Ugra Shamshanik Vetal Sadhna: संसार का हर काम करने वाला ‘बैताल’ होगा आपके मुट्ठी में!
भाई, आज मैं (आचार्य प्रदीप कुमार) तंत्र मार्ग के उस सबसे उग्र अध्याय को खोलने जा रहा हूँ जिसे दुनिया ‘बैताल साधना‘ के नाम से जानती है। देखिए भाई, यह कोई साधारण खेल नहीं है। Ugra Shamshanik Vetal Sadhna संपन्न होने के बाद संसार का कोई ऐसा काम नहीं है (मृत्यु के अलावा) जो साधक बैताल से न करवा सके।
बैताल साधक को किसी भी व्यक्ति के भूत, भविष्य, वर्तमान और मनोभावों को बता सकता है। होने वाली घटनाओं का साधक को पहले से ज्ञान हो जाता है और पूर्व में हुई घटनाओं को भी साधक इस बैताल साधना द्वारा बैताल से जान सकता है। चाहे कितना भी भारी पदार्थ उठाना हो या विदेश की खबर—बैताल आपके लिए सब कुछ कर सकता है। जो भाई ज्योतिषी का काम करते हैं, उनके लिए यह साधना सर्वोत्तम है।
भाई, बैताल साधना की तरह ही नाहर सिंह वीर की साधना भी बहुत जाग्रत है, जो साधक को सामने वाले के मन की बात पढ़ लेने की अद्भुत शक्ति देती है। यहाँ पढ़ें: [Nahar Singh Veer Sadhna: मन की बात जानने वाली वीर सिद्धि]
Ugra Shamshanik Vetal Sadhna: जब बैताल ने रातों-रात सुलझाया अदृश्य संकट (Case Study)
यह बात कुछ साल पुरानी है, पूरी (ओडिशा) का एक आदमी ने Ugra Shamshanik Vetal Sadhna को पूर्ण किया था। उसे एक ऐसी गुप्त जानकारी चाहिए थी जो सात समुंदर पार छिपी थी। उसने बैताल का आह्वान किया और रात के तीसरे पहर उसे वो खबर प्राप्त हो गई। लेकिन भाई, यह तभी संभव हुआ जब उसने गुरु के सानिध्य में रहकर अपने पितरों और ग्राम देवता को मनाया था। यह साक्षात् आजमाया हुआ तांत्रिक चमत्कार है!
Ugra Shamshanik Vetal Sadhna के 37 गुप्त बिंदु और पूर्ण विधान
भाई, Ugra Shamshanik Vetal Sadhna में सफल न होने का सबसे बड़ा कारण है नियमों की अनदेखी। एक-एक बिंदु को ध्यान से नोट कर लें:
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साधक का जिगरा : यह साधना बहुत उग्र और डरावनी है। निडर साधक ही यह उग्र बैताल साधना को कर सकता है।
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पितृ दोष और गुप्त भेद: पितरों को मनाए बिना इस साधना में सिद्धि प्राप्त नहीं होगी।
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तीसरी आँख का महत्व: जिनकी रूहानी आँख खुली होती है, उन्हें साधना के दौरान आत्माएं जल्दी दर्शन देती हैं।
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ग्राम देवता की अनुमति: ग्राम देवता की अनुमति लेना इस साधना का पहला कदम है।
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कुल देवता/देवी: अपने कुल देवता को मनाए बिना सिद्धि पाना असंभव है।
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विद्वान की सलाह: जानकार से सलाह लेकर ही बेताल साधना शुरू करें।
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गुरु की अनुमति और ऋण: गुरु ही नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है।
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ब्रह्मचर्य: इस प्रयोग में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
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शत-प्रतिशत सफलता: यह क्रिया या साधना अबतक खड़ा उतारा है , जो कभी असफल नहीं हुआ है , वस आपका श्रद्धा और विश्वास की ऊपर Depend करता है । आप कितने श्रद्धा भक्ति से करते हो । यह क्रिया बहुत जटिल नहीं है।
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शुभ मुहूर्त: रविवार या मंगलवार को गुरु आशीर्वाद लेकर श्मशान जाएं।
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श्मशान में निमंत्रण: जलती चिता के पाँव की तरफ खड़े होकर 7 बार प्रदक्षिणा करें।
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आवाहन सामग्री: लड्डू, लौंग, इलायची, कलावा, शराब, सुपारी और हल्दी लगे चावल चिता पर रखें।
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अस्थि ग्रहण: चिता से एक अस्थि उठाकर उसे शराब से स्नान कराएं।
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प्रथम भोग: 2 भुनी मछली और शराब का छींटा बेताल के लिए छोड़ दें।
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नित्य भोग का नियम: दूसरे दिन से भोग श्मशान में पीपल या वट वृक्ष के नीचे दें।
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अस्थि का बंधन: अस्थि को लाल कपड़े में लपेटकर कलावा बांधें।
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शिव मंदिर प्रवेश: आधी रात को अस्थि लेकर शिव मंदिर जाएं।
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गुरु मंत्र: जप शुरू करने से पहले गुरु मंत्र की 5 माला जपें।
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आसन और रक्षा कवच: आसन के नीचे अस्थि रखें और रक्षा मंत्र का घेरा लगाएं।
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सिद्ध आसन मंत्र: बैठने से पहले 21 बार आसन मंत्र का जाप करें।
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माला का नियम: रुद्राक्ष की संस्कारित माला गोमुखी के अंदर होनी चाहिए।
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जप संख्या: एक ही बैठक में 51 माला बैताल मंत्र का जाप करना है।
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वस्त्र: बिना सिले काले वस्त्र पहनें और सिर ढककर रखें।
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तिलक का कड़ा नियम: खबरदार! बिना तिलक लगाए घर की चौखट के बाहर कदम भी मत रखना, वरना लेने के देने पड़ जाएंगे। श्मशान की शक्तियों से खेलने जा रहे हो, तो सुरक्षा का यह पहला घेरा (कुमकुम का तिलक) लगाकर ही निकलना।
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श्मशान का दीपक: प्रतिदिन पीपल के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं।
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अस्थि की सुरक्षा: जप के बाद अस्थि को उसी पेड़ पर सुरक्षित रख दें।
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हाहाकार और भय: दूसरे-तीसरे दिन बैताल भयानक रूप में संपर्क करेगा।
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स्वप्न दर्शन: पहले दिन बैताल सपने में डरावनी आकृतियों के रूप में आएगा।
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41 दिन का चक्र: यह क्रम लगातार 41 दिन चलेगा।
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अंतिम परीक्षा: अंतिम सप्ताह में बैताल पूरी ताकत से डराएगा।
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वचन मांगना: अंतिम दिन बैताल सौम्य रूप में वचन देगा।
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निडरता: यह रात्रि की साधना है, इसलिए अकेले जाना होगा।
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तामसिक मर्यादा: Ugra Shamshanik Vetal Sadhna के दौरान कोई और साधना न करें।
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पूर्व निमंत्रण: अस्थि लेने से एक दिन पहले हल्दी वाले चावल श्मशान में रखें।
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अहंकार का त्याग: सफलता के बाद शक्तियों का प्रदर्शन न करें।
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मर्यादा: बैताल से कभी कोई नाजायज काम न करवाएं।
Ugra Shamshanik Vetal Sadhna Mantra :
श्मशान की शक्तियों को जगाने का मंत्र:
“जाग जाग मां काली मरघट की तू रखवाली। उठ जाग काले भैरव जाग मुर्दे में लगी आग। ढाई घड़ी में धूनी धूखाये सब कोई जागे तेरे जगाए।। दोहाई गुरू गोरखनाथ की बंगाल खंड की कामरु कामाक्षा देवी की आन।”
Vetal Sadhna Mantra:
“हम हुम्म सुनसान सोख्ता मसान नाचे भूत जागे शैतान।”
FAQ: Ugra Shamshanik Vetal Sadhna पर आपके सवाल
1. क्या Ugra Shamshanik Vetal Sadhna कमजोर दिल वाले कर सकते हैं?
बिल्कुल नहीं भाई! यह बहुत ही उग्र और डरावनी साधना है। अगर साधक बैताल के भयानक रूप को देखकर डर गया, तो उसके प्राण जाने का भय रहता है या वह पागल हो सकता है।
2. अगर किसी की रूहानी या तीसरी आंख नहीं खुली हो, तो क्या उसे सिद्धि मिलेगी?
हाँ भाई, सिद्धि तो होगी, लेकिन उसे खुद पता नहीं चलेगा कि उसका कुछ भला हुआ है या नहीं। जिनकी तीसरी आंख खुली होती है, उन्हें यह आत्माएं बहुत जल्दी दर्शन दे देती हैं।
3. Ugra Shamshanik Vetal Sadhna में गुरु और पितरों का क्या महत्व है?
भाई, यह इस साधना का सबसे बड़ा गुप्त भेद है। अगर आपके पितर या ग्राम देवता आपसे रुष्ट हैं, तो सिद्धि मिलना असंभव है। साथ ही गुरु वो ढाल है जो साधना की नकारात्मक ऊर्जा को संभालता है।
4. क्या इस साधना के दौरान हम अन्य मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं?
नहीं भाई! यह एक अत्यंत उग्र और तामसिक साधना है। Ugra Shamshanik Vetal Sadhna के चलते समय कोई और साधना करना सख्त वर्जित है।
5. सफलता के बाद बैताल की उस अस्थि (हड्डी) का क्या करना चाहिए?
सिद्धि प्राप्त होने के बाद साधक को उस अस्थि को सदा के लिए अपने पास सुरक्षित और संभाल कर रख लेना चाहिए। वही आपकी सिद्धि का आधार है।
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जय माँ कामाख्या!