।
FAQ: Shabar Viir Vaitaal Sadhana पर आपके सवाल
१. क्या घर में Shabar Viir Vaitaal Sadhana करने से कोई खतरा है?
बिल्कुल नहीं भाई! घर में बैठकर भी यह साधना सम्पन्न की जा सकती है। इससे साधक के चेहरे पर तेजस्विता आती है और वह कष्टों को खुद दूर कर सकता है।
२. साधना के दौरान अगर खिड़की-दरवाजे खड़खड़ाने लगें तो?
भाई, यह साधक के लिए परीक्षा की घड़ी होती है। स्थान से न उठें और डरे नहीं। शांत भाव से मंत्र जप करते रहें।
३. क्या इसमें कुंकुम या विशेष पूजा की जरूरत है?
नहीं भाई, इसमें केवल तीन उपकरणों की जरूरत होती है। अन्य किसी सामग्री या जल पात्र की आवश्यकता नहीं होती।
४. क्या कोई दुराचारी व्यक्ति इस साधना को कर सकता है?
नहीं भाई, यह अत्यंत गोपनीय प्रयोग है। इसे निन्दा करने वाले या तर्क करने वाले दुराचारी को नहीं देना चाहिए।
५. जाप के बाद भोग में क्या चढ़ाएं?
२१ दिनों तक नित्य ३ माला जप के पश्चात् बेसन के लड्डुओं का भोग यंत्र के सामने अर्पित करें।
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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार Call/WhatsApp: +91-9438741641
जय माँ कामाख्या!