प्रणाम साधकों! पिछले 15 वर्षों से ज्योतिष और इस कठिन तंत्र साधना के मार्ग पर चलते हुए मैंने ऐसे इंसान को बहुत करीब से महसूस किया है। आज के इस कलयुग में इंसान अपने दुखों से उतना दुखी नहीं है, जितना दूसरों के सुख और तरक्की को देखकर जल रहा है। जब कोई आपसे सीधे मुकाबले में जीत नहीं पाता, तो वह चोरी चुपके से पीछे से तांत्रिक अभिचार, मूठ करणी, तांत्रिक चौकी या नजर दोष का सहारा ले लेता है। उनका मकसद सिर्फ आपकी आर्थिक, मानसिक और शारीरिक स्थिति को पूरी तरह तहस-नहस करना होता है।
अगर आपके घर-परिवार में भी ऐसा कुछ अजीब घटना घट रहा है, जहाँ अचानक से चलता हुआ व्यापार ठप होना, दवाइयां बेअसर हो गई हों और बीमारी ने डेरा डाल लिया हो, या फिर घर के सदस्यों की बुद्धि ही काम न कर रही हो—तो घबराइए मत। हमारे प्राचीन शास्त्रों में ऐसी ही खतरनाक और गुप्त शत्रु जनित बाधाओं को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए भगवती बगलामुखी के एक बेहद गोपनीय विधान की प्रयोग है, जिसे हम Parvidya Bhakshini Mantra प्रयोग कहते हैं।
नकारात्मक ऊर्जा और तांत्रिक हमले से बचने का असली सच
देखो भाई, जब कोई स्वार्थी व्यक्ति पूरी दुर्भावना के साथ आपके ऊपर कोई तांत्रिक अभिचार कर्म करता है, तो साधारण पूजा-पाठ या छोटे-मोटे उपायों से उसका काट मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में शत्रु बाधा निवारण के लिए यह विशिष्ट साधना किसी अचूक ब्रह्मास्त्र की तरह काम करती है।
इस गुप्त साधना की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यह सामने वाले विरोधी द्वारा आपके खिलाफ चलाई गई कितनी बड़ी भी मारक विद्या का हरण कर लेती है, यानी उसे रास्ते में ही सोखकर शांत कर देती है। अगर इस अनुष्ठान को सही नियमों के साथ सम्पूर्ण किया जाये तो साधक के चारों तरफ करीब 5 किलोमीटर के दायरे में कोई भी मारण, मोहन, उच्चाटन या गड़ंत विद्या पैर तक नहीं रख पाती। यह आपके और आपके पूरे परिवार के चारों ओर एक ऐसा रक्षा कवच बना देता है जिसे भेदना किसी के बस की बात नहीं।
साधना शुरू करने से पहले नोट कर लें ये जरूरी नियम
इस महाविद्या की ऊर्जा को सिद्ध करने के लिए कुछ कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। इस दिव्य रक्षा कवच को जाग्रत करने के लिए कुल 1 लाख मंत्रों का जप करने का विधान है। आप अपनी हिसाब के अनुसार इसे 14 से 21 दिनों के भीतर सम्पूर्ण कर सकते हो।
विशेष नोट: तंत्र मार्ग में कदम रखने से पहले मन की एकाग्रता और दिव्य शक्तियों का अनुभव बहुत जरूरी है। यदि आप ऐसी ही अन्य गुप्त साधनाओं के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारी इस विशेष गाइड [Hakini Siddhi Shabar Mantra: नियम, साधना विधि और सच] को भी एक बार जरूर पढ़ें, जिससे साधना के कड़े नियम आपको अच्छे से समझ आ जाएं।
साधना काल के दौरान आपका कपड़ा पीले रंग का होना चाहिए, बैठने के लिए पीला आसन और जप के लिए केवल हल्दी की माला का ही इस्तेमाल करें।
साधना की चौकी सजाने के बाद, मंत्र शुरू करने से पहले नीचे दिए गए संकल्प, विनियोग, न्यास और ध्यान का पाठ पूरी श्रद्धा के साथ करें।
- संकल्प लेने का तरीका
सबसे पहले अपने दाहिने हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत (चावल) और पीला फूल लेकर यह संकल्प जोर से पढ़ें:
संकल्प: ऊँ तत्सद्य……….प्रसाद सिद्धी द्वारा पर कृत्या नष्टार्थे पर-मंत्र, पर-तन्त्र, पर-यंत्र भक्षार्थे च मम सर्वाभीष्ठ सिद्धियर्थे भगवती बगला मूलमंत्र सम्पुटे पर विद्या भक्षिणी मंत्र एक लक्ष जपे अहम् कुर्वे।
- विनियोग
ऊँ अस्य श्री पर विद्या-भेदिनी बगलामुखी मन्त्रस्य श्री ब्रह्मा ऋषिः, गायत्री छन्दः, पर विद्या भक्षिणी श्री बगलामुखी देवता, आं बीजं, ह्ल्रीं शक्ति, क्रो कीलंक, श्री बगला-देवी-प्रसाद सिद्धि द्वारा पर-विद्या भेदनार्थे जपे विनियोगः।
- ऋष्यादि न्यास
श्री ब्रह्मर्षये नमः शिरसि, गायत्री छन्दसे नमः मुखे, पर विद्या भक्षिणी श्री बगलामुखी देवतायै नमः हृदि, आं बीजाय नमः गुहो, ह्ल्रीं शक्तिये नमः पदियोः, क्रों कीलकाये नमः सर्वाग्ङे, श्री बगलादेवी प्रसाद सिद्धि द्वारा पर विद्या भेदनार्थेजपे विनियोगाय नमः अज्जलौ।
- कर-न्यास
आं हृीं क्रों अंगुष्ठाभ्यां नमः, वद वद तर्जनीभ्यां स्वाहा, वाग्वादिनि मध्यमाभ्यां वषट्, स्वाहा अनामिकाभ्यां हुं, ऐ क्लीं सौं कनिष्ठाभ्यां वौष्ट्, ह्ल्रीं करतल-कर-पुष्टाभ्यां फट्।
- अग्ङ न्यास
आं ह्लीं क्रों हृदयाय नमः, वद वद शिर से स्वाहा, वाग्वादिनि शिखायै वषट्, स्वाहा कवचाय हुं, ऐं क्लीं सौ नेत्र-त्रयाय वौष्ट्, ह्ल्रीं अस्त्राय फट्।
- माँ भगवती का मूल ध्यान
हाथ जोड़कर आँखें बंद करें और माँ बगलामुखी के इस स्वरूप का ध्यान धरें:
सर्व मंत्र मयीं देवीं, सर्वाकर्षण-कारिणीम्। सर्व विद्या भक्षिणी च भजेऽहं विधि पूर्वकम्।
Parvidya Bhakshini Mantra (127 अक्षर का महामंत्र)
इस मंत्र को ध्यान से नोट कर लें। जहाँ भी मंत्र के बीच में ‘8’ का अंक लिखा दिखाई दे, वहाँ आपको सम्पुट लगाना है। यानी उस ‘8’ की जगह पर आपको “ह्लीं से क्षौम तक” के इन आठों बीजाक्षरों (ह्लीं श्रीं ह्रीं ग्लौं ऐ क्लीं हुं क्षौं) को एक साथ बिना रुके पढ़ना है।
मंत्र: “ऊँ ह्लीं श्रीं ह्रीं ग्लौं ऐ क्लीं हुं क्षौं बगला मुखि पर प्रयोगम् ग्रस ग्रस, ऊँ 8 ब्रह्मास्त्र रूपिणि पर विद्या-ग्रासिनि! भक्षय भक्षय, ऊँ 8 पर-प्रज्ञा हारिणि! प्रज्ञां भ्रंशय भ्रंशय ऊँ 8 स्तम्भ नास्त्र रूपिणि! बुद्धिं नाशय नाशय, पच्चेन्द्रिय-ज्ञांन भक्ष भक्ष, ऊँ 8 बगला मुखि हुं फट् स्वाहा ।”
एक गुप्त बात गांठ बांध लो—अगर इस अनुष्ठान के तुरंत बाद विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र का संपुट लगाकर कुछ माला फेर ली जाएं, तो वह जमीन में गाड़े गए तांत्रिक सामान यानी गड़ंत को जड़ से खींचकर नष्ट कर देता है।
हवन सामग्री और पूर्णता की विधि
जब आपके 1 लाख जप पूरे हो जाएं, तो इस साधना की पूर्णता के लिए दशांश (दसवां हिस्सा) हवन करना जरूरी है। इसकी विशेष हवन सामग्री नोट करें: हल्दी की गाठें, पीली सरसों और साबुत सूखी लाल मिर्च। इन तीनों को मिलाकर कडुवे तेल (यानी सरसों के तेल) में अच्छी तरह सान लें और इसी से अग्नि में आहुतियां दें।
मेरे 15+ साल के अनुभव की एक सच्ची घटना: जब श्मशान की चौकी फेल हुई
आज से करीब सात साल पहले की बात है। बिहार के एक बहुत बड़े कोयला व्यापारी अपने इकलौते बेटे को लेकर मेरे पास आए थे। लड़के की हालत देखकर मेरी रूह कांप गई—वह बिल्कुल कंकाल बन चुका था। डॉक्टरों के सारे बड़े टेस्ट, एमआरआई सब नॉर्मल थे, लेकिन लड़का बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था और दिन-ब-दिन मौत के करीब जा रहा था। उधर उनका करोड़ों का कारोबार अचानक कौड़ियों के भाव आ गया और घर की महिलाओं को रात में डरावनी आवाजें सुनाई देती थीं।
जब मैंने उनकी कुंडली बिचार किया, तो मामला कुछ गड़बड़ देखने लगा। लग्न भाव की राहू की वजह से उनके सगे लोग ने अघोरी को भारी पैसा देकर उनके पूरे परिवार पर ‘मारण और गड़ंत क्रिया’ कराया गया था। यह समय में, उनको मुसीबत से बचाने केलिए अभिचार कर्म निवारण उपाय को शुरू करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।
मैंने अपने सानिध्य में उनके बेटे के नाम से यह विशेष अनुष्ठान शुरू करवाया। जब मंत्र जप का 11वां दिन ही चल रहा था कि एक चमत्कार हुआ। उनके घर के पिछवाड़े में, जहाँ नीम का पेड़ था, वहाँ की मिट्टी अपने आप फटी और उसके भीतर से सिंदूर से सनी हुई एक मिट्टी की हांडी और काले कपड़े में लिपटी सुइयां सब बाहर आ गईं। जैसे ही वह तांत्रिक गड़ंत बाहर आई, लड़के ने उसी दिन शामको पहली बार अपने हाथों से खाना खाया। आज उनका बेटा बिल्कुल स्वस्थ है और व्यापार पहले से चौगुना चल रहा है। यह साक्षात माँ पीताम्बरा की शक्ति का साक्षात प्रमाण था।
Frequently Asked Questions (FAQ)
सवाल 1: क्या Parvidya Bhakshini Mantra का जाप कोई भी आम इंसान सीधे घर पर शुरू कर सकता है?
जवाब: देखो भाई, साफ और सीधी बात है। यह माँ बगलामुखी की बेहद उग्र और तीक्ष्ण संहारक शक्ति है। इसे बिना किसी योग्य गुरु की देखरेख या बिना दीक्षा लिए अपने मन से घर पर शुरू करने की गलती भूलकर भी मत करना। इसकी तीव्र ऊर्जा को संभालने की औकात (क्षमता) हर किसी में नहीं होती, इसलिए गुरु की आज्ञा और सुरक्षा कवच अनिवार्य है।
सवाल 2: इस तांत्रिक अनुष्ठान के दौरान खान-पान और रहने के क्या नियम हैं?
जवाब: जितने दिन भी साधना चलेगी, आपको पूरी तरह से कड़े ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा—मन, वचन और कर्म तीनों से। खाने में तामसिक चीजें जैसे प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा (शराब) का नाम भी नहीं आना चाहिए, खाना बिल्कुल सात्विक होना चाहिए। और हाँ, अपनी इस साधना की बात अपने तक ही गुप्त रखें, बाहर किसी के सामने ढिंढोरा पीटने की जरूरत नहीं है।
सवाल 3: अगर शत्रु ने कई साल पहले कोई क्रिया करवाई हो, तो क्या यह काट करेगी?
जवाब: बिल्कुल करेगी, सौ प्रतिशत करेगी। तांत्रिक क्रिया चाहे 10 साल पुरानी हो या कल शाम को की गई हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जब इस महामंत्र का एक लाख जप पूरा होता है, तो यह ब्रह्मांड में मौजूद विरोधी की उस तांत्रिक ऊर्जा की जड़ों को काटकर उसे सोख लेता है। इसके बाद जब हम विपरीत प्रत्यंगिरा का संपुट लगाते हैं, तो पुरानी से पुरानी दबी हुई गड़ंत भी जलकर भस्म हो जाती है।
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ज्योतिषाचार्य प्रदीप कुमार
जय माँ कामाख्या